मनन मिश्रा नहीं ले सकेंगे बड़े फैसले, BCI पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लगाई बड़ी पाबंदी

मनन मिश्रा

मनन मिश्रा की BCI में भूमिका सीमित, बड़े फैसलों पर SC की सख्ती

निष्कर्ष भारत, संवाददाता नई दिल्ली।  मनन मिश्रा की अध्यक्षता वाली बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मनन कुमार मिश्रा फिलहाल स्थायी रूप से निर्वाचित अध्यक्ष के तौर पर नहीं, बल्कि प्रो-टेम यानी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। नई BCI के गठन तक मनन मिश्रा को रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालने की अनुमति रहेगी, लेकिन बड़े नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सक्रिय रूप से शामिल करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की, जिनमें मनन मिश्रा के लंबे समय से BCI अध्यक्ष पद पर बने रहने को चुनौती दी गई है। अदालत ने फिलहाल BCI के पुनर्गठन और नई चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

मनन मिश्रा की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मनन मिश्रा का मौजूदा पद पर बने रहना ऐसा नहीं माना जा सकता कि उन्हें 2030 तक अध्यक्ष बने रहने का अधिकार मिल गया है। अदालत के मुताबिक उनकी वर्तमान स्थिति नई BCI के गठन और चुनाव तक की अंतरिम व्यवस्था है।

देखिये ख़बर हमारे यूट्यूब चैनल पर भी: Sanjay Singh पर इल्ज़ाम लगाने वाले अपने गिरेबान में झाँक ले,मंत्री ने कर दिया मानहानि का मुकदमा…

इसका मतलब यह है कि BCI के नियमित और रोजमर्रा के कामकाज को जारी रखा जा सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को लेकर अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था रहेगी। अदालत ने कहा कि ऐसे फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए।

BCI के बड़े फैसलों में AG और SG की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को BCI के महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों से जोड़ने का निर्देश दिया है। दोनों BCI में पदेन सदस्य हैं। अदालत के अनुसार उन्हें BCI के हर रोज के प्रशासनिक काम में शामिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन जब परिषद कोई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला ले तो दोनों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। BCI की ओर से भी इस व्यवस्था को लेकर सहमति जताई गई है। इस निर्देश का उद्देश्य अंतरिम व्यवस्था के दौरान BCI के महत्वपूर्ण फैसलों में संस्थागत संतुलन बनाए रखना है।

मनन मिश्रा के कार्यकाल को लेकर क्या है विवाद?

मामले की जड़ BCI अध्यक्ष के तौर पर मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल को लेकर उठे सवाल हैं। याचिकाओं में उनके कार्यकाल और अप्रैल 2025 में जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसमें उनके कार्यकाल को 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक बताया गया था।

इसे भी पढ़िए…बिहार में भारी बारिश, 3 दिन का अलर्ट; पटना भी प्रभावित, पूर्वानुमान जारी

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि BCI के नियमों में अध्यक्ष के कार्यकाल को लेकर निर्धारित व्यवस्था के बावजूद परिषद के स्तर पर इसे इस तरह बढ़ाया नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में इसी मुद्दे पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने इस स्तर पर तत्काल मनन मिश्रा को हटाने के बजाय नई BCI के गठन की प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया है।

नई BCI के गठन की तैयारी तेज

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के चुनाव और नई BCI के गठन के लिए समयबद्ध प्रक्रिया पर जोर दिया है। अदालत ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से राज्य बार काउंसिलों में दो महिला सदस्यों के सहयोजन की प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है। इसके बाद राज्य बार काउंसिलों को अपनी नई संरचना अधिसूचित करनी होगी।

नई संरचना बनने के बाद वे अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI प्रतिनिधि का चुनाव करेंगी। इसके बाद नई BCI के गठन की दिशा में आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लंबे समय से लंबित BCI के पुनर्गठन और चुनाव को आगे बढ़ाना है।

PEARL FIRST ट्रस्ट पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान BCI से जुड़े PEARL FIRST ट्रस्ट का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। याचिकाओं में ट्रस्ट की संरचना और उसमें BCI के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सवाल किया कि यदि BCI एक निर्वाचित वैधानिक संस्था है तो उसके मौजूदा पदाधिकारी किसी ट्रस्ट में स्थायी ट्रस्टी कैसे बने रह सकते हैं, जबकि उनका BCI पद आगे बदल सकता है। अदालत ने इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार किया है। हालांकि, ट्रस्ट को लेकर अंतिम स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगी।

NALSAR विवाद के बाद बढ़ा था विवाद

मनन मिश्रा इससे पहले NALSAR के छात्रों से जुड़े विवाद के कारण भी चर्चा में आए थे। BCI की ओर से 2026 बैच के NALSAR छात्रों के नामांकन को लेकर निर्देश जारी किए गए थे। यह विवाद छात्रों के एक वर्ग की ओर से दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी पर आपत्ति जताए जाने के बाद सामने आया था। बाद में BCI ने अपना फैसला वापस लिया और मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी। इसके बाद BCI के कामकाज और उनके लंबे कार्यकाल को लेकर सवाल और तेज हुए। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच उनके कार्यकाल और BCI की प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल BCI को पूरी तरह ठप करने के बजाय अंतरिम व्यवस्था के साथ काम जारी रखने का रास्ता अपनाया है। मनन कुमार मिश्रा रोजमर्रा के कामकाज को संभाल सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी जरूरी होगी।

दूसरी ओर, राज्य बार काउंसिलों के गठन और चुनाव की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। नई राज्य बार काउंसिलों के प्रतिनिधि चुने जाने के बाद नई BCI के गठन पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से फिलहाल मनन मिश्रा के तत्काल हटने की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन उनके अधिकारों और BCI की निर्णय प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण सीमाएं जरूर तय हुई हैं। अब पूरे मामले की अगली दिशा नई BCI के गठन और आगे होने वाली न्यायिक सुनवाई से तय होगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट