पूर्णिया पहुंची यूपी एसटीएफ, अंकित बालियान हत्याकांड की जांच तेज
पूर्णिया में यूपी एसटीएफ की टीम ने अंकित हत्याकांड की जांच की
- यूपीएसटीएफ की टीम मामले की जांच के लिए पहुंची पूर्णिया के धमदाहा
- हत्या बाद जिस सोशल अकाउंट से ली गयी हत्या की जिम्मेदारी उसका आइपी एड्रेस निकला पूर्णिया का
निष्कर्ष भारत संवाददाता पूर्णिया। पूर्णिया में अंकित बालियान हत्याकांड की जांच को लेकर उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम पहुंची है। हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की 26 अगस्त को उत्तर प्रदेश के शामली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब इस मामले की जांच का एक सिरा पूर्णिया के धमदाहा थाना क्षेत्र से जुड़ता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद सोशल मीडिया पर वारदात की जिम्मेदारी लेने के लिए जिस अकाउंट का इस्तेमाल किया गया, उससे जुड़े मोबाइल सिम का आईपी एड्रेस पूर्णिया से जारी सिम का पाया गया है।
इसी कड़ी की पड़ताल करने के लिए मंगलवार को यूपी एसटीएफ की टीम धमदाहा थाना पहुंची। टीम ने मामले से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लेकर कई घंटे तक पूछताछ की। जांच अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की है कि पूर्णिया से जारी मोबाइल सिम का इस्तेमाल इस हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने के लिए किसने और किस उद्देश्य से किया।
पूर्णिया से जुड़े सिम ने बढ़ाई जांच की कड़ी
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़ा एक अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद एक सोशल मीडिया अकाउंट से वारदात की जिम्मेदारी ली गई थी।
जांच के दौरान इस अकाउंट से जुड़े आईपी एड्रेस की पड़ताल की गई तो इस्तेमाल किए गए मोबाइल सिम का संबंध पूर्णिया से सामने आया। सिम पूर्णिया के धमदाहा थाना क्षेत्र से जारी होने की जानकारी मिलने के बाद यूपी एसटीएफ ने जांच का दायरा बिहार तक बढ़ाया।
हालांकि, केवल किसी स्थान से सिम जारी होने से यह साबित नहीं होता कि सिम धारक ही हत्या या सोशल मीडिया गतिविधि में शामिल था। यही वजह है कि यूपी एसटीएफ अब सिम के वास्तविक उपयोगकर्ता और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है।
पूर्णिया के धमदाहा पहुंची यूपी एसटीएफ की टीम
मंगलवार को यूपी एसटीएफ की टीम धमदाहा थाना पहुंची। बताया गया कि टीम ने यहां कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कई घंटे तक चली पूछताछ के दौरान मोबाइल सिम के इस्तेमाल और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की गई।

जांच का मुख्य बिंदु यह है कि पूर्णिया से जारी मोबाइल सिम आखिर किसके पास था और उसका इस्तेमाल किस व्यक्ति ने किया। इसके साथ ही जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सिम का उपयोग करने वाले व्यक्ति का शामली हत्याकांड से जुड़े संदिग्धों या अन्य लोगों से कोई संपर्क था या नहीं। यूपी एसटीएफ तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर इस कड़ी को जोड़ने में जुटी है।
जिम से निकलते ही अंकित पर हुई थी फायरिंग
अंकित बालियान की हत्या 26 अगस्त को शामली जिले के नला पटरी क्षेत्र में की गई थी। बताया गया कि अंकित जिम से बाहर निकल रहे थे, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
गोलीबारी में अंकित गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने हत्याकांड की जांच शुरू की। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर एक अकाउंट से हत्या की जिम्मेदारी लिए जाने की बात सामने आई, जिसे गोगी गैंग से जुड़ा बताया गया। इसके बाद पुलिस और यूपी एसटीएफ ने हत्याकांड में शामिल संदिग्धों की तलाश तेज कर दी।
एनकाउंटर में दो मुख्य शूटर मारे गए
हत्याकांड की जांच के दौरान यूपी एसटीएफ ने 31 अगस्त 2026 को कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर में दो कथित मुख्य शूटरों को मार गिराने की जानकारी दी। उनकी पहचान सुमित और मोहित के रूप में हुई।
दोनों के बारे में पुलिस जांच में क्या-क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ सामने आ सकती है। इसी बीच सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी लेने वाले अकाउंट और उससे जुड़े तकनीकी विवरण ने जांच की दिशा को पूर्णिया तक पहुंचा दिया।
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अब यूपी एसटीएफ यह समझने की कोशिश कर रही है कि हत्या के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने के लिए इस्तेमाल किए गए सिम की भूमिका क्या थी।
सिम धारक और इस्तेमाल करने वाले की हो रही पड़ताल
जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पूर्णिया से जारी सिम का वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा था। अक्सर मोबाइल सिम किसी व्यक्ति के नाम पर जारी होने के बावजूद उसका इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति कर सकता है। ऐसे में जांच एजेंसी के लिए सिर्फ सिम के दस्तावेज पर्याप्त नहीं होंगे।
यूपी एसटीएफ सिम के उपयोग, उससे जुड़े मोबाइल उपकरण, संपर्क और सोशल मीडिया गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि संबंधित सिम का इस्तेमाल कब और कहां किया गया तथा सोशल मीडिया अकाउंट तक उसकी पहुंच किस तरह बनी।
पूर्णिया पुलिस ने जानकारी से किया इनकार
मामले को लेकर पूर्णिया के एसएसपी डॉ. शौर्य सुमन से पूछे जाने पर उन्होंने इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया। ऐसे में यूपी एसटीएफ की स्थानीय स्तर पर की जा रही कार्रवाई को लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
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फिलहाल जांच एजेंसी की कार्रवाई का केंद्र सिम और उसके इस्तेमाल की कड़ी है। पूछताछ के बाद सामने आने वाली जानकारी से यह स्पष्ट हो सकता है कि पूर्णिया से जारी सिम का इस हत्याकांड से वास्तव में क्या संबंध है।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में अब शामली से पूर्णिया तक की कड़ी जुड़ने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, जांच एजेंसी के सामने अभी यह साबित करना बाकी है कि पूर्णिया से जारी सिम का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति हत्याकांड या उससे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधि में किस भूमिका में था।
फिलहाल यूपी एसटीएफ तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के जरिए इस कड़ी की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूर्णिया का मोबाइल सिम इस हत्याकांड की जांच में महज तकनीकी सुराग है या इसके पीछे कोई महत्वपूर्ण कड़ी छिपी हुई है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
