10 Circular Road को लेकर बिहार में सियासी घमासान, रोहिणी आचार्य ने सरकार को दी चुनौती
राबड़ी देवी की बेटी और सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्य खुलकर सरकार के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं
10 Circular Road Bungalow Controversy: बिहार की राजनीति में नया विवाद
बिहार की राजनीति में एक बार फिर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भवन निर्माण विभाग द्वारा सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन के नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं सरकार का दावा है कि आवास का आवंटन नियमों के तहत किया गया है और उसे नए मंत्री को सौंपा जाना है।
इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। राबड़ी देवी की बेटी और सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्य खुलकर सरकार के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं। दूसरी ओर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी राबड़ी देवी के समर्थन में बयान देकर इस मुद्दे को और गरमा दिया है।
रोहिणी आचार्य का सरकार पर हमला
राबड़ी देवी को आवास खाली करने के नोटिस के बाद रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो सरकार जबरन बंगला खाली करवाकर दिखाए।

रोहिणी ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। ऐसे में जनता का ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर पुलिस भेजना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह सत्ता के अहंकार तथा दबंगई का उदाहरण है। रोहिणी ने इसे “प्रतिशोध मॉडल” की राजनीति करार दिया।
राबड़ी देवी का दो टूक जवाब
नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली नहीं करेंगी।
राबड़ी देवी ने कहा कि सरकार यदि चाहती है तो पुलिस बल भेजकर उन्हें बाहर निकाल सकती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है।

राबड़ी देवी का यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है जबकि सरकार नियमों का हवाला दे रही है।
तीसरी बार भेजा गया नोटिस
जानकारी के अनुसार भवन निर्माण विभाग द्वारा राबड़ी देवी को यह तीसरा नोटिस जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है।
इसके बावजूद वे अभी भी 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रही हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आवास अब बिहार सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है, इसलिए इसे खाली कराया जाना आवश्यक है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि आवास आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और प्रोटोकॉल के तहत की गई है।
राबड़ी आवास पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिवालय SDPO अनु कुमारी राबड़ी आवास पहुंचीं। इस दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा।

बताया जा रहा है कि SDPO ने राबड़ी देवी से मुलाकात कर स्थिति को लेकर बातचीत की। हालांकि इस दौरान किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन पुलिस की मौजूदगी ने राजनीतिक विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया।
RJD नेताओं ने इसे सरकार की दबाव बनाने की रणनीति बताया है।
पप्पू यादव भी आए समर्थन में
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी इस मामले में राबड़ी देवी का समर्थन किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि राबड़ी देवी का सम्मान किया जाना चाहिए।
पप्पू यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री को संबंधित मंत्री के लिए कोई दूसरा सरकारी आवास उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उनका सम्मान सभी को करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और एक दिन वर्तमान मुख्यमंत्री भी पूर्व मुख्यमंत्री बनेंगे। इसलिए राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति से बचना चाहिए।
पप्पू यादव ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज राजनीति में कटुता और बदले की भावना बढ़ती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
नंदकिशोर राम ने क्या कहा?
जिस सरकारी बंगले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, वह अब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है।
नंदकिशोर राम ने कहा कि उन्हें नियमों के अनुसार सरकारी आवास आवंटित किया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्री बनने के बावजूद उनके पास अभी तक कोई सरकारी आवास नहीं था, इसलिए सरकार ने उन्हें यह बंगला दिया है।

मंत्री ने कहा कि जब सरकार ने आधिकारिक रूप से आवास आवंटित कर दिया है तो उसे खाली किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि राबड़ी देवी आवास खाली करने से इनकार क्यों कर रही हैं।
नंदकिशोर राम ने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और जनता की सेवा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक और नियम आधारित है।
राजनीतिक बनाम प्रशासनिक मुद्दा?
10 सर्कुलर रोड बंगले को लेकर विवाद अब केवल आवास आवंटन का मामला नहीं रह गया है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि सरकार इसे नियमों के पालन से जुड़ा प्रशासनिक फैसला कह रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के विवाद राजनीतिक दलों को अपने समर्थकों को एकजुट करने का अवसर देते हैं। यही कारण है कि एक सरकारी आवास का मामला अब राज्य की बड़ी राजनीतिक बहस में बदल चुका है।
अब सबकी नजर सरकार और राबड़ी देवी के अगले कदम पर टिकी है। यदि राबड़ी देवी आवास खाली नहीं करती हैं तो सरकार कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई कर सकती है। वहीं RJD इस मुद्दे को राजनीतिक संघर्ष के रूप में पेश कर रही है।
आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल 10 सर्कुलर रोड का बंगला सत्ता, सम्मान और सियासत के बीच टकराव का नया प्रतीक बन गया है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
