पटना में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, 4 छात्र घायल, बैरिकेडिंग तोड़ी
पटना में छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेडिंग टूटी; पुलिस से हुई झड़प
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। पटना में सोमवार को छात्र-युवाओं के साथ मजदूर और किसान भी सड़क पर उतरे हैं। सभी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आक्रोश मार्च निकाल रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल होने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी जेपी गोलंबर पहुंचे। जेपी गोलंबर पर कुछ ही सेकेंड में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इस दौरान पटना पुलिस प्रशासन ने छात्रों पर हल्का बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज करने के बाद हंगामा हुआ। लाठीचार्ज की घटना में चार छात्रों के घायल होने की भी सूचना है। डाकबंगला पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई। वहीं लाठीचार्ज के दौरान 4 छात्रों को सिर, कंधे और हाथों में चोट आई है।
जेपी गोलंबर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ ही देर में बैरिकेडिंग टूट गई और प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें नीचे उतारने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने कंटीले तारों से बैरिकेडिंग कर रखी थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
छात्रों की मांगों को लेकर प्रदर्शन तेज
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और नियमितता जरूरी है। प्रदर्शनकारी अविनाश ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, कई विभागों में वैकेंसी नहीं निकल रही है और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र भी समय पर नहीं चल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी को आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया।
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बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों के संगठनों का विरोध पहले भी सामने आता रहा है। अगस्त में भी पटना में छात्रों के मार्च के दौरान बैरिकेडिंग टूटने और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी थी। उस समय प्रदर्शनकारियों ने BPSC और शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़े बदलावों की मांग उठाई थी।
मेडिकल छात्रों का सीएम हाउस घेराव का ऐलान
पटना में मेडिकल छात्रों ने भी अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम बनाया। छात्रों की प्रमुख मांग बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज यानी BUHS में स्थायी कुलपति की नियुक्ति है।
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छात्रों का कहना है कि स्थायी कुलपति की नियुक्ति से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इसके साथ ही मेडिकल छात्रों ने शैक्षणिक सत्र नियमित करने की मांग भी उठाई है। प्रदर्शन में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के शामिल होने की बात भी कही गई थी।
जेपी गोलंबर पर टूटी बैरिकेडिंग
गांधी मैदान से मार्च आगे बढ़ने के बाद प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर पहुंचे। यहां पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और देखते ही देखते कुछ लोग बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।

प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद भीड़ आगे बढ़कर डाकबंगला की ओर चली गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए जेपी गोलंबर की एक तरफ की सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
डाकबंगला पर कंटीले तार और भारी पुलिस बल
डाकबंगला चौराहे पर प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कंटीले तारों वाली बैरिकेडिंग लगाई थी। यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें पीछे धकेला।
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काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग के एक हिस्से को तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर धक्का-मुक्की हुई। स्थिति पर नजर रखने के लिए पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा भी डाकबंगला पहुंचे। प्रशासन की ओर से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कई महिला प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और मांगों को लेकर सड़क पर आई हैं। पुलिस की कार्रवाई को लेकर उन्होंने सवाल उठाए।
प्रदर्शन में शामिल अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर भी दिखाए। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बिहार में हाल के दिनों में कई राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शन हो चुके हैं। 25 सितंबर को भी पटना में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था।
पप्पू यादव भी प्रदर्शन में पहुंचे
प्रदर्शन में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी पहुंचे। जेपी गोलंबर के पास जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश कर रहे थे, तब वह उन्हें रोकते हुए नजर आए। पप्पू यादव इससे पहले भी पटना में छात्रों और युवाओं से जुड़े आंदोलनों में पहुंच चुके हैं।
किसान-मजदूरों ने भी उठाए अपने मुद्दे
यह मार्च सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा। इसमें किसान, खेत मजदूर, ट्रेड यूनियन, महिला संगठन और युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, मार्च में महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, कृषि संकट और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार का मुद्दा प्रमुख रहा।
मार्च गांधी मैदान से शुरू होकर जेपी गोलंबर, डाकबंगला, तारामंडल और इनकम टैक्स गोलंबर होते हुए लोक भवन की ओर जाने का कार्यक्रम था। किसान और मजदूर संगठनों ने बाढ़ और सूखा की समस्या के स्थायी समाधान की मांग भी उठाई।
भूमि अधिग्रहण और बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा
प्रदर्शन में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी उठाया गया। आयोजकों ने किसानों और ग्रामीणों से जुड़े भूमि विवादों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। संगठनों की ओर से बुलडोजर कार्रवाई और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों पर भी विरोध दर्ज कराया गया।

भाकपा और उससे जुड़े किसान, मजदूर और छात्र संगठनों ने मार्च में भागीदारी की। 28 सितंबर के लोक भवन घेराव की तैयारी को लेकर अलग-अलग जिलों में छात्र-युवा कार्यकर्ताओं की बैठकें भी आयोजित की गई थीं।
महिला हिंसा और रोजगार के सवाल भी एजेंडे में
आंदोलन के एजेंडे में महिला हिंसा, अपराध, कानून-व्यवस्था और कथित एनकाउंटर से जुड़े मुद्दे भी शामिल किए गए। इसके अलावा योजना एवं संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, मजदूरों के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठाए गए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की मांगों को एक मंच पर लाना है। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती प्रदर्शन को नियंत्रित रखने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की रही। पटना में इससे पहले भी छात्र आंदोलनों के दौरान जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहा प्रमुख टकराव वाले स्थल रहे हैं।
प्रदर्शन के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। जेपी गोलंबर और डाकबंगला की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश और पुलिस की रोक के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई। देर तक चले प्रदर्शन से राजधानी के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
