मणिपुर में फिर अशांति की आहट, हत्या के विरोध में तनाव, पुलिस ने चलाया सर्च ऑपरेशन
मणिपुर में हत्या के विरोध में बंद, तीसरा आरोपी गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता इंफाल। मणिपुर में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। थौबल जिले में लैशराम राकेश की गोली लगने से हुई मौत के विरोध में 23 अक्टूबर की सुबह 5 बजे से 48 घंटे का बंद शुरू हो गया है। जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ने इस बंद का आह्वान करते हुए हत्या में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-102 पर आवाजाही रोकने की कोशिश की और कुछ जगहों पर टायर जलाकर विरोध जताया।
इस बीच मणिपुर पुलिस ने मामले में तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। वहीं, मणिपुर के खांगाबोक-सांगाईयुम्फाम इलाके में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान एक डबल बैरल बंदूक और 12-गेज के 14 कारतूस बरामद किए गए हैं। हथियार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी है। पुलिस और सुरक्षा बल किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए सतर्क हैं।
मणिपुर में हत्या के विरोध में 48 घंटे का बंद
मणिपुर के थौबल जिले में राकेश की मौत के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। इसी के विरोध में JAC ने 23 अक्टूबर सुबह 5 बजे से दो दिनों के बंद की घोषणा की। कमेटी का कहना है कि हत्या में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
मणिपुर बंद के दौरान खांगाबोक के प्रदर्शनकारी इम्फाल-मोरेह रोड पर जुटे। कई स्थानों पर सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई और टायर जलाकर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में तेजी से कार्रवाई करने की मांग की है।
हालांकि, बंद के दौरान मेडिकल सेवाओं, मीडिया और धार्मिक गतिविधियों को छूट दी गई है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल बंद के दौरान किसी बड़ी अप्रिय मणिपुर घटना की सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी है, ताकि विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके।
मणिपुर पुलिस ने तीसरे आरोपी को किया गिरफ्तार
लैशराम राकेश की हत्या के मामले में पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी पहचान अरिबाम शेरखान के रूप में हुई है। वह थौबल जिले के सांगाईयुम्फाम पार्ट-1 के मैरेनखुन इलाके का निवासी बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।
इससे पहले पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनकी पहचान 19 वर्षीय मोहम्मद खुर्शीद अहमद और 45 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल रहमान उर्फ अपिक के रूप में हुई है। दोनों थौबल जिले के सांगाईयुम्फाम इलाके के रहने वाले बताए गए हैं।
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मणिपुर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 18 अक्टूबर की रात हुई गोलीबारी में किसकी क्या भूमिका थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद जांच पूरी नहीं हुई है। घटना के पीछे की परिस्थितियों और गोली चलने के क्रम का पता लगाने के लिए पुलिस साक्ष्य जुटा रही है।
सर्च ऑपरेशन में बंदूक और 14 कारतूस बरामद
मणिपुर पुलिस ने 23 अक्टूबर को खांगाबोक-सांगाईयुम्फाम इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक डबल बैरल ब्रीच-लोडिंग (DBBL) बंदूक और 12-गेज के 14 कारतूस बरामद किए गए। पुलिस बरामद हथियार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसका हत्या के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
हथियार की बरामदगी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन अभी यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि इसी बंदूक का इस्तेमाल राकेश पर गोली चलाने में हुआ था। इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
सर्च ऑपरेशन का उद्देश्य मामले से जुड़े सबूत जुटाने के साथ-साथ इलाके में अवैध हथियारों की मौजूदगी का पता लगाना भी है। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है, जब हत्या के विरोध में बंद और प्रदर्शन के कारण क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
JAC ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
राकेश की मौत के बाद जॉइंट एक्शन कमेटी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कमेटी के प्रतिनिधियों ने 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह को ज्ञापन सौंपकर हत्या में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी।
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JAC का कहना है कि जांच की प्रगति से वह संतुष्ट नहीं है। कमेटी चाहती है कि पुलिस मामले में तेजी से कार्रवाई करे और दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाए। इसी मांग को लेकर बंद बुलाया गया है।
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का एक प्रमुख कारण यह है कि घटना के बाद कई दिन बीतने के बावजूद सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट नहीं हुई थी। अब तीसरी गिरफ्तारी के बाद भी कमेटी की मुख्य मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उसका जोर सभी संबंधित लोगों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने पर है।
मणिपुर में गोलीबारी की घटना से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला 18 अक्टूबर की रात हुई गोलीबारी से जुड़ा है। घटना थौबल पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में पल्लि बाजार के पास खांगाबोक और सांगाईयुम्फाम के निकट हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, वहां एक संगीत कार्यक्रम के दौरान अफरा-तफरी मची और गोली लगने से लैशराम राकेश की मौत हो गई। वह 26 वर्ष के थे।
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स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया कि कार्यक्रम के दौरान विवाद बढ़ने के बाद पत्थरबाजी और गोली चलने की घटना हुई। हालांकि, पूरे घटनाक्रम और गोली चलाने की परिस्थितियों की जांच जारी है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। कुछ स्थानों पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचने और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई थीं।

राकेश की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया और पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। इसी घटनाक्रम के बाद JAC का गठन हुआ और मामले में कार्रवाई तेज करने के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ा।
दूसरी हिंसक घटना से भी बढ़ी चिंता
थौबल की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब मणिपुर में हाल के दिनों में अन्य हिंसक घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। 19 अक्टूबर को इम्फाल ईस्ट से जुड़ी एक अलग घटना में तीन मैतेई लोगों की मौत और तीन अन्य के घायल होने की रिपोर्ट आई थी। इस मामले में भी सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों की पहचान को लेकर सवाल उठे।
इन घटनाओं को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शन और बंद की स्थिति बनी है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं की जांच को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखा जाना जरूरी है। किसी एक घटना के लिए जिम्मेदारी तय होने से पहले आरोपों और दावों की पुष्टि जांच एजेंसियों को करनी होगी।
मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में किसी भी नई हिंसक घटना के बाद हालात बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अफवाहों और बदले की कार्रवाई को रोकने की भी चुनौती है।
थौबल में सुरक्षा बढ़ी, स्थिति पर पुलिस की नजर
48 घंटे का बंद शुरू होने के बाद थौबल जिला पुलिस अलर्ट पर है। पुलिस और सुरक्षा बल इलाके में निगरानी कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा न भड़के। आम लोगों से भी शांति बनाए रखने और अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपेक्षा की जा रही है।
फिलहाल मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी जांच के अहम पड़ाव हैं। लेकिन JAC की मांग है कि राकेश की हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाए। पुलिस की अगली कार्रवाई और फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बरामद हथियार का घटना से कोई संबंध है या नहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का भरोसा बहाल होगा और थौबल में तनाव कम हो पाएगा। आने वाले 48 घंटे प्रशासन के लिए अहम हैं। बंद के दौरान शांति बनाए रखना, जरूरी सेवाओं को जारी रखना और मामले की निष्पक्ष जांच करना ही स्थिति को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
