गया में त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध का शुभारंभ, विष्णुपद मंदिर की 16 वेदियों पर पिंडदान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

त्रिपाक्षिक

गया में त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध शुरू

निष्कर्ष भारत संवाददाता- पितृपक्ष मेले की पंचमी तिथि पर गुरुवार से गया में चार दिवसीय त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध का शुभारंभ हो गया। गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। विष्णुपद मंदिर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पिंड अर्पित किए और भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन किए।

विष्णुपद मंदिर में सुबह से शुरू हुआ पिंडदान

त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध के पहले दिन विष्णुपद मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। मंदिर परिसर में मौजूद 16 प्रमुख वेदियों पर श्रद्धालुओं ने पिंडदान किया। पिंडदान के लिए अलग-अलग राज्यों से आए लोगों की आवाजाही दिनभर बनी रही।

श्रद्धालु पुरोहितों के मार्गदर्शन में निर्धारित धार्मिक प्रक्रिया के अनुसार पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। इसके बाद श्रद्धालु विष्णु चरण के दर्शन कर अपने पितरों के मोक्ष की कामना कर रहे हैं।

16 वेदियों का विशेष धार्मिक महत्व

गया में पिंडदान की परंपरा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। विष्णुपद मंदिर परिसर में स्थित विभिन्न वेदियों पर पिंडदान करने की परंपरा है। त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध के दौरान इन वेदियों पर अलग-अलग दिनों में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

पहले दिन विष्णुपद, रुद्र पद और ब्रह्म पद पर पिंडदान का विधान बताया गया है। श्रद्धालु इन वेदियों पर पिंड अर्पित करने के साथ अपने पितरों को श्रद्धांजलि देते हैं।

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इसके बाद अगले चरण में अन्य वेदियों पर भी श्राद्ध कर्म किया जाएगा। दूसरे दिन कार्तिकेय पद, दक्षिणाग्नि पद सहित अन्य वेदियों पर पिंडदान की परंपरा निभाई जाएगी।

पितरों के मोक्ष की कामना से किया जा रहा गया श्राद्ध

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया में पिंडदान को पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण कर्मकांड माना जाता है। इसी आस्था के साथ पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं।

विष्णुपद मंदिर को गया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल किया जाता है। यहां भगवान विष्णु के चरण चिह्न के दर्शन और पिंडदान के लिए श्रद्धालु विशेष रूप से पहुंचते हैं। पितृपक्ष के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती है।

चार दिनों तक चलेगा त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध

त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध का यह विशेष चरण चार दिनों तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलग वेदियों पर निर्धारित परंपरा के अनुसार पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाएगा।

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पहले दिन विष्णुपद, रुद्र पद और ब्रह्म पद पर कर्मकांड किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे और अन्य दिनों में अलग-अलग वेदियों पर पिंडदान का विधान पूरा किया जाएगा।

श्रद्धालु अपने परिवार के पितरों के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ का माहौल बना हुआ है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की व्यवस्था

विष्णुपद मंदिर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने और पिंडदान की प्रक्रिया को सुचारु तरीके से पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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कर्मकांड कराने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भीड़ के दौरान मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखने पर भी प्रशासन का फोकस है।

देशभर से गया पहुंच रहे श्रद्धालु

पितृपक्ष के दौरान गया में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई परिवार अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने के लिए पहले से गया की यात्रा की योजना बनाते हैं।

त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध के दौरान विष्णुपद मंदिर की वेदियों पर होने वाले कर्मकांड को श्रद्धालु धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। अगले चार दिनों तक गया में पिंडदान, पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म का सिलसिला जारी रहेगा।

गया में पितृपक्ष के इस धार्मिक आयोजन के बीच विष्णुपद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। पितरों के प्रति श्रद्धा और मोक्ष की कामना के साथ देशभर से पहुंचे लोग धार्मिक परंपराओं के अनुसार गया श्राद्ध पूरा कर रहे हैं।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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