बिहार कांग्रेस के 32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस, पूर्व विधायकों व जिलाध्यक्षों के नाम शामिल

बिहार कांग्रेस ने 32 नेताओं को नोटिस

बिहार कांग्रेस में 32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान अब अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गई है। पार्टी ने 32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। प्रदेश अनुशासन समिति की ओर से भेजे गए नोटिस में संबंधित नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। नेताओं को अपना पक्ष स्पष्ट करने और लगाए गए आरोपों पर जवाब देने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद बिहार कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है।

पार्टी की इस कार्रवाई को संगठन के भीतर बढ़ रहे असंतोष पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नोटिस पाने वाले नेताओं में पूर्व विधायक, पूर्व जिलाध्यक्ष और संगठन से जुड़े कई अन्य नेता शामिल हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 32 नेता पार्टी के नोटिस का क्या जवाब देते हैं और उनके जवाब के बाद कांग्रेस नेतृत्व आगे क्या कदम उठाता है।

32 नेताओं से मांगा गया जवाब

प्रदेश अनुशासन समिति की ओर से जारी नोटिस में नेताओं से पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। पार्टी ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष क्या है। हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि सभी 32 नेताओं के खिलाफ एक जैसे आरोप हैं या अलग-अलग गतिविधियों को आधार बनाकर नोटिस भेजा गया है।

नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस के भीतर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। खासकर उन नेताओं के नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जो पहले पार्टी में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

पूर्व विधायकों और जिलाध्यक्षों के नाम शामिल

कारण बताओ नोटिस पाने वालों में पूर्व विधायक अनिल सिंह और पूर्व विधायक पूनम देवी का नाम शामिल है। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण के पूर्व जिलाध्यक्ष भारत भूषण दुबे को भी नोटिस भेजा गया है।

औरंगाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय सिंह, मधेपुरा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र यादव और सिवान के पूर्व जिलाध्यक्ष विधु शेखर पाण्डेय समेत कुल 32 नेताओं से जवाब मांगा गया है। इससे साफ है कि पार्टी की कार्रवाई केवल मौजूदा पदाधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन से जुड़े रहे वरिष्ठ नेताओं को भी इसके दायरे में रखा गया है।

बिहार कांग्रेस में पहले से चल रही थी खींचतान

बिहार कांग्रेस में पिछले कुछ समय से संगठन और नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। पार्टी के कुछ नेता संगठन के कामकाज और नेतृत्व के तरीके को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर चुके हैं। इसी बीच दिल्ली में हुए प्रदर्शन ने इस असंतोष को और चर्चा में ला दिया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नाराज नेताओं ने आठ सितंबर को दिल्ली पहुंचकर आलाकमान के सामने प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन को बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बड़े संकेत के रूप में देखा गया। नेताओं की नाराजगी संगठन और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों को लेकर बताई गई थी।

दिल्ली प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने बढ़ाई सख्ती

दिल्ली में प्रदर्शन के बाद पार्टी नेतृत्व ने नेताओं की गतिविधियों और सार्वजनिक बयानों को गंभीरता से लिया। सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेताओं के बयान और गतिविधियां भी पार्टी नेतृत्व की नजर में आईं। इसके बाद प्रदेश अनुशासन समिति ने संबंधित नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगने का फैसला किया।

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कांग्रेस की ओर से की गई यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब बिहार में पार्टी संगठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में 32 नेताओं को एक साथ नोटिस जारी किए जाने को पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब जवाब पर टिकी कांग्रेस की अगली कार्रवाई

कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब गेंद संबंधित नेताओं के पाले में है। नेताओं को पार्टी के सामने अपना पक्ष रखना होगा। उनके जवाब से यह तय होगा कि मामला यहीं खत्म होता है या कांग्रेस नेतृत्व आगे भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है।

अगर नेता अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हैं या कोई स्पष्टीकरण देते हैं, तो प्रदेश अनुशासन समिति उस पर विचार कर सकती है। वहीं, जवाब से पार्टी संतुष्ट नहीं हुई तो आगे की कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

संगठन के भीतर असंतोष पर कितना लगेगा ब्रेक?

बिहार कांग्रेस के लिए यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी को राज्य में संगठन को मजबूत करने की चुनौती के बीच अंदरूनी मतभेदों का सामना करना पड़ रहा है। सार्वजनिक रूप से सामने आने वाला असंतोष पार्टी की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।

32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करके कांग्रेस ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि पार्टी संगठन के खिलाफ जाने वाली गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपना रही है। अब देखना होगा कि नोटिस के जवाब के बाद यह विवाद शांत होता है या नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच खींचतान और बढ़ती है।

फिलहाल कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नोटिस पाने वाले नेता क्या जवाब देते हैं और पार्टी उस जवाब को किस तरह लेती है। आने वाले दिनों में उनके स्पष्टीकरण और प्रदेश नेतृत्व के अगले कदम से बिहार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति की तस्वीर और साफ हो सकती है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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