बिहार बाढ़ पर तेजस्वी का केंद्र पर हमला, बोले- राष्ट्रीय आपदा घोषित कर…आर्थिक सहायता करे मोदी सरकार

बाढ़

तेजस्वी यादव ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित किसानों को 15 हजार रुपये सहायता देने की मांग की।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार बाढ़ राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के साथ प्रभावित किसानों और आम लोगों के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की।

तेजस्वी यादव इससे पहले भी बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग कर चुके हैं। 7 सितंबर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 5,000 करोड़ रुपये के तत्काल राहत पैकेज की मांग की थी। उनके पत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत, बचाव और पुनर्वास से जुड़ी कई मांगें रखी गई थीं।

बाढ़ और सुखाड़ से जनता परेशान: तेजस्वी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में एक तरफ कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं, तो दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में सुखाड़ जैसी स्थिति बनी हुई है। उनके मुताबिक, दोनों परिस्थितियों का असर किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने राज्य की NDA सरकार पर राहत कार्यों को लेकर सवाल उठाए और केंद्र से भी अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

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तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं और कई परिवारों को भोजन, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जरूरत है।

पटना में तेजस्वी ने राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने राहत व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आपदा की स्थिति में शुरू किए गए कम्युनिटी किचन कुछ ही दिनों में बंद कर दिए गए और राहत शिविरों को भी बंद किया गया। उनका सवाल था कि जब बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, तो राहत व्यवस्था को लगातार जारी क्यों नहीं रखा गया।

उन्होंने आपदा के समय इस्तेमाल होने वाले फंड को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बजट में आपदा प्रभावित लोगों के लिए चार प्रतिशत राशि का प्रावधान किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस राशि में से कितनी रकम वास्तव में बाढ़ और अन्य आपदा से प्रभावित लोगों की मदद में खर्च की गई।

हालांकि, बजट में चार प्रतिशत राशि और राहत फंड के इस्तेमाल को लेकर तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है। सरकार की ओर से इस दावे पर प्रतिक्रिया मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

बाढ़ राहत को लेकर केंद्र से मांगा जवाब

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से बाढ़ राहत को लेकर भी कई सवाल किए। उन्होंने PM CARES Fund से बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दी गई राशि की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि बिहार के लिए कितनी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

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तेजस्वी ने बिहार से केंद्र में प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रियों और NDA के सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या वे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और कृषि मंत्री से बिहार आने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की मांग कर सकते हैं।

बिहार बाढ़ पर 5000 करोड़ की मांग पहले भी रख चुके हैं

बिहार बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग तेजस्वी यादव पहले भी कर चुके हैं। 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में उन्होंने बाढ़ के लिए 5,000 करोड़ रुपये की तत्काल केंद्रीय सहायता की मांग की थी। उन्होंने राहत, बचाव और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज देने की बात कही थी।

तेजस्वी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और एयर ड्रॉपिंग जैसी व्यवस्था की मांग भी रखी थी। उस समय सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने किसानों और मजदूरों के लिए भी विशेष राहत की मांग की थी।

किसानों के लिए 15 हजार रुपये की सहायता की मांग

तेजस्वी यादव ने सरकार के सामने किसानों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि सुखाड़ से प्रभावित प्रत्येक किसान को 15 हजार रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। इसी तरह बाढ़ से प्रभावित किसानों को भी 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग उन्होंने की।

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उनका कहना है कि बाढ़ और सुखाड़ दोनों ही परिस्थितियों में किसानों को फसल और आजीविका का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में तत्काल आर्थिक सहायता मिलने से प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिल सकती है।

पीएम मोदी के जन्मदिन कार्यक्रम पर भी निशाना

तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि बिहार के कई लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

यह दावा तेजस्वी यादव की ओर से सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए किया गया। इस मुद्दे पर उनकी टिप्पणी पहले भी सामने आई थी, जिसमें उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों की जरूरतों के बीच दीया जलाने के कार्यक्रम पर खर्च को लेकर सवाल उठाया था।

केंद्र की टीम के दौरे पर भी सवाल

बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने बिहार आई केंद्रीय टीम को लेकर भी तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय टीम बिहार आई, स्थिति का जायजा लिया और लौट गई, लेकिन प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त सहायता नहीं मिली।

वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार केंद्र की टीम ने बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। केंद्र की ओर से सहायता का आश्वासन दिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

सुखाड़ का भी आकलन कराने की मांग

तेजस्वी यादव ने केंद्र से बिहार में सुखाड़ की स्थिति का भी आकलन कराने के लिए टीम भेजने की मांग की। उनका कहना है कि राज्य के कुछ हिस्सों में बाढ़ तो कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी और कृषि संकट जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से प्रभावित किसानों की स्थिति का आकलन कर तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष राहत पैकेज देने की मांग को दोहराया।

फिलहाल बाढ़ राहत और आर्थिक सहायता को लेकर तेजस्वी यादव की मांगों पर राजनीतिक बहस जारी है। उनकी प्रमुख मांगों में बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना, 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज और प्रभावित किसानों को 15 हजार रुपये की सहायता शामिल है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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