भागलपुर में भड़के बाढ़ पीड़ित, बोले- सीएम आए और हमें मिलने भी नहीं दिया; राघोपुर जमींदारी टीला पर जमकर हंगामा
भागलपुर में बाढ़ पीड़ित का फूटा गुस्सा! सीएम से मिलने नहीं दिया गया तो कटाव स्थल पर मचा बवाल
निष्कर्ष भारत संवाददाता बिहार के भागलपुर में गंगा और कोसी नदी के कटाव से तबाही झेल रहे लोगों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। खरीक प्रखंड के राघोपुर जमींदारी टीला स्थित कटाव स्थल बाढ़ पीड़ित का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने की कोशिश कर रहे बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षा घेरे के कारण रोक दिया गया। इसके बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जमकर नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना था कि जब मुख्यमंत्री को पीड़ितों की बात ही नहीं सुननी थी, तो फिर उन्हें यहां लाने का क्या मतलब था।
कटाव की विभीषिका के बीच सीएम के दौरे से जगी उम्मीद
राघोपुर जमींदारी टीला इलाके में गंगा और कोसी नदी के कटाव ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जमींदारी तटबंध के कई हिस्सों पर खतरा मंडरा रहा है और नदी की तेज धारा लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने की बात कही जा रही है। ऐसे में जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कटाव स्थल का निरीक्षण करने पहुंचने की सूचना मिली, तो आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में बाढ़ और कटाव पीड़ित वहां पहुंच गए।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर अपनी समस्याएं बता सकेंगे। कई लोग अपने घरों के कटने, जमीन नदी में समाने और परिवार के विस्थापन बाढ़ पीड़ित की पीड़ा लेकर पहुंचे थे। लोगों का कहना था कि वे सरकार के मुखिया तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते थे और कटाव से बचाव के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग करना चाहते थे।
हालांकि, मुख्यमंत्री के पहुंचते ही इलाके में बाढ़ पीड़ित की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई। प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने ग्रामीणों को मुख्यमंत्री के करीब जाने की अनुमति नहीं दी। यही बात धीरे-धीरे लोगों के गुस्से की बड़ी वजह बन गई।
जहाज तक पहुंचने की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों ने रोका
निरीक्षण के दौरान उस समय स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ कटाव की पीड़ित ग्रामीण नदी किनारे खड़े जहाज या स्टीमर की ओर बढ़ने लगे।बाढ़ पीड़ित लोगों ने मुख्यमंत्री तक पहुंचकर अपनी बात रखने की कोशिश की। कुछ ग्रामीण जहाज पर चढ़ने का प्रयास करते हुए अपनी समस्याओं को सुनाने की गुहार लगाते रहे।
लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें काफी दूर ही रोक दिया। मुख्यमंत्री के आसपास बने सुरक्षा घेरे को देखते हुए किसी भी आम ग्रामीण को पास जाने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों का कहना था कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और घर बचाने की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने तक नहीं दिया गया।
समर्थकों की नारेबाजी से और गरमाया माहौल
एक तरफ कटाव पीड़ित अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और सुरक्षा घेरे के आसपास मौजूद कुछ समर्थकों द्वारा मुख्यमंत्री के समर्थन में नारेबाजी किए जाने से माहौल और गरमा गया।
चीखते-पुकारते और अपनी परेशानी बयान करते ग्रामीणों के बीच नारेबाजी शुरू होने पर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की। आक्रोशित ग्रामीण सवाल उठाने लगे कि जब गांव और घर नदी में समाने की कगार पर हैं, तब नारेबाजी का क्या औचित्य है।

लोगों का कहना था कि उनके सामने सबसे बड़ा संकट अपने परिवार और आशियाने को बचाने का है। ऐसे समय में उन्हें राहत, पुनर्वास और कटाव रोकने के ठोस इंतजाम की जरूरत है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: Samrat…Tejashwi …की मिलीभगत…बिहार में बड़ा खेल!
“जब मिलना ही नहीं था, तो यहां क्यों आए?”
मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने के।बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए। कई लोगों ने कहा कि यदि कटाव पीड़ितों की समस्याएं सुननी ही नहीं थीं, तो मुख्यमंत्री को निरीक्षण के लिए यहां क्यों लाया गया।
ग्रामीणों का कहना था, “जब त्राहिमाम कर रही जनता का दर्द ही नहीं सुनना था, तो मुख्यमंत्री को यहां काहे लेके आए हैं? क्या सिर्फ खानापूर्ति के लिए दौरा कराया जा रहा है?”
कटाव पीड़ितों का आरोप है कि राघोपुर जमींदारी तटबंध के आसपास हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। नदी की आक्रामक धारा के कारण कई बाढ़ पीड़ित परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। कुछ लोगों के आशियाने पहले ही नदी में समा चुके हैं, जबकि कई परिवार अपने घरों को तोड़कर सामान और टीन-शेड लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
घर बचाने की जद्दोजहद में जुटे दर्जनों परिवार
स्थानीय लोगों के अनुसार, कटाव की रफ्तार ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। जिन परिवारों के घर नदी किनारे हैं, वे हर समय इस डर में जी रहे हैं कि अगला नंबर उनके घर का हो सकता है।
कई परिवार अपना सामान समेटकर तटबंध और बाढ़ पीड़ित अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों की ओर जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाया गया उनका घर और जमीन उनकी आंखों के सामने नदी में समा रही है।
कटाव बाढ़ पीड़ित पीड़ितों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर नदी की धारा को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया और तटबंध को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में और अधिक बस्तियां प्रभावित हो सकती हैं।
फाइलों से नहीं, पीड़ितों की जुबानी समझें हालात
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ पीड़ित कटाव की वास्तविक स्थिति सरकारी फाइलों और अधिकारियों की रिपोर्टों से पूरी तरह समझना मुश्किल है। उनका मानना है कि जमीन पर रहने वाले लोगों की समस्याएं सुनकर ही हालात की असली गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बाढ़ पीड़ित ने सवाल उठाया कि अधिकारी वातानुकूलित गाड़ियों और रिपोर्टों के आधार पर स्थिति का आकलन करते हैं, जबकि कटाव का दर्द उन परिवारों से बेहतर कोई नहीं जान सकता, जिनकी जमीन और छत नदी में समा रही है।
मुख्यमंत्री के दौरे से लोगों को उम्मीद थी कि उनकी समस्या सीधे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचेगी। लेकिन मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाने के कारण ग्रामीणों में निराशा और नाराजगी दोनों दिखाई दी।
भागलपुर में बाढ़ और कटाव ने बढ़ाई चिंता
भागलपुर जिले के कई इलाकों में गंगा और कोसी नदी का जलस्तर तथा कटाव लंबे समय से लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। नदी किनारे बसे गांवों में हर साल बाढ़ और कटाव से हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है।
राघोपुर जमींदारी टीला में रविवार को मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान सामने आया ग्रामीणों का आक्रोश इस बात की तस्वीर पेश करता है कि प्रभावित परिवार सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री के दौरे के बाद कटाव रोकने, तटबंध की सुरक्षा और विस्थापित परिवारों के राहत एवं पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Nishkarsh bharat
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
