पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण में तेज मतदान, दक्षिणी जिलों में सियासी मुकाबला चरम पर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा और अंतिम चरण बुधवार (29 अप्रैल) को शुरू हो गया, जिसमें सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ संभव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा और अंतिम चरण बुधवार (29 अप्रैल) को शुरू हो गया, जिसमें सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, पहले कुछ घंटों में ही करीब 18.39% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो एक स्थिर और सकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है। यह चरण राज्य की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके नतीजे सरकार के गठन की दिशा तय कर सकते हैं।
सुबह के आंकड़े: कहां कितना मतदान
सुबह 9 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पूरब बर्धमान में सबसे अधिक 20.86% मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद हुगली में 20.16% और Nadia में 18.5% मतदान हुआ।
वहीं North 24 Parganas में 17.81%, Kolkata Uttar में 17.28%, South 24 Parganas में 17.25% और Kolkata Dakshin में 16.81% मतदान दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग का असर
इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में 93.19% का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था, जिसने सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस उच्च मतदान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं।

Bharatiya Janata Party (BJP) इसे सत्ता विरोधी लहर का संकेत मान रही है, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) का दावा है कि यह जनता के उनके शासन और योजनाओं पर भरोसे को दर्शाता है।
दक्षिण बंगाल बना चुनावी रणभूमि
दूसरे चरण में कुल 142 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, जो इसे निर्णायक बनाता है। इस चरण में Kolkata, Howrah, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नादिया, हुगली और पूर्व बर्दवान जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं।
ये सभी क्षेत्र दक्षिण बंगाल का हिस्सा हैं, जहां TMC का परंपरागत रूप से मजबूत प्रभाव रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने यहां 142 में से 123 सीटें जीतकर अपनी पकड़ साबित की थी, जबकि BJP को सीमित सफलता मिली थी।
BJP के लिए कड़ी परीक्षा
इस चरण में BJP के लिए चुनौती काफी बड़ी है। अगर पार्टी को राज्य में सरकार बनाने की उम्मीद बनाए रखनी है, तो उसे दक्षिण बंगाल में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि BJP इस क्षेत्र में सेंध नहीं लगा पाती, तो उसके लिए सत्ता तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों ने इस चरण में पूरी ताकत झोंक दी है।
भवानीपुर सीट पर हाई-प्रोफाइल मुकाबला
इस चरण की सबसे चर्चित सीटों में से एक Bhabanipur है, जहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है।

यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि 2021 में नंदीग्राम में दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई थी। इस बार भवानीपुर की सीट पर मुकाबला प्रतीकात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
मतदाताओं की बड़ी संख्या
इस चरण में कुल 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें 1.57 करोड़ महिलाएं और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा इस चुनाव की व्यापकता और समावेशिता को दर्शाता है।

मतदान के लिए राज्यभर में 41,001 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा और पारदर्शिता के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
कड़ी सुरक्षा और निगरानी
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। कुल 2,321 केंद्रीय बलों की कंपनियां सात जिलों में तैनात की गई हैं, जिनमें कोलकाता में सबसे ज्यादा बल मौजूद हैं।
इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक चुनाव प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है।
क्या बदलेगा सियासी समीकरण?
जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि क्या TMC अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख पाएगी या BJP इस बार सियासी समीकरण बदलने में सफल होगी।
दूसरे चरण का मतदान पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की नजरें मतदान प्रतिशत और अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि राज्य में सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का दूसरा चरण न केवल राजनीतिक दलों के लिए बल्कि लोकतंत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। भारी मतदान और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
अब देखना यह होगा कि जनता का रुझान किस ओर जाता है और क्या यह चरण राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव लाता है या नहीं।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
