चिराग को ट्रांसजेंडर बताया तो….मांझी भड़के, कहा- ये निंदनीय, कठोर कार्रवाई करें सरकार

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चिराग पासवान पर टिप्पणी से विवाद, मांझी ने सरकार से कार्रवाई मांगी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। चिराग पासवान के विवाद ने बिहार की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड से जुड़े डॉ. राजन सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लैंगिक पहचान को लेकर टिप्पणी पर सियासी प्रतिक्रिया तेज हो गई है।

वीडियो में राजन सिंह ने चिराग पासवान को ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ा होने का दावा किया। इस बयान के सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आपत्ति जताते हुए बिहार सरकार से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मांझी ने सोमवार, 21 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी टैग किया।

चिराग पासवान पर टिप्पणी से कैसे शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला डॉ. राजन सिंह के एक पुराने मीडिया इंटरव्यू और उसके वीडियो अंश से जुड़ा बताया जा रहा है। इसमें उन्होंने चिराग पासवान के ट्रांसजेंडर और एलजीबीटी समुदाय के साथ संबंधों का जिक्र करते हुए उनकी लैंगिक पहचान को लेकर दावा किया था।

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राजन सिंह ने बातचीत के दौरान चिराग पासवान द्वारा किन्नर और एलजीबीटी समुदाय के समर्थन की चर्चा की। इसी क्रम में उन्होंने चिराग को खुद किन्नर समुदाय से होने की बात कही। हालांकि, यह राजन सिंह का दावा है और उपलब्ध रिपोर्टों में इस दावे की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

मांझी ने चिराग के समर्थन में क्या कहा

वीडियो सामने आने के बाद जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी केंद्रीय मंत्री के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। मांझी ने बिहार सरकार से मामले को गंभीरता से लेने और कार्रवाई करने की मांग की।

मांझी ने अपनी पोस्ट में चिराग पासवान को केंद्रीय कैबिनेट में अपना सहयोगी बताया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग रखी। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

चिराग पासवान को लेकर पहले भी कर चुके हैं दावे

यह पहली बार नहीं है जब राजन सिंह के बयानों में चिराग पासवान का जिक्र आया है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर प्रस्तावित मंदिर को लेकर भी उन्होंने कई दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि प्रस्तावित मंदिर के एक द्वार पर चिराग पासवान की प्रतिमा लगाने की योजना है।

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राजन सिंह ने इसके पीछे चिराग पासवान द्वारा ट्रांसजेंडर और एलजीबीटी समुदाय के समर्थन को वजह बताया था। इस मंदिर से जुड़े उनके कई दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मंदिर निर्माण, जमीन और प्रतिमाओं को लेकर भी कई बातें कही थीं।

चिराग और मांझी के बीच पहले से चल रही है बयानबाजी

चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच हाल के महीनों में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। खास तौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बयान चर्चा में रहे हैं।

अगस्त 2026 में चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के मंत्री पद से इस्तीफे की मांग की थी। इसके बाद मांझी खेमे की ओर से भी चिराग पासवान पर पलटवार किया गया। संतोष सुमन ने कहा था कि अगर इस्तीफे की बात है तो पहले चिराग पासवान को इस्तीफा देना चाहिए।

आरक्षण के मुद्दे पर क्या था विवाद

दरअसल, आरक्षण में क्रीमी लेयर और एससी-एसटी वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग मत सामने आए थे। मांझी ने आरक्षण के लाभ को अधिक वंचित तबकों तक पहुंचाने के संदर्भ में क्रीमी लेयर की समीक्षा की बात कही थी।

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दूसरी ओर, चिराग पासवान ने आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर को लेकर आपत्ति जताई थी और इसी मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी तेज हुई। इस दौरान चिराग की ओर से मांझी और संतोष सुमन के इस्तीफे की मांग भी सामने आई थी।

अब चिराग मामले में सरकार से कार्रवाई की मांग

ताजा विवाद में मांझी ने राजनीतिक मतभेद से अलग व्यक्तिगत टिप्पणी के स्तर पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि वायरल वीडियो में कही गई बातें संबंधित व्यक्ति का दावा हैं। चिराग पासवान की लैंगिक पहचान को लेकर लगाए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है। इसलिए राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत दावे के बीच अंतर रखना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस

मांझी की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने मांझी के बयान पर सवाल उठाए और पूछा कि ट्रांसजेंडर होना अपने आप में गलत या अपमानजनक क्यों माना जाए। वहीं, अन्य प्रतिक्रियाओं में केंद्रीय मंत्री के बारे में निजी और व्यक्तिगत टिप्पणी किए जाने का विरोध किया गया।

इस तरह मामला केवल दो नेताओं की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लैंगिक पहचान, सार्वजनिक जीवन में व्यक्तिगत टिप्पणियों और राजनीतिक मर्यादा को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।

आगे क्या होगा, सरकार के रुख पर नजर

अब निगाह इस बात पर है कि बिहार सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में सरकार की ओर से इस मांग पर किसी अंतिम कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

बिहार की राजनीति में पहले से आरक्षण जैसे मुद्दों पर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। ऐसे में यह नया विवाद दोनों नेताओं से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में एक और अध्याय जोड़ता है। हालांकि, इस मामले में वायरल वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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