लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 40 साल के सैन्य अनुभव के साथ संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ

भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।

नई दिल्ली: भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। वह मौजूदा आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। इसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारत के 31वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को अपनाने और सीमाओं पर बदलती चुनौतियों के अनुरूप खुद को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। लगभग 40 वर्षों के सैन्य अनुभव के साथ धीरज सेठ का सेना प्रमुख बनना भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

वर्तमान में उप सेना प्रमुख हैं धीरज सेठ

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ इस समय भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख यानी वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में यह जिम्मेदारी संभाली थी। उप सेना प्रमुख सेना का दूसरा सबसे बड़ा पद होता है और इस पद पर रहते हुए वह सेना प्रमुख के साथ मिलकर सैन्य तैयारियों, ऑपरेशनल रणनीति, आधुनिक हथियार प्रणालियों और नई तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे अहम फैसलों में भूमिका निभाते हैं।

उनके पास सेना के प्रशासनिक और संचालन संबंधी कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रही है। यही अनुभव अब उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक लेकर आया है।

दिसंबर 1986 में सेना में हुए थे शामिल

धीरज सेठ का सैन्य करियर दिसंबर 1986 में शुरू हुआ था, जब उन्हें भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने देश के कई संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में सेवा दी।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान अहम जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। इन क्षेत्रों में सेवा के दौरान उन्होंने सैन्य नेतृत्व, ऑपरेशनल प्लानिंग और रणनीतिक निर्णय लेने की अपनी क्षमता का परिचय दिया।

करीब चार दशकों के सैन्य करियर में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अपनी कार्यकुशलता के दम पर सेना के शीर्ष पद तक पहुंचे।

दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का कर चुके हैं नेतृत्व

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सेना की दो बड़ी ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। वह दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) रह चुके हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर स्थित इन कमानों का नेतृत्व करना किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। इन कमानों के जरिए सीमा सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और युद्धक रणनीति से जुड़े कई अहम फैसले लिए जाते हैं।

इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। सेना की क्षमता विकास योजनाओं और सैन्य आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन का भी हिस्सा रहे

धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने अफ्रीकी देश अंगोला में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी अपनी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति मिशन का हिस्सा बनने से उन्हें बहुराष्ट्रीय सैन्य संचालन और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।

इस अनुभव को भारतीय सेना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि आज के समय में सैन्य रणनीति केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि साइबर सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी श्रेष्ठता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से की पढ़ाई

धीरज सेठ की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने महाराष्ट्र के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से सैन्य शिक्षा प्राप्त की।

इसके अलावा उन्होंने वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC), महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी प्रशिक्षण हासिल किया।

उनकी शिक्षा केवल भारत तक सीमित नहीं रही। उन्होंने फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स किया, जबकि अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया।

विदेशों में प्राप्त इस सैन्य शिक्षा ने उन्हें आधुनिक युद्धक तकनीकों, रक्षा प्रबंधन और रणनीतिक नेतृत्व की गहरी समझ प्रदान की।

कई प्रतिष्ठित सम्मान और उपलब्धियां

धीरज सेठ अपने सैन्य करियर के दौरान कई प्रतिष्ठित सम्मान और उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान से नवाजा गया था।

उन्होंने जूनियर कमांड कोर्स सहित सेना के कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रथम स्थान हासिल किया। वर्ष 2006 में उन्हें डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में अपने कोर्स के सर्वश्रेष्ठ ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर के रूप में सम्मानित किया गया था।

उनकी ये उपलब्धियां बताती हैं कि वह केवल एक अनुभवी सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारी भी हैं।

सेना के परिवार से रखते हैं संबंध

धीरज सेठ सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भी भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। वह वर्ष 1997 में एडजुटेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

कृष्ण मोहन सेठ ने भारतीय सेना की दो बड़ी और अहम टुकड़ियों XXI स्ट्राइक कोर और III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में धीरज सेठ का सैन्य जीवन बचपन से ही अनुशासन, नेतृत्व और देश सेवा की भावना से जुड़ा रहा है।

खेलों में भी रखते हैं खास रुचि

सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी गहरी रुचि रखते हैं। उन्हें विशेष रूप से टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनकी पत्नी का नाम कोमल सेठ है और परिवार हमेशा उनके सैन्य जीवन में सहयोगी भूमिका निभाता रहा है।

सेना के आधुनिकीकरण पर रहेगी नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख बनने के बाद धीरज सेठ का सबसे बड़ा फोकस भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों को अपनाने और सीमाओं पर सुरक्षा को और मजबूत करने पर रहेगा।

भारत के सामने बदलती वैश्विक चुनौतियों और आधुनिक युद्ध की नई परिस्थितियों के बीच उनका अनुभव और नेतृत्व भारतीय सेना को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में 30 जून को होने वाला नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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