प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, कहा- JDU के नेता मुझे कागज दे रहे, जानें PK ने कहा क्या?
प्रशांत किशोर का दावा, JDU नेताओं से जुड़े कागज सार्वजनिक करने की चेतावनी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्माने लगा है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधान पार्षद नीरज कुमार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोपों और दावों तक पहुंच गई है। प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि पिछले डेढ़ साल के दौरान जदयू नेताओं से जुड़ी कई जानकारियां और दस्तावेज उन्हें दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीरज कुमार ने आगे बयानबाजी जारी रखी, तो वह इन दस्तावेजों और कथित जानकारियों को सार्वजनिक कर देंगे।
प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वे किन दस्तावेजों की बात कर रहे हैं और उनका दावा कितना सही है। हालांकि, फिलहाल इन कथित दस्तावेजों की सामग्री और उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला अभी आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है।
प्रशांत किशोर ने नीरज कुमार को क्या चेतावनी दी?
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने नीरज कुमार की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा कि बुखार होने पर वह पैरासिटामोल खा लेंगे और नीरज कुमार को इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नीरज कुमार डॉक्टर नहीं हैं और अब बेरोजगार होने वाले हैं।
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इसके बाद पीके ने कहा कि यदि नीरज कुमार ने उनके खिलाफ आगे कोई बयान दिया, तो वह जदयू नेताओं के खिलाफ किए गए कथित कार्यों और उन्हें मिली जानकारियों का ब्योरा सार्वजनिक कर देंगे। प्रशांत किशोर के मुताबिक, पिछले एक से डेढ़ साल में नीरज कुमार ने जदयू नेताओं से संबंधित क्या-क्या जानकारी दी और कौन से कागज उन्हें सौंपे, इसका खुलासा वह कर सकते हैं।
यह बयान बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से जिन दस्तावेजों का जिक्र किया है, उनकी विस्तृत सामग्री उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके दावे की पुष्टि दस्तावेज सामने आने और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
MLC चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर का बड़ा दावा
प्रशांत किशोर ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को लेकर भी एनडीए पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर में 480 नेताओं की बैठक के बाद एनडीए की बेचैनी दिखाई दी थी और अब एमएलसी चुनाव को लेकर भी गठबंधन में घबराहट है।
पीके ने कहा कि एनडीए चाहे विधानमंडल की बैठक बुलाए या विधान परिषद से जुड़ी रणनीति बनाए, शिक्षक और स्नातक मतदाता उसके उम्मीदवारों को हराने का मन बना चुके हैं। यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन है। चुनाव में मतदाताओं का वास्तविक रुझान और नतीजे मतदान के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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बिहार में विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में संबंधित मतदाता वर्ग की भूमिका अहम होती है। ऐसे में चुनाव से पहले नेताओं के बयान, संगठनात्मक बैठकें और एक-दूसरे पर हमले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
नीरज कुमार ने पहले क्या कहा था?
प्रशांत किशोर के बयान से पहले जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार ने उन्हें भाषा की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी थी। नीरज कुमार ने कहा था कि प्रशांत किशोर को अपनी जुबान पर लगाम रखनी चाहिए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिप्पणी करते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशांत किशोर सरकार की नीतियों की आलोचना करने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियां करते हैं। नीरज कुमार ने यह भी कहा था कि बांकीपुर की सीट जीतने से किसी को खुद को वैश्विक विचारक समझने की जरूरत नहीं है और उन्हें अपनी सीमा में रहना चाहिए।
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नीरज कुमार ने दावा किया था कि इससे पहले उन्होंने प्रशांत किशोर की 14 कंपनियों से कथित संबंधों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने इस संबंध में खुलासा किया था, तब प्रशांत किशोर ने जवाब नहीं दिया। ये नीरज कुमार के आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
नीरज कुमार ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि प्रशांत किशोर को सार्वजनिक बयान देते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। इसी बयान के जवाब में प्रशांत किशोर ने कथित दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात कही है।
अशोक चौधरी पर आरोपों से भी गरमाई थी राजनीति
प्रशांत किशोर पहले भी जदयू नेताओं पर आरोप लगाकर राजनीतिक विवाद पैदा कर चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कागज दिखाते हुए पीके ने दावा किया था कि अशोक चौधरी ने मंत्री रहते हुए अपनी पत्नी, बेटी और समधन से जुड़े एक ट्रस्ट के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बेनामी संपत्ति और जमीनें खरीदीं।
हालांकि, अशोक चौधरी ने इन आरोपों को साबित करने की चुनौती दी थी और प्रशांत किशोर को मानहानि का नोटिस भेजा था। ऐसे मामलों में आरोपों और दस्तावेजों की कानूनी जांच तथा संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
इस विवाद ने बिहार की राजनीति में भ्रष्टाचार और संपत्ति से जुड़े आरोपों को लेकर बहस तेज कर दी थी। अब नीरज कुमार के साथ चल रही बयानबाजी ने एक बार फिर इन मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
मंगल पांडेय और संजय जायसवाल पर भी लगाए थे आरोप
प्रशांत किशोर ने इससे पहले भाजपा नेताओं मंगल पांडेय और संजय जायसवाल पर भी आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि संजय जायसवाल के पेट्रोल पंप से जुड़े मामले के कारण करीब दस साल तक फ्लाईओवर निर्माण प्रभावित रहा। उन्होंने फर्जी बिल और नगर निगम की गाड़ियों के बिल के नाम पर पेट्रोल चोरी तथा भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे।
इसी तरह, मंगल पांडेय के संबंध में पीके ने दावा किया था कि उनकी पत्नी उर्मिला पांडेय के एक बैंक खाते में वर्ष 2019-20 के दौरान दो करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया था कि इस रकम का स्रोत क्या था।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में निर्णायक प्रमाण और संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। इसलिए इन दावों को भी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?
प्रशांत किशोर और नीरज कुमार के बीच विवाद अब केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा है। एक तरफ जदयू नेता प्रशांत किशोर की भाषा और राजनीतिक टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पीके ने कथित दस्तावेज सार्वजनिक करने की चेतावनी देकर विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर वास्तव में उन कागजों को सार्वजनिक करेंगे, जिनका उन्होंने दावा किया है। यदि दस्तावेज सामने आते हैं, तो उनकी प्रामाणिकता और उनमें किए गए दावों की जांच महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, नीरज कुमार या जदयू की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
बिहार में एमएलसी चुनाव से पहले प्रशांत किशोर और जदयू के बीच टकराव तेज हो गया है। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन कथित दस्तावेजों की सामग्री और दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। चुनावी माहौल में यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
राज कुमार की रिपोर्ट
