सुधाकर सिंह का दावा, कहा- स्वास्थ्य विभाग में हुआ 300 करोड़ का घोटाला, बचने को छीनी गई सीबीआई की शक्ति

सुधाकर सिंह

सुधाकर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग में 300 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में भ्रष्टाचार का एक मॉडल खड़ा किया गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की खरीद को लेकर करीब 300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका और शक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से CBI की शक्तियां कम किए जाने का मुद्दा उठाया। उनका सवाल था कि जब भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के बीच CBI को लेकर डर था, तो उसकी शक्तियां क्यों कम की गईं।

स्वास्थ्य विभाग की खरीद पर सवाल

सुधाकर सिंह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की खरीद का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिस मशीन की कीमत 23 करोड़ रुपये बताई गई थी, उसे करीब 4.50 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इसी आधार पर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में करीब 300 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

राजद सांसद ने कहा कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है और यदि किसी उपकरण की खरीद में कीमतों को लेकर इतना बड़ा अंतर है तो उसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग उठाते हुए सरकार से जवाब देने को कहा। हालांकि, सुधाकर सिंह की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सुधाकर सिंह ने CBI की शक्ति पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CBI की भूमिका को लेकर भी सुधाकर सिंह ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद जांच एजेंसियों की शक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है तो जांच एजेंसियों को प्रभावी तरीके से काम करने से क्यों रोका जा रहा है। सुधाकर सिंह ने दावा किया कि CBI का डर खत्म होने से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का दबाव भी कम हो सकता है।

कॉर्पोरेशन बनाने पर भी सरकार को घेरा

सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार के अलग-अलग विभागों में ऐसे कॉर्पोरेशन बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं का दायरा केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है।

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राजद सांसद के मुताबिक, सरकारी विभागों में होने वाली खरीद और योजनाओं में पारदर्शिता की जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर सरकारी धन के इस्तेमाल में अनियमितताएं की जा रही हैं।

CAG की भूमिका पर भी सवाल

सुधाकर सिंह ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निगरानी और ऑडिट की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही है।

हालांकि, CAG पर लगाए गए आरोप भी सुधाकर सिंह के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

नीतीश कुमार पर कार्रवाई की मांग

सुधाकर सिंह ने भ्रष्टाचार के कथित मामलों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में मुख्यमंत्री की भूमिका रही है। इसी आधार पर उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने यहां तक कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और दोष साबित होने पर किसी को भी बचाया नहीं जाना चाहिए। उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं।

दवाओं की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

सुधाकर सिंह ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में मिलने वाली कुछ दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

राजद सांसद ने दावा किया कि खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है और नई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए दवाओं की गुणवत्ता जांच और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासी बहस तेज

सुधाकर सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। एक ओर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुधाकर सिंह ने सरकार से कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में सरकार और संबंधित विभाग की ओर से क्या जवाब सामने आता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

राजद सांसद के आरोपों ने बिहार में स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया, सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आरोपों की सच्चाई जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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