SIR के बाद EC का बड़ा कदम, 20 राज्यों में चलेगा स्पेशल ड्राइव, फिर जुड़ेंगे वोटरों के नाम

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SIR के बाद 20 राज्यों में EC का स्पेशल ड्राइव, फिर जुड़ेंगे नाम

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। SIR के बाद चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में छूटे पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस अभियान का मकसद उन मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम किसी कारण से SIR के दौरान सूची में शामिल नहीं हो सके। इसके साथ ही 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को भी मतदाता सूची में जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

चुनाव आयोग की ओर से यह निर्देश 29 सितंबर को सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में दिया गया था। 1 अक्टूबर को सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इस अभियान को लेकर निर्देश दोहराए गए। आयोग ने कहा है कि मतदाता पंजीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और कोई भी पात्र नागरिक केवल SIR के दौरान नाम शामिल नहीं होने के कारण मतदान सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए।

SIR के बाद सामान्य Form 6 से जुड़ सकेगा नाम

SIR पूरा हो चुके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब पात्र लोगों के लिए सामान्य Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का रास्ता खुला रहेगा। इसके लिए SIR के दौरान इस्तेमाल किया गया अतिरिक्त घोषणा पत्र जरूरी नहीं होगा।

आयोग के निर्देश के मुताबिक SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा की आवश्यकता सिर्फ उस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान थी। अब सामान्य मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया के तहत Form 6 के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इसका मतलब है कि यदि कोई पात्र व्यक्ति SIR के दौरान सूची में शामिल नहीं हो सका है, तो वह सामान्य प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।

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यह व्यवस्था उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनका नाम पुरानी मतदाता सूची में था, लेकिन SIR के बाद तैयार सूची में दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा पहली बार मतदान के योग्य युवाओं के लिए भी नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर दिया गया है।

SIR से पहले और बाद की वोटर लिस्ट का होगा मिलान

विशेष अभियान के तहत चुनाव अधिकारियों को SIR से पहले और उसके बाद तैयार हुई मतदाता सूचियों की तुलना करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनके नाम पहले की सूची में थे लेकिन बाद की सूची में नहीं हैं।

खास तौर पर उन मामलों को देखा जाएगा, जहां नाम हटने की वजह स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों को यह भी जांचना होगा कि संबंधित व्यक्ति का नाम किसी दूसरी जगह की मतदाता सूची में तो नहीं है। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि वह डुप्लीकेट मतदाता नहीं है और उसकी मृत्यु नहीं हुई है।

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यदि जांच के बाद व्यक्ति पात्र पाया जाता है तो बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO उसके घर जाकर Form 6 भरने में सहायता कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से उन लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने में मदद मिलेगी, जो SIR के दौरान किसी कारण से छूट गए हैं।

BLO घर तक पहुंचकर कर सकते हैं मदद

चुनाव आयोग के विशेष अभियान में BLO की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं की पहचान करने के बाद उनके घर तक पहुंचकर आवेदन प्रक्रिया में सहायता करने के लिए कहा गया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल जानकारी या तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। खासकर ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जाएगा जिनका नाम SIR से पहले की सूची में मौजूद था, लेकिन बाद की सूची में नहीं मिला।

इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की पहचान और उनका पंजीकरण भी अभियान का हिस्सा होगा। इससे उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और पहली बार मतदान के लिए पात्र हुए हैं।

SIR अभियान में राजनीतिक दलों की भी भूमिका

चुनाव आयोग ने इस अभियान में राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों की मदद लेने की बात भी कही है। संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान में राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय किया जाए।

SIR के दौरान मतदाता सूची में नामों को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में विशेष अभियान के जरिए छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान और उनके नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ नाम हटे थे। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम हटना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता बनने की पात्रता खत्म होना नहीं है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

गोवा के 97 मामलों से समझिए SIR के बाद की प्रक्रिया

गोवा का मामला इस प्रक्रिया को समझने के लिए एक उदाहरण के तौर पर सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार 97 ऐसे लोगों को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने पात्र पाया, लेकिन उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए।

इसके बाद BLO को इन लोगों के घर जाकर Form 6 उपलब्ध कराने और आवेदन प्रक्रिया में सहायता करने के निर्देश दिए गए। 26 सितंबर तक इनमें से 81 लोगों ने Form 6 भर दिया था। बाद में आयोग की ओर से बताया गया कि 97 में से 88 लोग या तो Form 6 के लिए आवेदन कर चुके थे या उनके आवेदन स्वीकार हो चुके थे।

बाकी बचे नौ मामलों में तीन लोगों के पास पुर्तगाली पासपोर्ट पाया गया, जबकि छह लोग भारत से बाहर रह रहे थे। यह उदाहरण बताता है कि SIR के बाद भी पात्रता की जांच और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की अलग प्रक्रिया जारी रह सकती है।

SIR के बाद नाम नहीं है तो क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति पात्र मतदाता है और SIR के बाद मतदाता सूची में उसका नाम नहीं दिख रहा है, तो सामान्य Form 6 के माध्यम से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान आवश्यक अतिरिक्त घोषणा पत्र अब सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।

मतदाता को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि उसका नाम संबंधित मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं। नाम नहीं मिलने की स्थिति में पात्रता के अनुसार Form 6 के जरिए आवेदन किया जा सकता है। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी आवेदन की जांच करेंगे और नियमों के तहत नाम शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

SIR के बाद नए अभियान पर नजर

चुनाव आयोग का यह विशेष अभियान ऐसे समय आया है जब SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। आयोग ने इस अभियान के जरिए एक तरफ छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान पर जोर दिया है, वहीं नए और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को भी गति देने का निर्देश दिया है।

अब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय निर्वाचन अधिकारी SIR से पहले और बाद की सूचियों का मिलान करेंगे। जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूटे मिलेंगे, उनके लिए Form 6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस अभियान की प्रगति पर आने वाले दिनों में चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक दलों की भी नजर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट