बिहार में नशा मुक्त समाज से ही बनेगा विकसित भारत: पटना में कार्यक्रम में बोले CM सम्राट चौधरी, युवाओं से की जनजागरण की अपील
पटना में नशा मुक्त युवा अभियान: CM सम्राट चौधरी बोले- विकसित भारत के लिए नशा मुक्त समाज जरूरी
पटना के लोक भवन में रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाना, युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प मजबूत करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली और कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का भी सीधा प्रसारण किया गया।
विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा जरूरी: सम्राट चौधरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार का सपना तभी साकार होगा, जब देश और राज्य का युवा नशे से पूरी तरह दूर रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के कंधों पर बिहार के गौरवशाली इतिहास को फिर से स्थापित करने की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बिहार ने देश को ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की अमूल्य विरासत दी है। अब समय आ गया है कि युवा उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नशे के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाएं। मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपने परिवार, गांव और मोहल्ले में नशा मुक्ति अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।
शराबबंदी को बताया ऐतिहासिक फैसला
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016 में लागू हुई पूर्ण शराबबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज और विशेषकर महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी सरकार ने राजस्व से अधिक समाज के हित को प्राथमिकता दी।
सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी का सबसे बड़ा सकारात्मक असर महिलाओं के जीवन पर पड़ा है। घरेलू हिंसा और महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामलों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि लगभग दस वर्षों बाद शराबबंदी अब बिहार की सामाजिक समृद्धि और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बनती जा रही है।
राजस्व से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि कई राज्यों को शराब की बिक्री से हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों की आय का बड़ा हिस्सा शराब से आता है, लेकिन बिहार ने आर्थिक लाभ के बजाय सामाजिक सुधार को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि समाज को स्वस्थ और सुरक्षित बनाना किसी भी आर्थिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ बिहार ने पूर्ण शराबबंदी लागू की और उसे लगातार प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
देवघर, बनारस और कुशीनगर जाने का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आजकल बिहार के लोग बड़ी संख्या में देवघर, बनारस और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में शराबबंदी लागू नहीं है, जबकि बिहार में पूर्ण शराबबंदी है।
उन्होंने कहा कि लोग पूजा-पाठ और अन्य कारणों से इन स्थानों पर जाते हैं, लेकिन बिहार लौटने के बाद सार्वजनिक जीवन में शराबबंदी का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। उनका कहना था कि राज्य में सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन लगभग समाप्त हो चुका है।
स्वीकार किया- चोरी-छिपे शराब पीने की घटनाएं हो सकती हैं
मुख्यमंत्री ने यह भी माना कि कुछ लोग चोरी-छिपे शराब का सेवन कर लेते होंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे शराबबंदी के व्यापक प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि बिहार के किसी भी जिले या शहर के सार्वजनिक स्थानों पर नजर डाली जाए तो शराबबंदी का असर साफ दिखाई देता है। उनका कहना था कि कानून का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है और इसमें सरकार को काफी हद तक सफलता मिली है।
नेपाल और GST का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार की दो बड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहली चुनौती नेपाल से आने वाली नदियों का पानी रहा है, जिससे हर वर्ष बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस दिशा में बेहतर प्रबंधन किया गया है।
दूसरी चुनौती बिहार की बड़ी आबादी रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद उपभोग आधारित कर व्यवस्था से बिहार को आर्थिक रूप से लाभ मिलने लगा है। इससे राज्य के राजस्व में सुधार हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।
युवाओं से जनजागरण अभियान चलाने की अपील
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केवल कानून बना देने से समाज पूरी तरह नहीं बदलता। इसके लिए जनता की भागीदारी सबसे अधिक जरूरी होती है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें और नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन का रूप दें।
उन्होंने कहा कि यदि युवा आगे आएंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी नशे से दूर रहेंगी और समाज स्वस्थ एवं सुरक्षित बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्त समाज ही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का हुआ सीधा प्रसारण
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का भी लाइव प्रसारण किया गया, जिसे उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और अधिकारियों ने देखा। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
नशा मुक्ति को जन आंदोलन बनाने पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। सरकार का मानना है कि यदि शिक्षा, जागरूकता और जनसहभागिता के माध्यम से नशा मुक्ति अभियान को आगे बढ़ाया जाए तो बिहार सामाजिक विकास के साथ-साथ विकसित भारत के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
