पटना में 10 हजार घूस लेते अफसर गिरफ्तार, EOU ने गुप्त सुचना पर की कार्रवाई

पटना में 10 हजार घूस लेते अफसर गिरफ्तार

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राजधानी पटना में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। नौबतपुर प्रखंड में टीम ने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी विनोद राम को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए कथित तौर पर रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई जन वितरण प्रणाली के एक दुकानदार की शिकायत के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि काम कराने के बदले उससे रिश्वत की मांग की जा रही थी।

निगरानी टीम ने शिकायत मिलने के बाद पहले मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। जैसे ही अधिकारी ने रिश्वत की राशि ली, टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी पदाधिकारी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया।

नौबतपुर में रिश्वत मांगने की शिकायत से खुला मामला

यह पूरा मामला पटना के नौबतपुर प्रखंड की बारा पंचायत से जुड़ा है। यहां जन वितरण प्रणाली के दुकानदार अवधेश कुमार शर्मा ने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी पर काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।

बताया गया कि लगातार परेशानी के बाद डीलर ने मामले की लिखित शिकायत पटना स्थित निगरानी विभाग से की। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले आरोपों की जांच और सत्यापन कराया।

सत्यापन के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने आरोपी अधिकारी को पकड़ने की योजना बनाई। इसके लिए टीम ने पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए ट्रैप की रणनीति तैयार की।

10 हजार रुपये लेते ही निगरानी टीम ने दबोचा

योजना के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जैसे ही प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी विनोद राम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत की राशि ली, टीम ने मौके पर कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई। निगरानी टीम ने कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी पदाधिकारी को अपने साथ ले गई।

इस तरह शिकायत के आधार पर शुरू हुई कार्रवाई कुछ ही समय में गिरफ्तारी तक पहुंच गई। निगरानी विभाग की यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

निगरानी कार्रवाई में शिकायत से गिरफ्तारी तक

भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग आम तौर पर आरोपों की सत्यता की जांच करता है। इस मामले में भी शिकायत के बाद सत्यापन कराया गया। आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही ट्रैप की कार्रवाई की गई।

नौबतपुर के इस मामले में भी शिकायतकर्ता की ओर से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अधिकारी को रिश्वत की रकम लेते समय गिरफ्तार किया गया।

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इस कार्रवाई से यह भी साफ होता है कि रिश्वत की शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग पहले मामले की पड़ताल करता है और उसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है।

EOU नहीं, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने की कार्रवाई

इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने की है। खबर में इसे EOU की कार्रवाई के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए एजेंसी के नाम को लेकर भ्रम से बचना जरूरी है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने शिकायत के सत्यापन के बाद आरोपी पदाधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा। कार्रवाई के बाद टीम आरोपी को पटना ले गई, जहां मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ की जा रही है।

पटना ले जाया गया आरोपी अधिकारी

गिरफ्तारी के तुरंत बाद निगरानी विभाग के डीएसपी के नेतृत्व में टीम आरोपी विनोद राम को अपने साथ पटना ले गई। वहां उनसे मामले को लेकर पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

जांच के दौरान यह भी देखा जा सकता है कि रिश्वत की मांग से जुड़े आरोपों की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं। हालांकि, इस संबंध में फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई

पटना में हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी जैसे पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ शिकायत और उसके बाद ट्रैप की कार्रवाई ने मामले को गंभीर बना दिया है।

जन वितरण प्रणाली से जुड़े काम में डीलरों और लाभुकों को कई स्तरों पर सरकारी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी काम के बदले रिश्वत की मांग की जाती है तो यह व्यवस्था में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला मामला माना जाता है।

फिलहाल आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर है। मामले में पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इससे जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आएगी।

नौबतपुर में 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र की कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है। शिकायत के सत्यापन से लेकर ट्रैप और गिरफ्तारी तक हुई कार्रवाई अब जांच की अगली प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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