Gen-Z पर राहुल का दावा, कहा- BJP को वोट नहीं देना चाहते युवा, मची सियासी हलचल

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Gen-Z वोट पर राहुल गांधी का बड़ा दावा, चुनाव आयोग पर सवाल

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। Gen-Z के वोट को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि Gen-Z मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 2024 के बाद वार्षिक स्पेशल समरी रिवीजन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं को परेशानी हो सकती है।

राहुल गांधी ने इस मुद्दे को चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। ऐसे में Gen-Z वोटरों से जुड़ा यह मुद्दा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया पर बहस का विषय बन गया है।

Gen-Z वोटरों पर राहुल गांधी का दावा

राहुल गांधी ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में Gen-Z पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि वार्षिक मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में देरी से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने पर असर पड़ रहा है।

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इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 के वार्षिक Summary Revision को लेकर देरी की बात सामने आई है और यह प्रक्रिया 2024 के चुनावी चक्र के बाद से लंबित रहने की रिपोर्ट है। रिपोर्ट में कहा गया कि नए 18 वर्षीय मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आए हैं।

हालांकि, इसे सीधे तौर पर सभी Gen-Z युवाओं को मतदान से वंचित किए जाने के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए निरंतर अपडेट की व्यवस्था भी मौजूद है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बताया था कि 18-29 आयु वर्ग के दो करोड़ से अधिक Gen-Z मतदाता जोड़े गए थे।

चुनाव आयोग के अंदर 14 आपत्तियों का मुद्दा

राहुल गांधी के बयान के बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद का मुद्दा भी चर्चा में है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े मुद्दों से बताया गया है।

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में चुनाव आयोग ने कई संयुक्त ब्रीफिंग भी कीं और सार्वजनिक तौर पर तीनों आयुक्त एक साथ नजर आए। रिपोर्ट में बताया गया कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 14 आपत्तियां दर्ज होने के बावजूद आयोग ने महत्वपूर्ण मौकों पर संयुक्त रूप से काम किया।

आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा

चुनाव आयोग ने कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि संस्थागत deliberation यानी विचार-विमर्श में अलग-अलग टिप्पणियां या विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल के उसके सभी आदेश पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

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यही वजह है कि राहुल गांधी और विपक्ष जहां इन आपत्तियों को गंभीर सवाल के तौर पर देख रहे हैं, वहीं आयोग का कहना है कि इससे उसके अंतिम निर्णयों में किसी तरह की असहमति साबित नहीं होती।

Gen-Z और BJP को लेकर राहुल का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने Gen-Z और बीजेपी के राजनीतिक संबंध को लेकर भी एक दावा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को पता है कि युवा मतदाता उसके पक्ष में नहीं हैं और बड़ी संख्या में युवा उसके खिलाफ हैं।

यह राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है। इसे किसी स्वतंत्र सर्वे या चुनावी आंकड़े से पुष्ट तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। Gen-Z कोई एकसमान राजनीतिक समूह नहीं है और युवाओं की राजनीतिक पसंद अलग-अलग राज्यों, सामाजिक समूहों और चुनावों में अलग हो सकती है।

राहुल ने कहा- वोटिंग देश की नींव

राहुल गांधी ने अपने बयान में मतदान के अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि वोट के माध्यम से सरकारें चुनी जाती हैं और इसी प्रक्रिया से संविधान तथा संस्थाओं को मजबूती मिलती है।

उन्होंने मतदाता सूची में नाम जुड़ने और हटने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए जाने की मांग के संदर्भ में अपनी बात रखी। उनके अनुसार यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं रहता है तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बन जाता है।

वोट चोरी के आरोप फिर दोहराए

राहुल गांधी ने अपनी पुरानी ‘वोट चोरी’ वाली बात को भी दोहराया। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और 2024 का लोकसभा चुनाव भी उनके अनुसार निष्पक्ष नहीं था। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और उनसे अपने दावों को लेकर जवाब देने की मांग की।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग ने इससे पहले भी मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। इसलिए राहुल गांधी के आरोपों को आरोप और राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच लंबे समय से बहस चल रही है। अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियों से जुड़े मामले सामने आए हैं।

पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में अपीलें लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार 18 सितंबर तक पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े 37 लाख से अधिक अपील लंबित थीं।

Gen-Z वोटरों के लिए क्या है सवाल

पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि उनका नाम मतदाता सूची में समय पर दर्ज हो। इसके लिए निर्वाचन आयोग की मौजूदा प्रक्रिया के तहत योग्य नागरिक आवेदन कर सकते हैं और अपने नाम की स्थिति की जांच कर सकते हैं।

राहुल गांधी के बयान के बाद Gen-Z का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि आने वाले चुनावों में नए युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2024 के चुनाव से पहले ही चुनाव आयोग ने युवा मतदाताओं के पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि की जानकारी दी थी।Gen-Z वोटरों को लेकर राहुल गांधी के दावे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

एक तरफ कांग्रेस इन मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं चुनाव आयोग अपने निर्णयों को सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। ऐसे में आगे की आधिकारिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग की ओर से आने वाली जानकारी इस विवाद के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट