डेंगू से लकड़ी कारोबारी की मौत, 8 दिनों में मिले 36 नए केस, पटना में मचा हाहाकार

डेंगू

पटना में डेंगू का बढ़ता प्रकोप, 8 दिन में 36 नए मामले सामने आए

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राजधानी में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटे में जिले में डेंगू के नौ नए मरीज सामने आए हैं। इस महीने अब तक 36 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इसी बीच कंकड़बाग के आरएन सिंह पथ स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 28 वर्षीय लकड़ी कारोबारी मो. खुशियाल की मौत हो गई। वह कमला नेहरू नगर का रहने वाला था।

खुशियाल करीब दो सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित था। इलाज के दौरान उसके प्लेटलेट्स में लगातार गिरावट बताई गई। उसकी मौत के बाद पटना में संक्रमण से होने वाली मौतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही मौत के कारण की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

डेंगू के नए मामलों से बढ़ी चिंता

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष पटना जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या 214 तक पहुंच गई है। अगस्त और सितंबर के दौरान बारिश तथा जगह-जगह जमा पानी के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में संक्रमण के नए मामलों में वृद्धि स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन रही है।

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पिछले 24 घंटे में नौ नए मरीज मिलने के बाद इस महीने संक्रमितों की संख्या 36 हो गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण अस्पतालों में भी संक्रमण के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।

पटना में डेंगू से दूसरी मौत की चर्चा

कंकड़बाग के निजी अस्पताल में 28 वर्षीय मो. खुशियाल की मौत को पटना में संक्रमण से दूसरी मौत बताया जा रहा है। इससे करीब एक सप्ताह पहले कुर्जी निवासी 30 वर्षीय इंद्रदेव की भी मौत हुई थी। दोनों मामलों में संक्रमण की भूमिका बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति साफ होगी।

डेंगू के मामलों में मरीज की हालत बिगड़ने पर प्लेटलेट्स कम होने के साथ रक्तस्राव और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है। यही वजह है कि तेज बुखार या डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय जांच और निगरानी जरूरी मानी जाती है।

डेंगू को लेकर डॉक्टरों ने किया अलर्ट

पटना के वरिष्ठ फिजीशियन ने उन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है। उनके मुताबिक डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप होते हैं। एक सीरोटाइप से संक्रमण के बाद शरीर में उसी प्रकार के वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित होती है, लेकिन दूसरे सीरोटाइप से दोबारा संक्रमण होने पर गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।

चिकित्सकों के अनुसार कुछ मरीजों में दोबारा संक्रमण की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे मामलों में डेंगू हेमोरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी जटिलताओं का खतरा हो सकता है। इसलिए पहले डेंगू से संक्रमित रह चुके लोगों को तेज बुखार होने पर इसे सामान्य वायरल बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पटना में मच्छरों के खिलाफ सतर्कता जरूरी

डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है। घरों के आसपास रखे पुराने बर्तन, टायर, गमले, कूलर और अन्य जगहों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। ऐसे में पानी जमा नहीं होने देना डेंगू की रोकथाम का अहम तरीका है।

स्वास्थ्य विभाग के सामने फिलहाल बढ़ते मामलों पर नियंत्रण रखने की चुनौती है। संक्रमितों की संख्या 214 तक पहुंचने और इस महीने 36 नए केस सामने आने के बाद निगरानी और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मो. खुशियाल की मौत समेत डेंगू से जुड़ी मौतों के कारणों की अंतिम स्थिति स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं, लगातार सामने आ रहे नए मामलों ने पटना में डेंगू को लेकर लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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