स्मार्ट मीटर यूजर्स ध्यान दें! मीटर लगवाया, लेकिन ऐप नहीं चलाते? जानें वजह और फायदे

स्मार्ट मीटर

देश में 5.62 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन ऐप का इस्तेमाल सीमित है। जानें बिजली खपत, रिचार्ज, बैलेंस और शिकायत से जुड़ी जरूरी बातें।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। देशभर में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, ताकि बिजली की खपत, बिलिंग और भुगतान से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सके। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता उससे जुड़ी मोबाइल ऐप की सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मोबाइल पर बिजली की खपत और प्रीपेड बैलेंस देखने की सुविधा उपलब्ध है, तो उपभोक्ता इसका फायदा क्यों नहीं उठा रहे हैं?

बिजली मंत्रालय के मुताबिक, 15 जनवरी 2026 तक देश में अलग-अलग योजनाओं के तहत 5.62 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे। वहीं, आकाशवाणी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटर वाले 20 प्रतिशत से भी कम उपभोक्ता संबंधित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी बड़ी संख्या में लोग ऐसी डिजिटल सुविधा से दूर हैं, जो बिजली के खर्च पर नजर रखने और समय पर रिचार्ज करने में मदद कर सकती है।

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स्मार्ट मीटर का फायदा केवल मीटर बदलने तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी सुविधाओं को समझना और उनका नियमित इस्तेमाल करना भी जरूरी है। आइए जानते हैं कि उपभोक्ता ऐप से दूरी क्यों बना रहे हैं, इसके क्या फायदे हैं और बिजली बिल में गड़बड़ी होने पर शिकायत कहां की जा सकती है।

स्मार्ट मीटर ऐप का इस्तेमाल क्यों नहीं करते उपभोक्ता?

स्मार्ट मीटर लगना और उसका मोबाइल ऐप इस्तेमाल करना दो अलग-अलग बातें हैं। कई उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं होती कि उनके बिजली कनेक्शन के लिए कौन-सा आधिकारिक ऐप उपलब्ध है। कुछ लोगों को ऐप के बारे में पता होता है, लेकिन उन्हें यह समझने में परेशानी होती है कि रजिस्ट्रेशन कैसे करना है और कंज्यूमर नंबर को ऐप से कैसे जोड़ना है।

डिजिटल जानकारी की कमी भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। स्मार्टफोन पर ऐप डाउनलोड करना, लॉगिन करना, पासवर्ड बनाना और बिजली की खपत से जुड़े आंकड़े समझना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। खासकर बुजुर्गों और उन लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है, जो डिजिटल सुविधाओं का नियमित इस्तेमाल नहीं करते।

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इसके अलावा, इंटरनेट की उपलब्धता, रजिस्ट्रेशन में तकनीकी दिक्कतें और ऐप में जानकारी अपडेट होने से जुड़ी समस्याएं भी उपभोक्ताओं को इससे दूर रख सकती हैं। कई लोग अब भी बिजली के बिल या मोबाइल पर आने वाले एसएमएस के आधार पर ही अपने खर्च का हिसाब रखते हैं।

जब तक उपभोक्ताओं को ऐप के फायदे और इस्तेमाल का सही तरीका नहीं बताया जाएगा, तब तक केवल स्मार्ट मीटर लगा देने से डिजिटल सुविधा का पूरा लाभ मिलना मुश्किल है।

स्मार्ट मीटर ऐप को लेकर सर्वे में क्या सामने आया?

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की रिपोर्ट के मुताबिक, छह राज्यों में किए गए एक सर्वे में करीब 52 प्रतिशत उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर ऐप की जानकारी थी, जबकि लगभग 45 प्रतिशत ने इसके इस्तेमाल की बात कही।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं में ऐप का इस्तेमाल पोस्टपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि प्रीपेड मीटर में उपलब्ध बैलेंस पर नजर रखना और समय पर रिचार्ज करना अधिक जरूरी होता है।

हालांकि, सर्वे के आंकड़ों को सभी राज्यों और सभी बिजली उपभोक्ताओं की स्थिति का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। फिर भी ये आंकड़े संकेत देते हैं कि स्मार्ट मीटर की डिजिटल सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

स्मार्ट मीटर ऐप इस्तेमाल करने के क्या हैं फायदे?

