सितंबर में सामान्य से 27% ज्यादा बारिश, फिर भी मानसून सीजन में 26% की कमी; कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बारिश

बिहार में सितंबर की बारिश सामान्य से 27% ज्यादा, लेकिन मानसून सीजन में 26% की कमी; गंगा-गंडक समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर।

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना: बिहार में सितंबर महीने में बारिश ने रफ्तार पकड़ी है। राज्य में 1 से 11 सितंबर के बीच सामान्य से 27 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, पूरे मानसून सीजन की बात करें तो बिहार अभी भी बारिश की कमी से जूझ रहा है। 1 जून से 11 सितंबर तक राज्य में कुल 625.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश से करीब 26 प्रतिशत कम है।

सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है। बारिश और ऊपरी इलाकों से लगातार पानी आने के कारण गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है।

सितंबर में सामान्य से 27% ज्यादा बारिश

मौसम और जल संसाधन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 1 से 11 सितंबर तक 104.1 मिमी बारिश हुई। इस अवधि में सामान्य बारिश की तुलना में यह आंकड़ा 27 प्रतिशत अधिक है।

बारिश में इस बढ़ोतरी के बावजूद पूरे मानसून सीजन में राज्य की स्थिति सामान्य से नीचे बनी हुई है। 1 जून से 11 सितंबर तक बिहार में 625.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश इससे अधिक होनी चाहिए थी।

इस तरह सितंबर की बारिश ने मानसून की कमी को कुछ हद तक कम जरूर किया है, लेकिन राज्य अभी भी कुल वर्षा के मामले में सामान्य से पीछे है।

सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर HFL से ऊपर

बिहार में बारिश के साथ-साथ नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर की सुबह भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया।

यह स्तर 17 अगस्त 2021 को दर्ज 36.75 मीटर के उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से 0.05 मीटर अधिक है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सुल्तानगंज में गंगा के जलस्तर में अब घटने की प्रवृत्ति बताई गई है।

इसके बावजूद नदी के आसपास रहने वाले लोगों और निचले इलाकों में बसे गांवों के लिए स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

गंडक और कोसी का जलस्राव भी ऊंचा

बिहार की प्रमुख नदियों में गंडक और कोसी का जलस्राव भी लगातार निगरानी में है। 12 सितंबर की सुबह 10 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक का जलस्राव 75,500 क्यूसेक दर्ज किया गया।

इसी समय वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्राव 1,43,665 क्यूसेक रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों नदियों का जलस्राव फिलहाल स्थिर है।

वहीं, इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 70,021 क्यूसेक दर्ज किया गया। सोन नदी के जलस्राव में कमी की प्रवृत्ति बताई गई है।

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण बिहार की कई नदियों में जलस्तर अभी भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

नदियों के बढ़े जलस्तर का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी पर पड़ता है। जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भरने, सड़कों के डूबने और गांवों में आवागमन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।

प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है।

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15 जिलों में 47.92 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित

बिहार में बाढ़ की स्थिति का असर बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 15 जिलों के 87 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 47.92 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 1,245 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 73.30 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है।

इससे प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने में मदद मिल रही है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार राहत सामग्री और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

13 राहत शिविरों में 12,260 लोगों के रहने की व्यवस्था

बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राज्य में राहत शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार 13 राहत शिविरों में 12,260 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवासन की व्यवस्था की गई है।

इन राहत शिविरों में लोगों को भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों को अपने घरों से सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, उन्हें राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं मिल सकें।

SDRF और NDRF की टीमें तैनात

संभावित बाढ़ और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य में राहत-बचाव दलों की तैनाती भी की गई है। विभिन्न जिलों में SDRF की 27 टीमें और NDRF की 10 टीमें तैनात हैं।

इन टीमों को जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आपात स्थिति में सहायता देने के लिए तैयार रखा गया है।

प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और बांधों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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सितंबर की बारिश ने बढ़ाई बाढ़ की चुनौती

बिहार में सितंबर के शुरुआती दिनों में सामान्य से अधिक बारिश ने जहां मानसून की कमी को कुछ कम किया है, वहीं नदियों के ऊंचे जलस्तर ने बाढ़ की चुनौती को भी बनाए रखा है।

एक तरफ राज्य में पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से 26 प्रतिशत कम है, तो दूसरी तरफ प्रमुख नदियों में पानी का स्तर कई जगह खतरे के निशान से ऊपर है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश और नदी के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी रहेगी।

फिलहाल बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, जबकि SDRF और NDRF की टीमें संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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