कैमूर में 80 लाख की शराब बरामद, कंटेनर में छिपी थी 592 पेटी, चालक गिरफ्तार
कैमूर में कंटेनर से 592 पेटी शराब बरामद, चालक गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (कैमूर)। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद दूसरे राज्यों से अवैध शराब पहुंचाने का सिलसिला पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। शराब तस्कर लगातार नए तरीकों से बड़ी मात्रा में शराब बिहार लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में कैमूर जिले में उत्पाद विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मिनी कंटेनर ट्रक से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है।
कैमूर के मोहनिया चेकपोस्ट पर हुई इस कार्रवाई में 592 पेटियों में रखी कुल 5,310 लीटर शराब जब्त की गई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। कैमूर की कार्रवाई के दौरान कंटेनर चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस और उत्पाद विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतनी बड़ी शराब की खेप के पीछे कौन लोग और कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।
कैमूर में चेकिंग के दौरान पकड़ा गया मिनी कंटेनर
कैमूर में उत्पाद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मोहनिया चेकपोस्ट पर वाहनों की जांच के दौरान टीम को एक मिनी कंटेनर ट्रक पर संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को रोककर उसकी तलाशी शुरू की गई। शुरुआती जांच के बाद कंटेनर के अंदर छिपाकर रखी गई शराब की पेटियां सामने आईं।
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जब अधिकारियों ने कंटेनर को पूरी तरह खंगाला तो उसमें बड़ी संख्या में शराब की पेटियां मिलीं। गिनती करने पर कुल 592 पेटियां बरामद हुईं। इनमें मौजूद शराब की कुल मात्रा 5,310 लीटर बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद विभाग की टीम ने तत्काल वाहन को जब्त कर लिया और चालक को हिरासत में ले लिया।
80 लाख रुपये की शराब बरामद होने से बढ़ी जांच
कैमूर में बरामद शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है। यह मात्रा सामान्य स्तर की तस्करी से काफी बड़ी मानी जा रही है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब सिर्फ चालक से पूछताछ तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने में जुट गई हैं।
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कैमूर के अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी खेप को बिहार के किसी एक स्थान तक पहुंचाने के लिए पहले से परिवहन और डिलीवरी की व्यवस्था की गई होगी। इसलिए शराब कहां से लोड हुई, रास्ते में किन लोगों से संपर्क किया गया और बिहार में इसे किसे सौंपा जाना था, जैसे सवाल जांच का हिस्सा बन गए हैं।
हरियाणा के चालक की हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार चालक की पहचान हरियाणा के चरखी दादरी जिले के चरखी गांव निवासी 28 वर्षीय अक्षय कुमार, पिता मनेश के रूप में हुई है। पूछताछ में चालक ने प्रारंभिक तौर पर बताया कि शराब की खेप चंडीगढ़ से लोड की गई थी।
आरोपी के अनुसार, इस शराब को बिहार के सुपौल पहुंचाया जाना था। हालांकि, जांच एजेंसियां चालक के बयान की अलग-अलग स्तर पर पुष्टि करने में जुटी हैं। अधिकारियों के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि चालक को किसने शराब लोड कराई थी और सुपौल में खेप लेने वाला व्यक्ति या गिरोह कौन था।
चंडीगढ़ से सुपौल तक शराब तस्करी की जांच
शराब बरामदगी के बाद जांच का दायरा अब चंडीगढ़ से बिहार के सुपौल तक पहुंच गया है। उत्पाद विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि शराब की खेप चंडीगढ़ में कहां से उठाई गई थी और उसे बिहार भेजने की व्यवस्था किसने की थी।
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इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कंटेनर को किस व्यक्ति ने उपलब्ध कराया था और चालक को इस पूरे परिवहन के लिए किससे निर्देश मिल रहे थे। यदि पूछताछ और तकनीकी जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
मोबाइल और संपर्कों की भी होगी जांच
गिरफ्तार चालक से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन और संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी खंगाल रही हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि यात्रा के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और शराब की डिलीवरी को लेकर किससे बातचीत हुई थी।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सुपौल में खेप प्राप्त करने वाला व्यक्ति कौन था। अगर उस व्यक्ति या गिरोह की पहचान होती है तो शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
कैमूर चेकपोस्ट पर निगरानी से तस्करों पर शिकंजा
कैमूर बिहार के प्रवेश मार्गों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की जांच के लिए चेकपोस्ट और अन्य निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मोहनिया चेकपोस्ट पर हुई यह कार्रवाई शराब तस्करी रोकने के लिए वाहन जांच की भूमिका को भी सामने लाती है।
उत्पाद विभाग के अनुसार, संदिग्ध वाहनों की जांच लगातार की जा रही है। खासकर ऐसे वाहनों पर नजर रखी जाती है जिनमें सामान के नाम पर छिपाकर अवैध सामग्री ले जाने की आशंका होती है। कंटेनर जैसे बड़े वाहनों की तलाशी में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
शराबबंदी के बावजूद जारी है तस्करी की चुनौती
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर कानूनी रोक है। इसके बावजूद पड़ोसी और दूसरे राज्यों से अवैध शराब पहुंचाने की कोशिशें समय-समय पर सामने आती रही हैं। तस्कर शराब को बिहार तक पहुंचाने के लिए ट्रक, कंटेनर और अन्य वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे मामलों में सिर्फ शराब जब्त करना ही जांच का अंतिम चरण नहीं होता। इसके पीछे काम करने वाले सप्लायर, परिवहनकर्ता और डिलीवरी नेटवर्क की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होता है। कैमूर की इस कार्रवाई के बाद भी जांच इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
मोहनिया चेकपोस्ट पर 592 पेटी शराब की बरामदगी के बाद अब उत्पाद विभाग और पुलिस की निगाहें पूरे नेटवर्क पर हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि गिरफ्तार चालक से मिली जानकारी के आधार पर शराब की खेप के स्रोत और संभावित खरीदारों तक पहुंचा जाए।
चालक की गिरफ्तारी और शराब की जब्ती के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है। बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने के कारण यह मामला अब केवल एक वाहन की तस्करी तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछे मौजूद संगठित नेटवर्क की पड़ताल पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज कुमार की रिपोर्ट
