सरकारी अफसर हो जाएं सतर्क! सोशल मीडिया पर लगेगी सख्ती, केंद्र की बड़ी तैयारी

सरकारी अफसर

सरकारी अफसरों के रील्स और पोस्ट पर केंद्र लाएगा नई आचार संहिता

निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। सरकारी अफसर और अन्य सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्द ही सोशल मीडिया के इस्तेमाल से संबंधित एक सख्त आचार संहिता जारी करने पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब तक लागू किया जाएगा और अंतिम नियमों में कौन-कौन से प्रावधान शामिल होंगे।

सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता बनी चिंता

पिछले कुछ समय में सरकारी अफसर और कर्मचारियों की सोशल मीडिया पर सक्रियता तेजी से बढ़ी है। कई अधिकारी अपने काम से जुड़े वीडियो, रील्स और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। कुछ मामलों में अधिकारी अपने पद, जिम्मेदारियों या सरकारी कार्रवाई से संबंधित सामग्री को भी सार्वजनिक मंचों पर रखते नजर आए हैं।

इसे भी पढ़िए….दिल्ली के साकेत थाने में महिला पत्रकारों की पिटाई? पुलिस ने आरोप नकारे, मचा विवाद

सरकार की चिंता उन गतिविधियों को लेकर है, जिनसे सरकारी पद की गरिमा प्रभावित होने या किसी सरकारी अफसर की निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति बन सकती है। प्रस्तावित आचार संहिता के जरिए इसी तरह के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है।

सरकारी अफसरों के लिए क्या बदल सकता है?

प्रस्तावित सोशल मीडिया आचार संहिता में सरकारी अफसरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है। इसमें यह तय किया जा सकता है कि अधिकारी किन विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी कर सकते हैं और किन मामलों में उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से बचना होगा।

देखिये ख़बर हमारे यूट्यूब चैनल पर भी: Sanjay Singh पर इल्ज़ाम लगाने वाले अपने गिरेबान में झाँक ले,मंत्री ने कर दिया मानहानि का मुकदमा…

सरकारी अफसर के निजी अकाउंट पर साझा की जाने वाली सामग्री को लेकर भी नियम बनाए जा सकते हैं। खास तौर पर ऐसी पोस्ट, वीडियो या रील्स पर नजर हो सकती है, जिनमें सरकारी पद या अधिकार का व्यक्तिगत प्रचार के लिए इस्तेमाल दिखाई देता हो।

हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से प्रस्तावित नियमों का विस्तृत प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि आचार संहिता में सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कितनी सख्ती की जाएगी।

पद से ऊपर होगी नई आचार संहिता

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था किसी खास रैंक या पद तक सीमित नहीं होगी। यानी केंद्र या राज्यों के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इसके दायरे में आ सकते हैं।

इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर सरकारी अफसर के लिए एक समान आचरण व्यवस्था तैयार करना है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर अन्य कर्मचारियों तक सभी के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट सीमा निर्धारित की जा सकती है।

अभी क्यों महसूस हुई जरूरत?

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मौजूदा सेवा नियमों में सरकारी अफसर के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर हर स्थिति के लिए स्पष्ट और विशिष्ट प्रावधान नहीं हैं। सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण पुरानी व्यवस्था में नए डिजिटल व्यवहार से जुड़े कई सवाल सामने आ रहे हैं।

रील्स और शॉर्ट वीडियो के दौर में सरकारी अधिकारियों की निजी और पेशेवर गतिविधियों के बीच अंतर भी कई बार धुंधला हो जाता है। किसी अधिकारी की निजी पोस्ट भी उसके सरकारी पद से जोड़कर देखी जा सकती है। ऐसे में सरकार सोशल मीडिया पर सरकारी सेवकों के आचरण को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था बनाना चाहती है।

AI और डीपफेक पर भी सरकार सख्त

सोशल मीडिया आचार संहिता की तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार डिजिटल प्लेटफार्म पर भ्रामक और कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री को लेकर पहले ही नियम कड़े कर चुकी है।

आइटी नियम, 2021 में किए गए बदलावों के जरिए सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफार्मेशन, डीपफेक और एआई से तैयार सामग्री से जुड़े खतरों पर नियंत्रण की कोशिश की गई है। सरकार का जोर ऐसी सामग्री के तेजी से प्रसार को रोकने और डिजिटल प्लेटफार्म की जवाबदेही बढ़ाने पर है।

कंटेंट हटाने की समय सीमा भी हुई सख्त

संवेदनशील मामलों में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों के लिए आपत्तिजनक या संबंधित सामग्री हटाने की समय सीमा को भी कम किया गया है। पहले जहां कुछ मामलों में 24 घंटे तक का समय मिलता था, वहीं नए प्रावधानों के तहत कुछ परिस्थितियों में इसे घटाकर दो घंटे किया गया है।

सरकारी या अदालती आदेशों के बाद भ्रामक सामग्री को हटाने की प्रक्रिया को भी अधिक तेज बनाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल स्पेस में गलत सूचना और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री के प्रसार को सीमित करना है।

सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बढ़ेगी जवाबदेही

सरकार की प्रस्तावित सोशल मीडिया आचार संहिता को इसी व्यापक डिजिटल जवाबदेही की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो सरकारी अफसरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले अपने पद, विभागीय जिम्मेदारी और पोस्ट के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखना पड़ सकता है।

फिलहाल प्रस्तावित नियमों का अंतिम स्वरूप सामने नहीं आया है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या प्रतिबंध होंगे, किन पोस्ट को अनुमति मिलेगी और उल्लंघन की स्थिति में क्या कार्रवाई होगी, इन सवालों का जवाब आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

केंद्र सरकार का यह संभावित कदम बताता है कि डिजिटल प्लेटफार्म अब सरकारी सेवा आचरण का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। आने वाले समय में सरकारी अफसरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियम और अधिक स्पष्ट तथा जवाबदेह बनाए जाने की संभावना है।