स्मार्ट मीटर ऐप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता बिजली की खपत और खर्च से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर देख सकते हैं। इससे उन्हें केवल महीने के अंत में बिल आने का इंतजार नहीं करना पड़ता।

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ऐप में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर उपभोक्ता लगभग वास्तविक समय के आसपास बिजली की खपत का विवरण देख सकते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि घर में बिजली का इस्तेमाल कब और कितना हो रहा है। यदि खपत अचानक बढ़ती दिखाई देती है, तो उपभोक्ता अपने उपकरणों और बिजली इस्तेमाल करने की आदतों की जांच कर सकते हैं।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए बैलेंस चेक करना और रिचार्ज करना भी आसान हो सकता है। कुछ ऐप कम बैलेंस होने पर अलर्ट या नोटिफिकेशन की सुविधा देते हैं। हालांकि, सुविधाएं संबंधित बिजली वितरण कंपनी और मीटर व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

ऐप का नियमित इस्तेमाल करने से उपभोक्ता बिजली खर्च का बेहतर अनुमान लगा सकते हैं। इससे अनावश्यक बिजली खपत कम करने और बजट के अनुसार खर्च नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उपभोक्ता अपने बिजली कनेक्शन के लिए उपलब्ध आधिकारिक ऐप का ही इस्तेमाल करें।

स्मार्ट मीटर का बिल ज्यादा आए तो क्या करें?

स्मार्ट मीटर लगने के बाद यदि बिजली बिल उम्मीद से ज्यादा आता है या ऐप में दिखाई जा रही खपत और बिल की जानकारी में अंतर मिलता है, तो बिना जांच किए इसे मीटर की खराबी मान लेना सही नहीं है। सबसे पहले बिल की अवधि, खपत की जानकारी, भुगतान और मीटर से जुड़े विवरण की जांच करनी चाहिए।

यदि समस्या बनी रहती है, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी यानी DISCOM में शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए कंपनी के कस्टमर केयर, बिलिंग विभाग, स्थानीय बिजली कार्यालय या आधिकारिक ऑनलाइन शिकायत माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिकायत करते समय कंज्यूमर नंबर, बिल की अवधि, संबंधित रीडिंग और समस्या का स्पष्ट विवरण दें। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाला शिकायत नंबर सुरक्षित रखें, ताकि आगे जरूरत पड़ने पर उसका संदर्भ दिया जा सके।

यदि DISCOM से समस्या का समाधान नहीं होता, तो संबंधित उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) में शिकायत की जा सकती है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत वहां से भी समाधान नहीं मिलने या निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर राज्य के इलेक्ट्रिसिटी ओम्बड्समैन से संपर्क किया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया और समय-सीमा राज्य के लागू नियमों पर निर्भर करती है।

स्मार्ट मीटर यूजर्स इन सावधानियों को न करें नजरअंदाज

प्रीपेड स्मार्ट मीटर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को कम बैलेंस से जुड़े अलर्ट और एसएमएस पर ध्यान देना चाहिए। बैलेंस कम होने पर समय रहते रिचार्ज करने से बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बचने में मदद मिल सकती है।

ऑनलाइन रिचार्ज करते समय भुगतान की रसीद और ट्रांजैक्शन आईडी सुरक्षित रखें। यदि खाते से रकम कट जाए, लेकिन मीटर का बैलेंस अपडेट न हो, तो ये विवरण शिकायत दर्ज करने में काम आ सकते हैं।

कुछ मीटर या बिजली वितरण कंपनियों की व्यवस्था में इमरजेंसी क्रेडिट की सुविधा भी हो सकती है। यह सुविधा हर जगह उपलब्ध हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए अपने DISCOM से इसकी उपलब्धता और शर्तों की जानकारी जरूर लें।

यदि बैलेंस सामान्य से तेजी से घट रहा है, तो ऐप में उपलब्ध खपत और भुगतान का रिकॉर्ड जांचें। अंतर समझ में नहीं आने पर संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। साथ ही, किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड करने या किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ ओटीपी और भुगतान संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।

स्मार्ट मीटर लगाने के साथ जागरूकता भी जरूरी

देश में स्मार्ट मीटर का विस्तार बिजली व्यवस्था को अधिक डिजिटल और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसका पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब उपभोक्ता भी इससे जुड़ी सुविधाओं का इस्तेमाल करना सीखेंगे।

बिजली कंपनियों को मीटर लगाने के साथ उपभोक्ताओं को ऐप डाउनलोड करने, रजिस्ट्रेशन करने, बैलेंस देखने और शिकायत दर्ज करने की जानकारी भी देनी चाहिए। ऐप को आसान बनाना और तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान करना भी जरूरी है।

स्मार्ट मीटर ऐप बिजली की खपत समझने, प्रीपेड बैलेंस पर नजर रखने और खर्च को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। उपभोक्ताओं को अपने बिजली कनेक्शन के लिए उपलब्ध आधिकारिक ऐप की जानकारी लेकर उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, बिल या रिचार्ज में गड़बड़ी होने पर रिकॉर्ड सुरक्षित रखते हुए संबंधित बिजली वितरण कंपनी से शिकायत करनी चाहिए।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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