दिवाली में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं होगा पूरी तरह बैन, जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखों के पूर्ण बैन से इनकार किया, जानें नियम
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। इस साल दिवाली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। त्योहार नजदीक आते ही पटाखों के इस्तेमाल और वायु प्रदूषण को लेकर बहस तेज हो गई है। खासकर दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ने को देखते हुए यह सवाल उठ रहा था कि क्या इस बार पटाखों पर पूरी तरह रोक लगेगी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अपना रुख स्पष्ट किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि पूरे दिन और रात बिना किसी सीमा के आतिशबाजी की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय तय करने की जरूरत बताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में बीच का रास्ता निकालना जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक, अगर पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाई जाती है तो लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, पूरे दिन आतिशबाजी की अनुमति देने से बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों के साथ-साथ अन्य जीवों पर भी असर पड़ सकता है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Mumbai में छात्र की मौत से IIT पटना में जांच की मांग…
कोर्ट ने साफ कहा कि न तो पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति होगी। इसके लिए एक निर्धारित समय तय करने की जरूरत है। यानी इस साल दिवाली पर पटाखे चलाने को लेकर नियम समय और पटाखों के प्रकार दोनों स्तर पर लागू हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में ग्रीन पटाखों पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की ओर से एक नोट पेश किया गया। इसमें CSIR-NEERI की सिफारिशों के आधार पर कुछ खास ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स’ को सीमित और शर्तों के साथ अनुमति देने की संभावना बताई गई।
इन पटाखों के लिए शोर, उत्सर्जन और सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना जरूरी होगा। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे पटाखों का निर्माण केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माता कर सकेंगे। साथ ही इनमें प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
पटाखों के लिए शोर की सीमा भी तय
सरकार की ओर से पेश नोट में इन विशेष ग्रीन पटाखों के लिए 125 dB(AI)/145 dB(C) पीक की निर्धारित शोर सीमा का पालन करने की बात कही गई है। इसका मतलब यह है कि केवल ग्रीन क्रैकर के नाम पर किसी भी तरह के पटाखे बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा।
इसे भी पढ़ें: नीतीश की होगी INDIA गठबंधन में वापसी? विपक्ष की बैठक से बढ़ी हलचल, क्या बिहार में बदलेगी सत्ता
पटाखों की बिक्री और निर्माण को लेकर पहले से भी कई नियम लागू हैं। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों में कम उत्सर्जन वाले और ग्रीन पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं तथा प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट 15 अक्टूबर को बेरियम पर करेगा सुनवाई
सुनवाई में बेरियम के इस्तेमाल का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर 15 अक्टूबर को विचार किया जाएगा। यानी अभी यह तय नहीं हुआ है कि बेरियम वाले पटाखों को लेकर अंतिम व्यवस्था क्या होगी।
बेरियम का मुद्दा नया नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी पटाखों में बेरियम समेत कुछ रसायनों के इस्तेमाल पर सख्त रुख अपना चुका है। 2018 के आदेश में बेरियम साल्ट पर रोक लगाई गई थी। बाद की कार्यवाहियों में भी ग्रीन पटाखों की संरचना और उनके उत्सर्जन को लेकर वैज्ञानिक संस्थाओं की रिपोर्ट पर विचार होता रहा है।
क्या इस बार 24 घंटे पटाखे चलेंगे?
सुप्रीम कोर्ट की बुधवार की टिप्पणी से इतना स्पष्ट है कि पूरे दिन और रात पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट निर्धारित समय के भीतर आतिशबाजी की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस सुनवाई के आधार पर अभी यह नहीं कहा जा सकता कि दिवाली के दिन अंतिम समय-सीमा क्या होगी।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
यानी लोगों को यह समझना जरूरी है कि पूर्ण प्रतिबंध नहीं होने का अर्थ अनियंत्रित आतिशबाजी की अनुमति नहीं है। समय, पटाखों की श्रेणी, शोर और उत्सर्जन से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।
पिछले आदेशों में क्या रहे हैं नियम?
पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख पिछले कई वर्षों से प्रदूषण और लोगों की धार्मिक-सामाजिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रहा है। 2018 के आदेश में कम उत्सर्जन वाले और ग्रीन पटाखों को अनुमति दी गई थी, जबकि कुछ पटाखों और प्रतिबंधित रसायनों पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने पटाखे चलाने के लिए निर्धारित समय का भी प्रावधान किया था।

2025 की कार्यवाही में भी दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर ग्रीन पटाखों, प्रदूषण और उनके प्रभाव का मुद्दा सामने आया था। अदालत ने संबंधित एजेंसियों से निगरानी और नियमों के पालन को लेकर कदम उठाने को कहा था।
दिवाली से पहले अब क्या होगा?
30 सितंबर की सुनवाई के बाद सबसे ज्यादा नजर 15 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर रहेगी। उस दिन बेरियम से जुड़े सवाल पर कोर्ट विचार करेगा। इसके अलावा पटाखों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित समय और अनुमत पटाखों की श्रेणी से जुड़े निर्देश भी महत्वपूर्ण होंगे।
सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है कि दिवाली पर पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित इस्तेमाल का रास्ता अपनाया जा रहा है। दूसरी ओर, प्रदूषण को देखते हुए 24 घंटे आतिशबाजी की छूट भी नहीं दी जाएगी। इसलिए इस साल दिवाली पर पटाखे चलाने वालों को अंतिम नियमों और निर्धारित समय का पालन करना होगा।
राज कुमार की रिपोर्ट
