तमिलनाडु में सियासी घमासान: विजय की सरकार बनने पर संकट, राज्यपाल ने शपथ दिलाने से किया इनकार

विजय

अभिनेता से राजनेता बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।

तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। अभिनेता से राजनेता बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। लेकिन भारी जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की राह उनके लिए आसान नहीं दिख रही। राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने लगातार दूसरे दिन विजय को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया है। इसके बाद राज्य की राजनीति में संवैधानिक संकट, जोड़तोड़ और संभावित कोर्ट लड़ाई की चर्चा तेज हो गई है।

राजभवन का कहना है कि TVK के पास अभी स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में विजय की सरकार बनने पर अनिश्चितता बनी हुई है। दूसरी ओर, विजय और उनकी पार्टी अब सरकार बनाने के लिए हर राजनीतिक और कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है।

पहली ही चुनावी पारी में विजय का बड़ा प्रदर्शन

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने राजनीति में कदम रखते ही बड़ा प्रभाव छोड़ा है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटों पर जीत दर्ज कर तमिलनाडु की राजनीति में खुद को मजबूत ताकत के रूप में स्थापित कर लिया।

हालांकि बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 118 का है और TVK इससे 10 सीट पीछे रह गई। यही वजह है कि सरकार गठन को लेकर अब पूरा मामला सहयोगी दलों और समर्थन जुटाने पर टिक गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने युवाओं, शहरी वोटर्स और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच जबरदस्त पकड़ बनाई। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार विरोधी और नई राजनीति के चेहरे के रूप में पेश किया। इसका सीधा फायदा उन्हें चुनाव परिणामों में मिला।

राज्यपाल ने क्यों रोकी शपथ?

सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने विजय को राजभवन बुलाकर सरकार गठन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। राज्यपाल ने यह स्पष्ट किया कि सिर्फ 113 विधायकों के समर्थन के दावे के आधार पर सरकार नहीं बनाई जा सकती।

बताया जा रहा है कि विजय ने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि वह विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं और बहुमत साबित कर देंगे। लेकिन राजभवन फिलहाल लिखित समर्थन और स्थिर सरकार की संभावना को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यपाल का यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि तमिलनाडु जैसी बड़ी राजनीतिक इकाई में अस्थिर सरकार की स्थिति प्रशासनिक संकट पैदा कर सकती है।

कोर्ट जाने की तैयारी में TVK

राज्यपाल के रुख से नाराज TVK अब कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, विजय की टीम वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी से सलाह ले रही है। हालांकि पार्टी फिलहाल अदालत तभी जाएगी जब राजनीतिक स्तर पर सभी विकल्प समाप्त हो जाएंगे।

TVK नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का पहला अधिकार उन्हें मिलना चाहिए। पार्टी का दावा है कि अगर फ्लोर टेस्ट कराया जाए तो वह बहुमत साबित कर देगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि इससे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा जैसे राज्यों में भी सरकार गठन को लेकर अदालतों ने महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

समर्थन जुटाने की कोशिश में विजय

सरकार बनाने के लिए विजय लगातार अन्य दलों से संपर्क साध रहे हैं। कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने की पेशकश की है। कांग्रेस के पांच विधायक विजय के साथ आने को तैयार बताए जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस ने शर्त रखी है कि TVK किसी भी तरह से बीजेपी या सांप्रदायिक ताकतों के साथ नहीं जाएगी।

इसके अलावा विजय को वामपंथी दल CPI और CPM से चार सीटों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। वहीं विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) और पट्टाली मक्कल काची (PMK) से भी समर्थन की संभावना जताई जा रही है।

अगर यह पूरा गठबंधन बनता है तो TVK के पास लगभग 123 सीटों का आंकड़ा पहुंच सकता है। हालांकि विजय के दो सीटों से चुनाव जीतने के कारण एक सीट छोड़ने पर यह संख्या घटकर 122 हो जाएगी। इसके बावजूद यह बहुमत के आंकड़े से ऊपर होगी।

गठबंधन की राह में सबसे बड़ी मुश्किल

विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक विरोधाभास है। VCK फिलहाल DMK गठबंधन का हिस्सा है, जबकि PMK का संबंध बीजेपी गठबंधन से माना जाता है।

ऐसे में इन दलों का TVK के साथ आना आसान नहीं होगा। खासकर तब, जब चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने DMK और बीजेपी दोनों पर तीखे हमले किए थे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर VCK और PMK अपने मौजूदा गठबंधन छोड़ते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा फेरबदल हो सकता है। यही कारण है कि सभी दल अभी बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं।

AIADMK के साथ गठबंधन की अटकलें

तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK हमेशा एक बड़ी ताकत रही है। ऐसे में TVK और AIADMK के संभावित गठबंधन की चर्चा भी तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के कुछ विधायक विजय के संपर्क में हैं। यहां तक कि यह खबर भी सामने आई कि पार्टी के कुछ विधायक पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं ताकि टूटफूट से बचा जा सके।

हालांकि AIADMK नेतृत्व ने इन दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं सीवी षणमुगम और केपी मुनुसामी ने साफ कहा कि TVK के साथ किसी गठबंधन पर चर्चा नहीं हो रही।

फिर भी राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जारी है कि अगर AIADMK और TVK साथ आते हैं तो उनके पास 150 से ज्यादा सीटें हो सकती हैं, जो एक मजबूत सरकार बनाने के लिए काफी होंगी।

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स ने बढ़ाई हलचल

तमिलनाडु में जारी राजनीतिक संकट के बीच ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ भी शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि TVK ने अपने 107 नवनिर्वाचित विधायकों को चेन्नई से बाहर मामल्लापुरम के एक रिसॉर्ट में ठहराया है।

पार्टी को डर है कि विरोधी दल उनके विधायकों में टूट कराने की कोशिश कर सकते हैं। इससे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसी राजनीतिक रणनीतियां देखने को मिल चुकी हैं।

क्या लग सकता है राष्ट्रपति शासन?

अगर TVK बहुमत साबित करने में विफल रहती है और कोई स्थिर गठबंधन नहीं बन पाता, तो राज्यपाल विधानसभा को निलंबित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेजी जा सकती है।

यह स्थिति तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद असामान्य होगी, क्योंकि राज्य लंबे समय से मजबूत क्षेत्रीय दलों की राजनीति का केंद्र रहा है।

तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय

विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। DMK और AIADMK के दशकों पुराने वर्चस्व के बीच TVK का उभरना अपने आप में बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

हालांकि चुनाव जीतना और सरकार बनाना दोनों अलग चुनौतियां हैं। अब नजर इस बात पर है कि विजय राजनीतिक समीकरण साध पाते हैं या तमिलनाडु एक नए संवैधानिक और राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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