AAP को बड़ा झटका: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल, ‘2/3 बहुमत’ के साथ विलय का दावा

राघव चड्ढा

राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस कदम ने न केवल AAP को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है, बल्कि संसद के ऊपरी सदन की गणित को भी बदलकर रख दिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ मौजूद राघव चड्ढा ने कहा कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत पार्टी के दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से BJP में विलय कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से 7 उनके साथ हैं, जो दो-तिहाई से अधिक है।

“AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई” – चड्ढा

राघव चड्ढा ने भावुक अंदाज में कहा,
“जिस पार्टी को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा, अपने जीवन के 15 साल दिए, वही पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक चुकी है। अब यह पार्टी देशहित में नहीं, बल्कि निजी हितों के लिए काम कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें महसूस हो रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं। इसी कारण उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया।

किन-किन सांसदों ने बदला पाला?

चड्ढा के अनुसार, उनके साथ BJP में शामिल होने वाले राज्यसभा सांसदों में हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी शामिल हैं।

इन सभी सांसदों ने कथित तौर पर एक संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर कर राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है, जिसमें BJP में विलय की सूचना दी गई है।

AAP की संख्या में बड़ी गिरावट

इस घटनाक्रम के बाद AAP की संसद में स्थिति कमजोर हो गई है। पहले पार्टी के राज्यसभा में 10 सांसद थे, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गए हैं। वहीं लोकसभा में पहले से ही AAP के 3 सांसद हैं।

इस तरह अब दोनों सदनों में AAP की संख्या बराबर 3-3 रह गई है, जो पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

संजय सिंह का तीखा हमला

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP सांसद संजय सिंह ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा,
“BJP ने पंजाब में भगवंत मान सरकार के अच्छे कामों को रोकने का काम किया है। जो 7 सांसद आज BJP में जा रहे हैं, पंजाब की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।”

उन्होंने लोगों से इन नेताओं के नाम याद रखने की अपील की और कहा कि यह जनादेश के साथ विश्वासघात है।

पृष्ठभूमि: चड्ढा और पार्टी में बढ़ती दूरी

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में हाल के दिनों में AAP और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी को अहम माना जा रहा है। कुछ समय पहले ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया था।

पार्टी ने चड्ढा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाई।
हालांकि चड्ढा ने पलटवार करते हुए कहा था कि जनता के मुद्दे उठाना क्या अपराध है?

एंटी-डिफेक्शन कानून से बचाव कैसे?

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या इन सांसदों पर दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) लागू होगा?
संविधान के अनुसार, अगर किसी दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाता।

चड्ढा ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि उनके साथ 7 सांसद हैं, जो 10 का दो-तिहाई से अधिक है। इसलिए यह कदम पूरी तरह संवैधानिक है।

BJP के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा

राज्यसभा में यह घटनाक्रम BJP के लिए बड़ा फायदा माना जा रहा है। इससे ऊपरी सदन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में आसानी हो सकती है।

हालांकि, BJP की ओर से इस पर आधिकारिक विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2026 की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति पर असर

इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर खासकर पंजाब की राजनीति पर पड़ सकता है, जहां AAP की सरकार है। विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला तेज कर सकता है।

वहीं राष्ट्रीय स्तर पर AAP की छवि और संगठनात्मक मजबूती पर भी सवाल उठ सकते हैं। लगातार हो रहे आंतरिक विवाद और नेताओं की नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बनती जा रही है।

आगे क्या?

अब नजर राज्यसभा के सभापति के फैसले पर टिकी है, जो इन सांसदों के विलय को मंजूरी देंगे या नहीं। यदि यह विलय मान्य हो जाता है, तो AAP के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा।

राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों का BJP में शामिल होना भारतीय राजनीति की बड़ी घटनाओं में गिना जाएगा। यह न केवल AAP के लिए संकट का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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