चित्रकूट में बाढ़ के बाद राहत कार्य तेज: 18 में से 14 सड़कें चालू, 39 सड़कें-पुलिया भी प्रभावित
चित्रकूट में बाढ़ के बाद राहत कार्य तेज चित्रकूट में बाढ़ के बाद राहत कार्य तेज: 18 में से 14 सड़कें चालू, 39 सड़कें-पुलिया भी प्रभावित
निष्कर्ष भारत संवाददाता चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में बाढ़ की तबाही के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही जिला प्रशासन ने क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलियों और कटाव वाले इलाकों की मरम्मत को प्राथमिकता दे दी है। प्रशासन का मुख्य फोकस चित्रकूट प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द यातायात व्यवस्था बहाल करने और लोगों की आवाजाही को सामान्य बनाने पर है।
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ से हुए चित्रकूट नुकसान की समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, जिला पंचायत और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को मरम्मत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। डीएम ने साफ कहा कि बाढ़ से प्रभावित सड़कों और पुलियों की मरम्मत में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

18 में से 14 सड़कें फिर से शुरू
बाढ़ के कारण चित्रकूट चित्रकूट जिले में कई प्रमुख और ग्रामीण मार्ग प्रभावित हुए थे। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अनुसार, बाढ़ से कुल 18 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं।
इनमें से 14 सड़कों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है और उन्हें आम लोगों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।
प्रशासन ने बाकी चित्रकूट बची चार सड़कों को मंगलवार तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन मार्गों पर तेजी से काम पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित गांवों और कस्बों का संपर्क पूरी तरह बहाल हो सके।
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बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क टूटने से ग्रामीणों को चित्रकूट अस्पताल, बाजार, स्कूल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई थी। ऐसे में सड़कें खुलने के बाद लोगों की दैनिक जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है।
39 सड़कें और पुलिया भी बाढ़ से प्रभावित
चित्रकूट में बाढ़ का असर सिर्फ प्रांतीय खंड की सड़कों तक सीमित नहीं रहा। लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-1 के अंतर्गत कुल 39 सड़कें चित्रकूट और पुलिया प्रभावित हुई हैं।
इन प्रभावित स्थानों में से अब तक 16 जगहों पर मरम्मत कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं बाकी स्थानों पर काम जारी है।
बाढ़ के तेज बहाव के कारण कई जगहों पर सड़क किनारे कटाव और मिट्टी का नुकसान हुआ। इससे कुछ मार्गों की संरचना कमजोर हो गई और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रशासन अब अस्थायी मरम्मत के साथ-साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी काम करने की तैयारी कर रहा है।
10 कटाव में से 8 की मरम्मत पूरी
बाढ़ के दौरान जिले में कई स्थानों पर सड़क किनारे और अन्य इलाकों में कटाव की समस्या सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, कुल 10 स्थानों पर चित्रकूट कटाव दर्ज किया गया था।
इनमें से 8 कटावों की मरम्मत पूरी कर ली गई है। बाकी दो कटावों को अगले तीन दिनों के भीतर ठीक करने का निर्देश दिया गया है।
कटाव वाले इलाकों में तेजी से काम करना प्रशासन के लिए जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि यदि इन स्थानों को समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में बारिश या जलभराव के दौरान दोबारा नुकसान हो सकता है।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरम्मत की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और सिर्फ अस्थायी समाधान तक सीमित न रहा जाए।
खराब सड़कों की स्थायी मरम्मत के लिए बनेगा प्रस्ताव
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बैठक में अधिकारियों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलियों की पक्की और स्थायी मरम्मत के लिए विशेष योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन सड़कों और पुलियों को गंभीर नुकसान हुआ है, उनके लिए स्पेशल रिपेयर के प्रस्ताव तैयार कर जल्द से जल्द मुख्यालय भेजे जाएं।
इसका उद्देश्य केवल तत्काल यातायात बहाल करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नुकसान को कम करने के लिए मजबूत ढांचागत व्यवस्था तैयार करना भी है।
बाढ़ के बाद कई जगहों पर सड़कें ऊपर से सामान्य दिखाई देती हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव से नीचे की मिट्टी और आधार कमजोर हो सकता है। इसलिए प्रशासन स्थायी और तकनीकी रूप से मजबूत मरम्मत की दिशा में भी तैयारी कर रहा है।
जिला पंचायत की दो सड़कें भी हुई थीं खराब
बाढ़ के कारण जिला पंचायत के अंतर्गत आने वाली दो सड़कें भी प्रभावित हुई थीं। इनमें से एक सड़क की मरम्मत पूरी कर ली गई है।
दूसरी सड़क पर मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मार्ग को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द तैयार किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायत स्तर की सड़कें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं मार्गों के जरिए गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों, बाजारों और स्वास्थ्य सेवाओं से बना रहता है।
भरतकूप और शिवरामपुर में जलभराव की समस्या पर फोकस
बैठक के दौरान एनएच-35 से जुड़े भरतकूप और शिवरामपुर क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पर भी चर्चा हुई।
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन इलाकों में जमा पानी को जल्द से जल्द हटाया जाए। इसके लिए नगरपालिका के पास उपलब्ध सुपर शटर मशीन का इस्तेमाल कर जलनिकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है।
जलभराव के कारण सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए पानी निकालने के साथ-साथ खराब हो चुकी सड़कों की मरम्मत को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
एनएच-731 के पहाड़ी क्षेत्र में सड़क की जांच
डीएम ने अधिकारियों को एनएच-731 के पहाड़ी क्षेत्र में खराब और गड्ढों वाली सड़कों की स्थिति की जांच करने के निर्देश भी दिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बाढ़ के बाद सड़कें अधिक प्रभावित हो सकती हैं। मिट्टी खिसकने, पानी के बहाव और कटाव के कारण सड़क की सतह खराब होने का खतरा रहता है।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि सड़क की पूरी स्थिति का निरीक्षण कर जहां जरूरी हो, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए।
डीएम बोले- लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी विभाग की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर सभी काम पूरे करने और लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे स्वप्नील यादव समेत लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ के बाद सामान्य हो रही जिंदगी
चित्रकूट में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब प्रशासन का पूरा ध्यान जनजीवन को सामान्य करने पर है। सड़क संपर्क बहाल होने से राहत सामग्री की पहुंच आसान होगी और प्रभावित लोगों को जरूरी सेवाएं मिलने में सुविधा होगी।
18 में से 14 सड़कें खुलना और 39 प्रभावित सड़क-पुलिया क्षेत्रों में मरम्मत शुरू होना प्रशासन के लिए राहत की बड़ी खबर है। वहीं बाकी सड़कों, कटाव और जलभराव वाले क्षेत्रों में काम पूरा होने के बाद जिले की यातायात व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है।
चित्रकूट प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत केवल जल्दी नहीं, बल्कि गुणवत्ता के साथ की जाए, ताकि भविष्य में लोगों को ऐसी परेशानी का सामना कम करना पड़े।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
