जमुई में साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम जारी करने का खुलासा, CSC सेंटर पर छापेमारी; दो गिरफ्तार

साइबर अपराध

जमुई में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चकाई के सरौन स्थित CSC सेंटर पर छापेमारी कर दो युवकों को गिरफ्तार किया

निष्कर्ष भारत संवाददाता-जमुई। साइबर अपराध के खिलाफ जमुई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना की टीम ने चकाई थाना क्षेत्र के सरौन गांव स्थित शुभ सीएससी सेंटर पर छापेमारी कर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल सिम कार्ड को कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी करने के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सरौन गांव निवासी राजकपूर यादव और अरविंद कुमार के रूप में हुई है।

शनिवार को साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने प्रेसवार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरौन स्थित शुभ सीएससी सेंटर के पीओएस एजेंट की आईडी का इस्तेमाल ऐसे मोबाइल सिम जारी करने के लिए किया जा रहा था, जिनका बाद में साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ।

साइबर ठगी के लिए जारी किए जा रहे थे सिम

साइबर डीएसपी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शुभ सीएससी सेंटर से ऐसे मोबाइल सिम कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के मामलों में किया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद साइबर थाना की टीम ने पहले मामले का सत्यापन किया और इसके बाद सेंटर पर छापेमारी की।

यह ख़बर भी पढ़े: पटना में साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़, 25 करोड़ ट्रांजैक्शन

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सेंटर की पीओएस आईडी का इस्तेमाल सरौन निवासी राजकपूर यादव और अरविंद कुमार कर रहे थे। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सेंटर से तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। बरामद मोबाइल की जांच की जा रही है, ताकि सिम जारी करने और कथित साइबर अपराध से जुड़े अन्य कनेक्शन का पता लगाया जा सके।

चार महीने में करीब 100 सिम जारी

पुलिस की जांच में एक अहम जानकारी सामने आई है। साइबर डीएसपी के अनुसार, पिछले चार महीनों के दौरान संबंधित पीओएस आईडी से करीब 100 मोबाइल सिम कार्ड जारी किए गए। इनमें से लगभग 80 मोबाइल नंबरों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज है।

पुलिस के मुताबिक, इन 80 मोबाइल नंबरों से करीब 125 साइबर अपराध संबंधी शिकायतें जुड़ी हुई हैं। इन शिकायतों की जांच के दौरान करीब 13 लाख रुपये की साइबर ठगी की बात सामने आई है।

इस खुलासे के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया और इसके पीछे कितने लोग सक्रिय हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सिम जारी करने की प्रक्रिया में पहचान और दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

एनसीआरपी शिकायतों से सामने आया कनेक्शन

साइबर अपराधों की शिकायतों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुलिस की जांच में संबंधित पीओएस आईडी से जारी किए गए कई मोबाइल नंबरों का कनेक्शन एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतों से मिला है।

पुलिस के अनुसार, करीब 80 नंबरों के खिलाफ शिकायत दर्ज होना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। इन नंबरों से जुड़ी करीब 125 शिकायतों में लगभग 13 लाख रुपये की ठगी का उल्लेख सामने आया है।

देखिये ख़बर हमारे यूट्यूब चैनल पर भी: IIT पटना ..करोड़ों की गहना चोरी : प्रिंसिपल सिक्योरिटी को फिर टेंडर दिलाने की तैयारी में TN सिंह!

हालांकि, इन सभी मामलों में आरोपितों की भूमिका और सिम कार्ड के इस्तेमाल की परिस्थितियों की विस्तृत जांच अभी जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल फोन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश

दो आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर जारी किए गए सिम कार्ड किन लोगों तक पहुंचते थे और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।

जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सिम कार्ड लेने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी तरह की हेराफेरी की गई थी। पुलिस संबंधित मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े साइबर अपराध मामलों की भी जांच करेगी।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। जरूरत पड़ने पर उनसे भी पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।

साइबर थाना में केस दर्ज, कोर्ट में पेश किए गए आरोपित

मामले को लेकर जमुई साइबर थाना में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपितों को न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

पुलिस ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। संदिग्ध तरीके से बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी करने वाले पीओएस एजेंट और इससे जुड़े लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

छापेमारी टीम में ये पुलिसकर्मी रहे शामिल

शुभ सीएससी सेंटर पर हुई कार्रवाई में साइबर थाना की टीम के पुलिस पदाधिकारी और सशस्त्र बल के जवान शामिल थे। छापेमारी टीम में पुअनि अभय कांत चंदा और पुअनि प्रेम प्रभात समेत अन्य जवान शामिल रहे।

जमुई पुलिस की इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध के लिए मोबाइल सिम के कथित दुरुपयोग को लेकर एक बड़ा सवाल भी सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि करीब 100 सिम कार्ड जारी होने के बाद उनमें से 80 नंबर साइबर अपराध की शिकायतों से कैसे जुड़े। करीब 13 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी और 125 शिकायतों का कनेक्शन सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ना तय माना जा रहा है।

फिलहाल पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। अब डिजिटल साक्ष्यों की जांच और साइबर शिकायतों के विश्लेषण से इस पूरे नेटवर्क की अगली कड़ी सामने आने की उम्मीद है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

You may have missed