शेयर बाजार क्रैश: 6 लाख करोड़ स्वाहा, ये 5 वजहें जिम्मेदार
शेयर बाजार में सोमवार को बड़ा भूचाल आया। सेंसेक्स 1000 अंक टूटा और बाजार पूंजीकरण में करीब 6 लाख करोड़ की गिरावट आई।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,000 के नीचे फिसल गया। एक घंटे के भीतर बाजार की कुल वैल्यू में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई, जबकि अलग-अलग चरणों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये तक की गिरावट बताई गई।
बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
शेयर बाजार पर US-Iran तनाव का दबाव
सोमवार की गिरावट का सबसे बड़ा वैश्विक कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को माना जा रहा है। सप्ताहांत में ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और संघर्ष खत्म करने से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार नहीं किया। इससे बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद कमजोर हुई और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसलिए यहां लंबे समय तक तनाव रहने की आशंका का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
शेयर बाजार में कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। सप्ताहांत में ब्रेंट में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेज उछाल को शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।
US बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर असर
अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है। सोमवार को यह 5.2 फीसदी से ऊपर चली गई, जो करीब दो दशक के उच्च स्तर के आसपास बताई गई।
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बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित फिक्स्ड-इनकम निवेश में ज्यादा आकर्षण नजर आ सकता है। इससे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सावधानी बढ़ सकती है। भारत जैसे बाजारों में विदेशी निवेशकों की रणनीति पर भी अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 95.88 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे एक बार फिर 96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर बाजार के फोकस में आ गया है।
कच्चे तेल की महंगाई और मजबूत डॉलर रुपये पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारण हैं। तेल महंगा होने पर भारत को डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बड़ा कारण
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की बिकवाली भी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक पिछले सप्ताह भी विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली जारी रही। शुक्रवार को FII ने भारतीय शेयरों में करीब 3,693.93 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।
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विदेशी निवेशक जब भारतीय शेयरों से पैसा निकालते हैं तो बाजार पर सीधा बिक्री दबाव बन सकता है। मौजूदा समय में ऊंचा तेल मूल्य, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी जैसे कारक विदेशी निवेशकों के लिए भारत समेत उभरते बाजारों में जोखिम को प्रभावित कर रहे हैं।
शेयर बाजार पहले से भी दबाव में था
सोमवार की गिरावट अचानक बने किसी एक कारण का परिणाम नहीं है। इससे पहले सेंसेक्स और निफ्टी लगातार सात कारोबारी सप्ताह की गिरावट का सिलसिला देख चुके थे। शुक्रवार तक दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार कमजोरी बनी हुई थी।

ऐसे माहौल में सोमवार को कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और भू-राजनीतिक तनाव के फिर तेज होने से बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। बाजार में पहले से मौजूद सतर्कता ने गिरावट को और तेज किया।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। शुरुआती कारोबार में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घटने की रिपोर्ट सामने आई। बाद के कारोबार में यह नुकसान करीब 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की खबरें भी आईं।
इसका अर्थ यह है कि बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कुल वैल्यू में बड़ी कमी आई। हालांकि बाजार पूंजीकरण में गिरावट को सीधे निवेशकों के बैंक खाते से निकली नकद रकम के रूप में नहीं समझना चाहिए। यह शेयरों के बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाता है।
आगे शेयर बाजार में किन संकेतों पर नजर?
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और रुपये की चाल भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत होंगे।
सोमवार की गिरावट में कई बाहरी कारक एक साथ सक्रिय रहे। ऐसे में बाजार की आगे की दिशा भी वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। फिलहाल शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है और निवेशकों के लिए बाजार से जुड़े ताजा आंकड़ों तथा आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
