सीवान में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 5 लोगों की मौत, धमाके से दो मंजिला मकान ढहा

सीवान

सीवान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, 5 की मौत और मकान ढहा

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (सीवान)। बिहार के सीवान जिले में पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने एक परिवार को उजाड़ दिया। जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में बारूद के बड़े भंडार में धमाका होने से दो मंजिला पक्का मकान पूरी तरह ढह गया। इस हादसे में पटाखा कारोबारी अमरुद्दीन मियां समेत पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में उनके परिवार के चार सदस्य और पटाखे बनाने के लिए बुलाया गया एक मजदूर शामिल है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मकान का मलबा दूर तक बिखर गया और शवों के टुकड़े घटनास्थल से करीब 200 से 300 मीटर दूर तक जा गिरे।

सीवान घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विस्फोट के बाद करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे। मकान में आग लगने के कारण राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं। शुक्रवार रात तक बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए शनिवार सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू किया गया।

सीवान ब्लास्ट में अमरुद्दीन मियां समेत पांच की मौत

सीवान हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान पटाखा फैक्ट्री के मालिक अमरुद्दीन मियां (65), उनकी पोती मुस्कान सिद्दीकी (23), खुशबू सिद्दीकी (13), नाती अरसद सिद्दीकी (8) और मजदूर राज कुमार सिंह उर्फ भोला (35) के रूप में हुई है। हादसे ने एक ही परिवार की कई पीढ़ियों को खत्म कर दिया।

परिवार की बहू और दो अन्य पोतियां गंभीर रूप से झुलस गई हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मकान का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और आसपास के इलाके में पटाखे तथा बारूद से जुड़े सामान बिखरे मिले।

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घटनास्थल पर सीवान पुलिस, अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक साइंस लैब की टीमों को लगाया गया। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया गया, जबकि मेडिकल टीम ने शवों के अवशेषों को एकत्र कर पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा।

सीवान में बारूद के स्टॉक से हुआ भीषण विस्फोट

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अमरुद्दीन मियां शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे बाजार से बारूद और पटाखा बनाने की अन्य सामग्री लेकर घर लौटे थे। बताया जाता है कि मकान में पहले से ही बारूद और तैयार पटाखों का बड़ा स्टॉक मौजूद था। पड़ोसियों ने चार मजदूरों को घर में प्रवेश करते देखा था। वे पटाखे बनाने के काम में मदद करते थे। परिवार की बहू और पोतियां भी इस काम में लगी थीं।

इसी दौरान बारूद में चिंगारी लगने के बाद जोरदार विस्फोट हुआ। हालांकि, विस्फोट की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

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जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह घनी आबादी वाले इलाके में स्थित था। ऐसे में बारूद के बड़े भंडार के कारण हादसे का खतरा और भी गंभीर हो गया। विस्फोट के बाद मकान में आग लग गई। दमकल की टीम ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

सीवान हादसे के बाद थाना प्रभारी और चौकीदार निलंबित

सीवान घटना के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सीवान के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने थाना स्तर पर लापरवाही के आरोप में जामो बाजार थानाध्यक्ष और स्थानीय चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित किए जाने की जानकारी दी है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित की गई है।

सीवान प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि घनी आबादी वाले इलाके में पटाखे बनाने और बारूद का भंडारण किस तरह किया जा रहा था। क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी? क्या संबंधित अधिकारियों को इस कारोबार की जानकारी थी? और यदि जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जांच में इन सवालों के जवाब अहम होंगे।

घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राहत कार्य के साथ-साथ साक्ष्य जुटाने और विस्फोट की परिस्थितियों का पता लगाने की कार्रवाई भी की गई।

15 साल पहले भी हुआ था विस्फोट, बेटे ने दी थी चेतावनी

आलमपुर में पटाखों का कारोबार लंबे समय से चलने की बात सामने आई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, अमरुद्दीन मियां के घर में करीब 15 साल पहले भी विस्फोट हुआ था। उस घटना में उनके बड़े बेटे की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मरने से पहले बेटे ने अपने पिता से पटाखे बनाने का काम छोड़ने और कोई दूसरा व्यवसाय अपनाने की अपील की थी।

इसके बावजूद पटाखे बनाने का कारोबार बंद नहीं हुआ। परिवार ने बाद में भी इसी काम को जारी रखा। करीब दो साल पहले अमरुद्दीन के दूसरे बेटे की भी हत्या हो गई थी। लगातार पारिवारिक त्रासदियों के बाद भी घर में पटाखे बनाए जाते रहे।

इस बार हुए विस्फोट ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। एक ही हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना ने इलाके में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध पटाखा कारोबार और उसकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीवान में नौ महीने पहले भी पटाखा फैक्ट्री में हुआ था ब्लास्ट

सीवान जिले में पटाखा निर्माण से जुड़ा यह पहला बड़ा हादसा नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 22 जनवरी 2026 को हुसैनगंज थाना क्षेत्र के बड़रम गांव में भी पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। उस घटना में 50 वर्षीय मुर्तुजा मंसूरी की मौत हो गई थी।

बताया गया था कि धमाका इतना जोरदार था कि मृतक के शरीर के हिस्से दूर जा गिरे थे। बारूद और पटाखों के निर्माण में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है, यह घटना भी इसका उदाहरण बनी थी।

लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पटाखा निर्माण और भंडारण से जुड़े जोखिमों की प्रभावी निगरानी बेहद जरूरी है। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में विस्फोटक सामग्री रखने से आसपास रहने वाले लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

सीवान में 24 अक्टूबर से अवैध पटाखों के खिलाफ छापेमारी

आलमपुर विस्फोट के बाद जिला प्रशासन ने जिले में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल और अंचल स्तर के अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों तथा अग्निशमन विभाग को संभावित ठिकानों की सघन जांच करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन के अनुसार, 24 अक्टूबर से जिले में विशेष छापेमारी और जब्ती अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान अवैध रूप से पटाखे बनाने, रखने या बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह अभियान कितनी प्रभावी तरीके से लागू होता है और क्या इससे जिले में बारूद के अवैध भंडारण पर रोक लग सकेगी। आलमपुर की घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि विस्फोटक सामग्री के कारोबार में लापरवाही केवल कारोबार करने वालों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे मोहल्ले और आसपास के परिवारों की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है।

फिलहाल, राहत और बचाव कार्य के साथ मामले की जांच जारी है। प्रशासन के सामने मृतकों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने, घायलों का उपचार सुनिश्चित करने और विस्फोट के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का पता लगाने की चुनौती है। जांच के निष्कर्ष और छापेमारी अभियान के परिणाम यह तय करेंगे कि इस दर्दनाक हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था में कितना बदलाव आता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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