बांकीपुर उपचुनाव 2026: बीजेपी ने अभिषेक कुमार बंटी पर लगाया दांव, मैदान में प्रशांत किशोर और RJD की रेखा गुप्ता, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय

बांकीपुर विधानसभा

बिहार की राजनीति का केंद्र बन चुकी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस सीट से भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे दी है।

पटना: बिहार की राजनीति का केंद्र बन चुकी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस सीट से भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे दी है। दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर रेखा कुमारी गुप्ता पर भरोसा जताया है। हालांकि, RJD के इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और कांग्रेस भी इस निर्णय से नाराज बताई जा रही है।

यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा और विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्यों हो रहा है बांकीपुर में उपचुनाव?

बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी।

राजधानी पटना के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस निर्वाचन क्षेत्र पर सभी प्रमुख दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

बीजेपी ने युवा चेहरे अभिषेक कुमार बंटी पर जताया भरोसा

बीजेपी ने इस उपचुनाव में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाते हुए अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाया है। अभिषेक वर्तमान में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और इससे पहले पटना महानगर युवा मोर्चा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और लंबे समय से नितिन नवीन के साथ काम करने के कारण उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। राजनीतिक कार्यक्रमों के संचालन से लेकर संगठन विस्तार तक उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। पार्टी को उम्मीद है कि युवा चेहरा होने के साथ-साथ संगठनात्मक अनुभव उन्हें चुनाव में बढ़त दिलाने में मदद करेगा।

बांकीपुर सीट पर कायस्थ मतदाताओं की अच्छी संख्या होने के कारण अभिषेक कुमार बंटी की सामाजिक पृष्ठभूमि को भी बीजेपी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला हुआ रोचक

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस उपचुनाव को अपनी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार वह 11 जुलाई को नामांकन दाखिल करेंगे।

प्रशांत किशोर

पिछले कुछ वर्षों से पूरे बिहार में जन संवाद यात्रा और संगठन विस्तार में जुटे प्रशांत किशोर अब पहली बार विधानसभा चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में यह चुनाव उनके लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर बांकीपुर में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हैं तो इससे जन सुराज को आगामी विधानसभा चुनावों में नई राजनीतिक ऊर्जा मिल सकती है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने किया प्रशांत किशोर का समर्थन

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पटना साहिब से दो बार सांसद रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने खुलकर प्रशांत किशोर का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने को बिहार की राजनीति में “जबरदस्त हलचल” बताया।

उन्होंने लिखा कि प्रशांत किशोर एक दूरदर्शी और लोकप्रिय व्यक्तित्व हैं, जिनकी चुनावी एंट्री ने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने लोगों, विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे जाति, धर्म और पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर मतदान करें। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में “सबकी एकता” सबसे बड़ी आवश्यकता है।

शत्रुघ्न सिन्हा स्वयं भी कायस्थ समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनके समर्थन को बांकीपुर के सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RJD ने फिर रेखा कुमारी गुप्ता पर जताया भरोसा

राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट से एक बार फिर रेखा कुमारी गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। रेखा गुप्ता वैश्य समाज से आती हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में भी RJD के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं।

हालांकि उस चुनाव में उन्हें बीजेपी के उम्मीदवार नितिन नवीन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने इस बार भी उन्हीं पर भरोसा जताया है।

RJD का मानना है कि पिछले चुनाव के अनुभव और संगठन से जुड़ाव का लाभ उन्हें इस बार मिल सकता है।

उम्मीदवार घोषित होते ही RJD में बढ़ी नाराजगी

रेखा गुप्ता की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद RJD के भीतर असंतोष भी सामने आने लगा है। पटना पहुंचे वरिष्ठ RJD नेता सुरेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह रेखा गुप्ता को जानते तक नहीं हैं।

उनके इस बयान ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान की चर्चा को और तेज कर दिया है। राजनीतिक हलकों में इसे टिकट वितरण को लेकर आंतरिक असहमति का संकेत माना जा रहा है।

हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस भी फैसले से खुश नहीं

महागठबंधन के भीतर भी बांकीपुर सीट को लेकर मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस का दावा है कि बांकीपुर उसकी पारंपरिक सीट रही है और इस बार भी उसे चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए था।

कांग्रेस नेताओं ने विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार उतारने की वकालत की है, लेकिन RJD अपने फैसले पर कायम दिखाई दे रही है। ऐसे में महागठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों के बीच मतभेद जारी रहते हैं तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है।

जातीय समीकरण भी रहेंगे अहम

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। इस क्षेत्र में कायस्थ, वैश्य, ब्राह्मण, मुस्लिम और अन्य शहरी मतदाताओं की अच्छी संख्या है।

बीजेपी ने कायस्थ समुदाय से आने वाले अभिषेक कुमार बंटी को मैदान में उतारा है, जबकि RJD ने वैश्य समाज की रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। वहीं प्रशांत किशोर स्वयं को विकास, सुशासन और वैकल्पिक राजनीति के चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं।

ऐसे में यह चुनाव केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी विकास, नेतृत्व और राजनीतिक विश्वसनीयता जैसे मुद्दे भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सभी दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

बांकीपुर उपचुनाव बीजेपी, जन सुराज और RJD तीनों के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन चुका है। बीजेपी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है, वहीं प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर RJD इस सीट पर वापसी कर महागठबंधन की मजबूती का संदेश देना चाहेगी।

अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और चुनाव प्रचार पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में नेताओं की सभाएं, रोड शो और राजनीतिक बयानबाजी इस चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना सकती हैं। 30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि राजधानी पटना की इस महत्वपूर्ण सीट पर जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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