बिहार में गरीब परिवारों पर नहीं लगेगा टैक्स, CM सम्राट चौधरी ने साफ किया सरकार का प्लान

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बिहार में गरीब परिवारों पर नहीं लगेगा टैक्स

निष्कर्ष भारत संवाददाता, पटना। बिहार में गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों पर टैक्स को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा गरीब लोगों पर कर लगाने की नहीं है। पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार का फोकस गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व जुटाने पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों पर नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा, जबकि पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए सक्षम व्यावसायिक संस्थानों से कर वसूली की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री का यह बयान बिहार में पंचायत स्तर पर टैक्स व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है। हाल के महीनों में गांवों में होल्डिंग टैक्स और अन्य शुल्क को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी थी। सरकार की ओर से पहले भी स्पष्ट किया गया है कि गरीब परिवारों को नए कर के बोझ से बचाने का उद्देश्य है।

गरीब परिवारों से टैक्स नहीं लेने की बात

पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायतों की आर्थिक स्थिति और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि गांवों में रहने वाले गरीब लोगों पर कर लगाने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।

मुख्यमंत्री ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि पंचायतों के पास पर्याप्त संसाधन होंगे तो गांवों में सड़क, सफाई, पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

पंचायतों की कमाई बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार की योजना पंचायतों को ज्यादा आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व मिलना चाहिए। रिपोर्टों के मुताबिक ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां इस दायरे में आ सकती हैं।

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इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली आर्थिक गतिविधियों से पंचायतों को आय उपलब्ध कराना है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए पंचायतों के पास अपने संसाधन भी मौजूद रहें।

गांवों में टैक्स को लेकर क्यों हुआ विवाद?

बिहार में ग्राम पंचायतों को कर लगाने का अधिकार देने के फैसले के बाद गांवों में टैक्स व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हुई थी। जुलाई 2026 में बिहार कैबिनेट ने ग्राम पंचायतों से संबंधित कर, दर एवं शुल्क नियमावली को मंजूरी दी थी। इसके बाद ग्रामीण इलाकों में घरों और अन्य संपत्तियों पर संभावित टैक्स को लेकर सवाल उठे।

इसी बीच मुख्यमंत्री की ओर से गरीब परिवारों पर टैक्स नहीं लगाने की बात कही गई। इससे सरकार ने यह संदेश दिया कि पंचायतों की आय बढ़ाने की व्यवस्था का उद्देश्य गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं है।

किन गतिविधियों से पंचायतों को मिल सकता है राजस्व?

सरकार की ओर से पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों को टैक्स व्यवस्था के दायरे में लाने पर जोर दिया गया है। इनमें ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक संस्थान शामिल हो सकते हैं।

ऐसी व्यवस्था के पीछे तर्क यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कारोबार करने वाली व्यावसायिक इकाइयों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल स्थानीय विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जा सके।

हालांकि, किस श्रेणी पर कितना कर या शुल्क लागू होगा, यह संबंधित नियमों और स्थानीय निकायों की व्यवस्था के अनुसार तय होगा। इसलिए गरीब परिवारों पर टैक्स नहीं लगने की मुख्यमंत्री की घोषणा को सभी प्रकार के शुल्कों से सार्वभौमिक छूट के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि पंचायतों के पास अपने संसाधन बढ़ेंगे तो विकास योजनाओं को लागू करने में उन्हें अधिक वित्तीय क्षमता मिलेगी।

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बिहार सरकार पहले से ही पंचायत स्तर पर विकास और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार, प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस आयोजित करने का फैसला लिया गया है, जिसका उद्देश्य गांव स्तर पर विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

गरीबों पर टैक्स को लेकर क्या है सरकार का संदेश?

मुख्यमंत्री के ताजा बयान का मुख्य संदेश यह है कि पंचायतों की आय बढ़ाने की कोशिश गरीब परिवारों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालकर नहीं की जाएगी। इसके बजाय सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व जुटाने पर जोर दे रही है।

वहीं, पंचायतों की टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद अलग-अलग श्रेणी के मकान, कारोबार और अन्य परिसंपत्तियों पर लागू होने वाले कर और शुल्क की वास्तविक स्थिति संबंधित नियमों के अनुसार स्पष्ट होगी।

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फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान के बाद गांवों में गरीब परिवारों पर टैक्स को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है। सरकार का जोर एक तरफ गरीब परिवारों को कर के अतिरिक्त बोझ से बचाने और दूसरी तरफ पंचायतों के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने पर है।

Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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