भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप! चेतावनी स्तर से 17 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा पानी, खतरे के निशान से महज 83 सेंटीमीटर दूर

भागलपुर

भागलपुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है

निष्कर्ष भारत संवाददाता-भागलपुर। बिहार के भागलपुर में गंगा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार 22 अगस्त की दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 32.85 मीटर पहुंच गया। गंगा करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रही है। जलस्तर में वृद्धि के साथ ही तटवर्ती और दियारा इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। कई जगहों पर खेतों में पानी फैल चुका है और गंगा की धार अब गांवों के मुहाने तक पहुंच गई है।

सुबह जिन इलाकों में खेत और मिट्टी दिखाई दे रही थी, वहां दोपहर बाद पानी नजर आने लगा। सब्जी और मक्का की फसलें पानी में डूबने लगी हैं। फसल के नुकसान के साथ अब किसानों के सामने पशुचारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों ने जरूरी सामान, अनाज और पशुओं के चारे को सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है।

चेतावनी स्तर पार, खतरे के निशान से 83 सेंटीमीटर दूर

भागलपुर में गंगा का चेतावनी स्तर 32.68 मीटर और खतरे का निशान 33.68 मीटर है। शनिवार दोपहर नदी का जलस्तर 32.85 मीटर दर्ज किया गया। यानी गंगा चेतावनी स्तर से 17 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और खतरे के निशान से अब सिर्फ 83 सेंटीमीटर नीचे है।

जल संसाधन विभाग अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल भागलपुर के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऊपरी क्षेत्रों में भी नदी का दबाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना है।

मौजूदा गति करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे बनी रहती है तो खतरे के निशान तक पहुंचने के लिए आवश्यक 83 सेंटीमीटर की वृद्धि में लगभग 55 घंटे लग सकते हैं। इस अनुमान के आधार पर गंगा सोमवार 24 अगस्त की शाम से रात के बीच 33.68 मीटर के खतरे के निशान तक पहुंच सकती है। हालांकि, नदी की रफ्तार में बदलाव होने पर यह समय आगे-पीछे हो सकता है।

34.86 मीटर है भागलपुर का उच्चतम बाढ़ स्तर

भागलपुर में गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 34.86 मीटर दर्ज किया गया है। वर्तमान में नदी का जलस्तर इस रिकॉर्ड स्तर से करीब 2.01 मीटर नीचे है। जिस तरह से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, उससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

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प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। निचले क्षेत्रों में पानी के फैलाव और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

खेतों के बाद गांवों पर मंडराया खतरा

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर दियारा और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर खेत पानी में डूब चुके हैं। किसानों की सब्जी और मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने के बाद अब पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आने लगी है।

बरारी, रजंदीपुर, फरका, बाबूपुर, घोषपुर, इंग्लिश, मासाढ़ू, ममलखा, शंकरपुर और अठगामा समेत कई तटवर्ती इलाकों में पानी लगातार फैल रहा है। गंगा की धार गांवों के मुहाने तक पहुंचने से ग्रामीणों में भय का माहौल है।

निचले घरों में रहने वाले परिवारों ने एहतियात के तौर पर अनाज, जरूरी सामान और पशुचारा ऊंचे स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों की चिंता अब केवल फसल बचाने तक सीमित नहीं है। लोगों को घर, पशुधन और रोजमर्रा के जीवन पर संभावित असर की चिंता सताने लगी है।

प्रयागराज और वाराणसी में बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण

गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रयागराज और वाराणसी में गंगा के बढ़ते पानी का असर आने वाले समय में बिहार के हिस्सों में भी दिखाई पड़ सकता है। ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह आगे बढ़ने पर भागलपुर में जलस्तर पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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इसी वजह से जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में गंगा के बढ़ने का क्रम जारी रह सकता है।

अजगैवीनाथ धाम और कहलगांव में भी बढ़ा दबाव

भागलपुर ही नहीं, आसपास के गंगा घाटों पर भी जलस्तर दबाव में है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 21 अगस्त की सुबह अजगैवीनाथ धाम में गंगा का जलस्तर 34.75 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 34.50 मीटर है। यानी जलस्तर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर था।

वहीं कहलगांव में गंगा का जलस्तर 30.97 मीटर दर्ज किया गया, जो वहां के 30.09 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर है। इससे साफ है कि भागलपुर क्षेत्र में गंगा का दबाव किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। अजगैवीनाथ धाम से लेकर कहलगांव तक नदी की स्थिति पर लगातार निगरानी की जरूरत है।

आपदा विभाग ने बढ़ाई निगरानी

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आपदा और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील तटबंधों, नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर नाव और राहत संसाधनों की व्यवस्था करने की तैयारी भी की जा रही है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर है। नदी चेतावनी रेखा पार कर चुकी है और खतरे के निशान से महज 83 सेंटीमीटर नीचे है। खेतों से गांवों की ओर बढ़ती गंगा की धार ने तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों की नजर अगले कुछ घंटों में नदी के जलस्तर और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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