बिहार में बालू घाटों पर लापरवाही पड़ेगी भारी, नियम तोड़ने पर 10 लाख तक जुर्माना
बिहार में बालू घाटों पर सख्ती
निष्कर्ष भारत, संवाददाता-बिहार– बिहार में बालू खनन शुरू होने के साथ ही खान एवं भू-तत्व विभाग ने पट्टाधारियों को खनन नियमावली का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बालू घाटों पर सुरक्षा, निगरानी और निर्धारित व्यवस्थाओं में लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जिलाधिकारी यानी समाहर्ता संबंधित पट्टाधारी पर एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकते हैं। नए प्रावधानों के तहत घाट पर साइन बोर्ड नहीं लगाने, सीमा का भू-निर्देशांक के साथ सीमांकन नहीं करने और सीसीटीवी फुटेज का बैकअप सुरक्षित नहीं रखने जैसी लापरवाहियों पर भी आर्थिक दंड का प्रावधान है।
बालू घाटों पर नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
बिहार में बालू खनन से जुड़े घाटों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने पट्टाधारियों को नए प्रावधानों की याद दिलाई है। विभाग का जोर इस बात पर है कि खनन के दौरान निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था, घाट की पहचान और निगरानी से संबंधित नियमों की अनदेखी नहीं की जाए।
विभागीय जानकारी के अनुसार, इस वर्ष मई में खनन नियमावली में नए प्रावधान किए गए थे, जिनका गजट प्रकाशन भी किया जा चुका है। इन प्रावधानों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले पट्टाधारियों पर निर्धारित सीमा के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है।
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जिलाधिकारी को नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करने और एक लाख से 10 लाख रुपये तक का दंड लगाने का अधिकार दिया गया है। इससे बालू घाटों के संचालन में लापरवाही करने वाले पट्टाधारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और नियमों के अनुपालन को लेकर जवाबदेही तय की जा सकेगी।
साइन बोर्ड नहीं लगाया तो एक लाख रुपये तक जुर्माना
नए प्रावधानों के अनुसार, बालू घाट पर जरूरी साइन बोर्ड नहीं लगाने की स्थिति में पट्टाधारी पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
साइन बोर्ड घाट की पहचान और वहां लागू नियमों की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे बोर्ड के माध्यम से संबंधित स्थान की जानकारी और आवश्यक निर्देश प्रदर्शित किए जा सकते हैं। इसलिए खनन स्थलों पर निर्धारित सूचना व्यवस्था बनाए रखना जरूरी होगा।
विभाग ने घाट की सीमा को भू-निर्देशांक यानी जियो-कोऑर्डिनेट्स के साथ चिह्नित करने पर भी जोर दिया है। यदि पट्टाधारी घाट की निर्धारित सीमा का भू-निर्देशांक के साथ सीमांकन नहीं करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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सीमा का सही निर्धारण होने से खनन क्षेत्र की पहचान स्पष्ट करने और निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन जैसी संभावित अनियमितताओं पर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है।
छह महीने का CCTV फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी
बालू घाटों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरों से जुड़े नियमों का पालन भी अनिवार्य किया गया है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार, पिछले छह महीने के सीसीटीवी फुटेज का बैकअप सुरक्षित नहीं रखने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर संबंधित फुटेज दोबारा उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में भी पट्टाधारी पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
सीसीटीवी फुटेज खनन स्थल पर गतिविधियों की निगरानी करने और किसी विवाद या अनियमितता की जांच में मददगार हो सकते हैं। ऐसे में फुटेज का सुरक्षित बैकअप रखना केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रावधान है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि पट्टाधारियों को इन नियमों का गंभीरता से पालन करना होगा। औचक निरीक्षण के दौरान नियमों में कमी पाए जाने पर संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण भी है मकसद
खनन नियमावली के प्रावधानों का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि बालू घाटों के संचालन को व्यवस्थित करना भी है। विभाग के मुताबिक, इन नियमों के जरिए खनन स्थलों पर निगरानी मजबूत करने, धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण रखने तथा निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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बालू खनन के दौरान वाहनों की आवाजाही, सामग्री की ढुलाई और अन्य गतिविधियों के कारण आसपास के इलाकों में धूल और प्रदूषण की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में नियमों का पालन और नियमित निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसके साथ ही घाट की सीमा का स्पष्ट निर्धारण और सीसीटीवी व्यवस्था बनाए रखने से खनन कार्यों की निगरानी में मदद मिल सकती है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य पट्टाधारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह बनाना है।
पट्टाधारियों को नियमों का पालन करने की चेतावनी
बालू खनन शुरू होने के बाद विभाग की ओर से नियमों की याद दिलाए जाने को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब पट्टाधारियों को घाट पर जरूरी साइन बोर्ड, निर्धारित सीमांकन और सीसीटीवी फुटेज के बैकअप जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना होगा।
नियमों की अनदेखी करने पर जिलाधिकारी द्वारा जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित उल्लंघन और लागू नियमों के आधार पर होगी।
कुल मिलाकर, बिहार में बालू घाटों के संचालन को लेकर विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घाटों पर निरीक्षण और निगरानी के दौरान इन प्रावधानों का पालन किस तरह सुनिश्चित कराया जाता है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
