बड़ी पटन देवी मंदिर पहुंची दुनिया की सबसे छोटी गाय महंत बोले-पशु प्रेम के लिए करेंगे प्रेरित

गाय

बड़ी पटन देवी मंदिर पहुंची दुनिया की सबसे छोटी गाय महंत

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना सिटी। बिहार की राजधानी पटना स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर में इन दिनों एक खास नस्ल की गाय श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आंध्र प्रदेश से लाई गई पुंगनूर नस्ल की गाय को देखने के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु कुछ देर रुक रहे हैं। अपनी छोटी कद-काठी और अलग बनावट के कारण यह गाय लोगों का ध्यान खींच रही है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, आंध्र प्रदेश से पुंगनूर नस्ल की तीन गायें मंदिर परिसर में लाई गई हैं। इनमें से एक को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए परिसर में बनाए गए शीशे के विशेष घर में रखा गया है। श्रद्धालु सुरक्षित दूरी से इस छोटी कद-काठी वाली गाय को देख सकते हैं।

शीशे के घर में रखी गई पुंगनूर गाय

बड़ी पटन देवी मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी ने बताया कि मंदिर परिसर में पुंगनूर गायों को लाने का उद्देश्य लोगों में पशु प्रेम और गौसेवा की भावना को बढ़ावा देना है।

महंत के अनुसार, लोग अपने घरों में अलग-अलग तरह के पालतू पशु रखते हैं। इसी तरह लोगों को गौपालन के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पुंगनूर जैसी छोटी नस्ल की गायों को कम जगह में भी रखा जा सकता है, इसलिए शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी इनका पालन अपेक्षाकृत सुविधाजनक हो सकता है।

मंदिर परिसर में गाय को रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। शीशे के घर की वजह से श्रद्धालु उसे देख सकते हैं, जबकि को भी भीड़ से अलग सुरक्षित स्थान मिल रहा है।

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2 से 3 फुट तक बताई जाती है ऊंचाई

पुंगनूर गाय अपनी छोटी कद-काठी के लिए जानी जाती है। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक, मंदिर में लाई गई गाय की ऊंचाई करीब 70 से 80 सेंटीमीटर बताई जा रही है। इस नस्ल की अधिकतम ऊंचाई लगभग दो से तीन फुट के आसपास बताई जाती है।

पुंगनूर नस्ल का संबंध मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर क्षेत्र से माना जाता है। छोटी कद-काठी के कारण यह नस्ल अन्य सामान्य आकार की गायों से अलग दिखाई देती है। यही वजह है कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इसे देखने को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

मंदिर के एक पुजारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि मंदिर प्रबंधन की ओर से पुंगनूर नस्ल की तीन आंध्र प्रदेश से मंगाई गई हैं। उन्होंने इनकी कीमत करीब 15 लाख रुपये प्रति जोड़ा बताई। हालांकि, गाय की वास्तविक कीमत उसकी उम्र, नस्ल की शुद्धता और अन्य गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

रोज 1 से 2 लीटर दूध देने का दावा

महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, मंदिर परिसर में लाई गई पुंगनूर गाय प्रतिदिन करीब एक से दो लीटर दूध देती है। उन्होंने दूध में औषधीय गुण होने का भी दावा किया है।

हालांकि, दूध से जुड़े किसी विशेष औषधीय या स्वास्थ्य संबंधी लाभ के दावे को वैज्ञानिक रूप से स्वीकार करने के लिए पर्याप्त शोध और प्रमाण आवश्यक होते हैं। ऐसे दावों को विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

मंदिर प्रबंधन का कहना है कि पुंगनूर को परिसर में रखने का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण पैदा करना नहीं है। इसके जरिए लोगों को गौसेवा, पशु प्रेम और पशुओं की देखभाल के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।

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श्रद्धालुओं में बढ़ी उत्सुकता

बड़ी पटन देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालु जब इस छोटी कद-काठी वाली को देखते हैं तो कुछ देर रुककर उसे निहारते हैं। कई लोग शीशे के घर के बाहर से गाय को देखते हैं और उसकी अलग बनावट को लेकर चर्चा करते हैं।

मंदिर प्रबंधन का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर पशु सेवा और संरक्षण से जुड़े संदेश को भी लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इसी सोच के तहत पुंगनूर गायों को मंदिर परिसर में लाने की पहल की गई है।

पीएम मोदी के साथ तस्वीरों के बाद बढ़ी थी पुंगनूर की चर्चा

पुंगनूर गायों को लेकर देशभर में लोगों की दिलचस्पी उस समय भी बढ़ी थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पुंगनूर गायों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इसके बाद इस छोटी नस्ल की को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।

अब पटना के बड़ी पटन देवी मंदिर परिसर में पुंगनूर के पहुंचने के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच भी इस नस्ल को देखने की उत्सुकता बढ़ गई है।

पशु प्रेम का संदेश देने की कोशिश

महंत विजय शंकर गिरी के मुताबिक, मंदिर में पुंगनूर को रखने के पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों को पशु प्रेम के लिए प्रेरित करना है। उनका कहना है कि आधुनिक शहरी जीवन में जगह की कमी के बावजूद लोग पशुओं की देखभाल और गौसेवा से जुड़ सकते हैं।

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फिलहाल बड़ी पटन देवी मंदिर में पहुंची पुंगनूर गाय श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का विषय बनी हुई है। मंदिर प्रबंधन की ओर से इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है और लोगों को दूर से देखने की सुविधा दी गई है।

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