नीतीश की कौशल विकास योजना बंद, पटना में मचा बवाल, जदयू ऑफिस के सामने विरोध प्रदर्शन

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नीतीश के समर्थन में KYP संचालकों का प्रदर्शन, सरकार से मांग

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। नीतीश कुमार KYP प्रदर्शन मंगलवार को पटना में उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब कौशल युवा प्रोग्राम यानी KYP के संचालकों, कर्मचारियों और छात्रों ने जेडीयू कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वीर चंद पटेल रोड स्थित जेडीयू कार्यालय के बाहर भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के समर्थन में नारे लगाए, जबकि बीजेपी कोटे से मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध बिहार सरकार के उस फैसले को लेकर है, जिसके तहत प्रदेश में संचालित करीब 1700 कौशल युवा प्रोग्राम केंद्रों को बंद करने की बात सामने आई है। संचालकों और छात्रों का कहना है कि इस फैसले से प्रशिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों और शिक्षकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर सड़क पर उतरे लोग

प्रदर्शन में शामिल KYP संचालकों ने कौशल युवा प्रोग्राम को नीतीश कुमार की पहल और ड्रीम प्रोजेक्ट बताया। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से युवाओं को कंप्यूटर और अन्य जरूरी कौशल का प्रशिक्षण देने में भूमिका निभा रहा था।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अचानक केंद्रों को बंद किए जाने से हजारों छात्र प्रशिक्षण से वंचित हो जाएंगे। उनका दावा है कि राज्यभर में KYP से जुड़े करीब 10 हजार से अधिक कर्मचारी और शिक्षक भी इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं।

नीतीश के नाम के लगे नारे, मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन

जेडीयू कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक रंग भी साफ दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने लगातार नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे लगाए। वहीं श्रम संसाधन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जिस योजना को नीतीश कुमार के कार्यकाल में शुरू किया गया और सफलतापूर्वक चलाया गया, उसे अब बंद किया जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर संबंधित मंत्री या सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भारी बारिश में भी डटे रहे KYP छात्र

पटना में मंगलवार को बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी जेडीयू कार्यालय के बाहर मौजूद रहे। छात्र-छात्राओं ने कहा कि KYP सेंटर बंद होने से उनकी पढ़ाई और कौशल प्रशिक्षण प्रभावित होगा।

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कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रोजगार के लिए केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं के पास आवश्यक कौशल होना भी जरूरी है। उनके अनुसार, KYP जैसे प्रशिक्षण केंद्र युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद करते हैं। ऐसे में केंद्रों को बंद करने के बजाय उन्हें बेहतर तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।

KYP सेंटर फिर खोलने की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि बिहार के सभी 1700 KYP सेंटरों में जल्द से जल्द नामांकन शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि केंद्रों पर ताला लगने से नए सत्र में प्रशिक्षण लेने वाले छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

संचालकों ने सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने और KYP केंद्रों को दोबारा शुरू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है।

नीतीश से हस्तक्षेप की अपील

प्रदर्शनकारियों ने जेडीयू कार्यालय पहुंचकर नीतीश कुमार से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उनका कहना था कि KYP की शुरुआत नीतीश कुमार की सरकार के दौरान हुई थी और अब उसी योजना को बंद किए जाने की स्थिति पैदा हो गई है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे नीतीश कुमार को यह बताने आए हैं कि युवाओं के प्रशिक्षण से जुड़ी योजना बंद होने से बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जेडीयू नेतृत्व से सरकार के स्तर पर इस मामले को उठाने की मांग की।

कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट

KYP केंद्रों के संचालकों का कहना है कि केंद्र बंद होने का असर केवल छात्रों पर नहीं पड़ेगा। इससे प्रशिक्षण देने वाले शिक्षक, कर्मचारी और केंद्र संचालक भी प्रभावित होंगे।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, प्रदेशभर में बड़ी संख्या में लोग इन केंद्रों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। उनका दावा है कि केंद्र बंद होने की स्थिति में करीब 10 हजार से अधिक कर्मचारियों और शिक्षकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो सकता है।

छात्राओं ने भी उठाई आवाज

प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया। उनका कहना था कि KYP केंद्रों में उन्हें प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा था और अब केंद्र बंद होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी।

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छात्राओं ने कहा कि वे अपना अधिकार मांगने के लिए बारिश के बीच पटना पहुंची हैं। उन्होंने सरकार से जल्द फैसला बदलने और प्रशिक्षण केंद्रों में फिर से नामांकन शुरू करने की मांग की।

सरकार से जवाब का इंतजार

KYP केंद्रों को लेकर प्रदर्शन के बीच अब सरकार की ओर से आधिकारिक रुख का इंतजार है। प्रदर्शनकारियों ने जहां योजना को जारी रखने और केंद्रों में नामांकन शुरू करने की मांग की है, वहीं सरकार के फैसले से जुड़े कारणों पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

मंत्री अरुण शंकर प्रसाद के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने जो आरोप लगाए और नारे लगाए, उनकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले पर सरकार और संबंधित विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

KYP को लेकर बढ़ सकता है आंदोलन

फिलहाल KYP केंद्रों को लेकर पटना में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। एक तरफ छात्र और संचालक केंद्रों को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रदर्शन में नीतीश कुमार के समर्थन और बीजेपी मंत्री के विरोध ने मामले को राजनीतिक मुद्दा भी बना दिया है।

अब देखना होगा कि सरकार और जेडीयू नेतृत्व प्रदर्शनकारियों की मांग पर क्या कदम उठाते हैं। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है तो KYP संचालकों, कर्मचारियों और छात्रों का आंदोलन आगे और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट