ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट से लेकर भोपाल कोर्ट तक आज अहम सुनवाई, जांच की निष्पक्षता पर उठे बड़े सवाल

ट्विशा शर्मा

मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। इस केस में आज एक साथ सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और भोपाल जिला अदालत में अलग-अलग सुनवाई होनी हैं

ट्विशा शर्मा मौत केस में आज तीन अदालतों में सुनवाई, जांच पर उठे गंभीर सवाल

मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। इस केस में आज एक साथ सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और भोपाल जिला अदालत में अलग-अलग सुनवाई होनी हैं। मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि ट्विशा की सास रिटायर्ड जिला जज हैं और इसी वजह से जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच संस्थागत पक्षपात, पुलिस जांच की प्रक्रिया, अस्पताल की भूमिका और संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच के लिए नए प्रोटोकॉल की जरूरत जैसे मुद्दों पर विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मीडिया रिपोर्ट्स और मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए CJI के समक्ष सुनवाई की अनुमति मांगी थी। रजिस्ट्री का कहना था कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में यह नैरेटिव तेजी से बन रहा है कि ट्विशा की सास के रिटायर्ड जज होने के कारण पुलिस जांच प्रभावित हो सकती है।

रजिस्ट्री ने सुझाव दिया कि इस मामले को सुओ मोटू रिट पिटीशन (क्रिमिनल) के रूप में दर्ज किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने सुनवाई की मंजूरी दे दी।

यह मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था, पुलिस जांच और संस्थागत निष्पक्षता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।

हाईकोर्ट में सास की जमानत पर सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग पर सुनवाई होनी है। यह याचिका मध्य प्रदेश शासन और ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को देखते हुए सुनवाई टाल भी सकता है। एडवोकेट पंकज दुबे के अनुसार, शीर्ष अदालत के निर्देश आने तक हाईकोर्ट कोई बड़ा फैसला लेने से बच सकता है।

भोपाल जिला अदालत में क्या होगा?

भोपाल जिला अदालत में आज ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह की 12 मई से 20 मई तक की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और भोपाल एम्स के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग पर सुनवाई होगी।

परिवार की ओर से कहा गया है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ न हो, इसके लिए अदालत से निर्देश मांगे गए हैं।

पति समर्थ सिंह ने पूछताछ में क्या कहा?

पुलिस रिमांड पर चल रहे समर्थ सिंह ने पूछताछ में दावा किया है कि शादी के बाद दोनों का रिश्ता सामान्य था, लेकिन प्रेग्नेंसी कन्फर्म होने के बाद ट्विशा के व्यवहार में बदलाव आने लगा।

समर्थ के अनुसार, ट्विशा अक्सर कहती थीं कि ग्लैमर इंडस्ट्री से जुड़े होने के कारण घरेलू जीवन को अपनाना उनके लिए कठिन हो रहा है। इसी वजह से दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा था।

उसने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन ट्विशा ब्यूटी पार्लर से लौटने के बाद उसके साथ वॉक पर गई थीं। दोनों ने साथ खाना खाया और समय बिताया। बाद में वह अपने मायके वालों से फोन पर बात करने लगी थीं।

हालांकि, मायके पक्ष इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है और इसे हत्या का मामला बता रहा है।

दोबारा पोस्टमॉर्टम से बढ़ी उम्मीदें

मामले में बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली एम्स की फॉरेंसिक टीम ने भोपाल एम्स में ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। करीब तीन घंटे चली इस प्रक्रिया के दौरान फोटो, वीडियो और मेडिकल सैंपल एकत्र किए गए।

दिल्ली एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी समय लगेगा क्योंकि हिस्टोपैथोलॉजी और विसरा जांच बाकी है।

दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को इस मामले का सबसे अहम मेडिकल दस्तावेज माना जा रहा है।

केस में उठ रहे 5 बड़े सवाल

1. गले पर डबल लिगेचर मार्क

पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ट्विशा की गर्दन पर दो समानांतर लिगेचर मार्क दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि फंदा गर्दन पर दो बार लिपटा प्रतीत होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य फांसी के मामलों में इस तरह के निशान कम देखने को मिलते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या फिर किसी अन्य परिस्थिति में मौत हुई।

2. फंदे की बरामदगी में देरी

मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि पहली पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के दौरान कथित फंदा डॉक्टरों या पुलिस को नहीं सौंपा गया। बाद में सवाल उठने के बाद 15 मई को फंदा बरामद किया गया।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, आत्महत्या के मामलों में फंदा सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है और इसे तुरंत सीज किया जाना चाहिए। इस देरी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

3. शरीर पर चोट के निशान

परिवार का दावा है कि ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए। पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी बाएं हाथ की कलाई और कोहनी के बीच चोटों का उल्लेख है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें किसी ठोस वस्तु के प्रभाव से हो सकती हैं। हालांकि, चोटों की गहराई और समय को लेकर पर्याप्त विवरण नहीं दिया गया, जिससे संदेह और बढ़ गया है।

4. हायॉइड बोन सुरक्षित मिलने पर विवाद

विशेषज्ञ बताते हैं कि फांसी के कई मामलों में हायॉइड बोन या थायरॉयड कार्टिलेज प्रभावित होती है। लेकिन पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह हिस्सा सुरक्षित बताया गया।

हालांकि, रिपोर्ट में टिशू में रक्तस्राव के संकेत दर्ज हैं। अब दूसरी पोस्टमॉर्टम जांच में यह देखा जाएगा कि क्या मेडिकल निष्कर्ष आत्महत्या के सिद्धांत से मेल खाते हैं या नहीं।

5. लंबाई और मेडिकल रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल

एम्स भोपाल की रिपोर्ट में ट्विशा की लंबाई 166 सेंटीमीटर दर्ज की गई है, जबकि परिवार का दावा है कि उनकी लंबाई करीब 172 सेंटीमीटर थी।

परिवार के वकील अंकुर पांडेय ने इसे मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बताया है। उनका कहना है कि अगर बुनियादी तथ्य भी अलग-अलग दर्ज किए गए हैं तो पूरी जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

देशभर में बढ़ रही बहस

यह मामला अब सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन चुका है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रभावशाली परिवारों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम कर पाती हैं।

सुप्रीम Court की दखल के बाद अब इस केस को केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालतों की सुनवाई और दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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