गंडक ने तोड़ा जलस्तर का रिकॉर्ड, 91.25 मीटर पहुंचा पानी; दो जगह चंपारण तटबंध क्षतिग्रस्त
गंडक नदी का जलस्तर बगहा में रिकॉर्ड 91.25 मीटर पहुंच गया
निष्कर्ष भारत संवाददाता- बिहार में गंडक नदी का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिम चंपारण समेत डाउनस्ट्रीम इलाकों में तटबंधों पर भारी दबाव बना हुआ है। इसी बीच बगहा गेज स्थल पर गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे अधिक जलस्तर है। यह 2024 में दर्ज 90.90 मीटर के पिछले रिकॉर्ड से 0.35 मीटर अधिक है।
स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें लगातार तटबंधों की निगरानी और मरम्मत कार्य में जुटी हैं।
दो जगह चंपारण तटबंध हुआ क्षतिग्रस्त
28 और 29 सितंबर की मध्यरात्रि के दौरान पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के बाएं तट पर बने चंपारण तटबंध को दो स्थानों पर नुकसान पहुंचा। इनमें बगहा-1 प्रखंड का खैरतवा गांव और बैरिया प्रखंड का फुलियाखाड़ गांव शामिल हैं।
गंडक के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के कारण तटबंध पर दबाव बढ़ता गया। खैरतवा के पास तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से आसपास के इलाकों की ओर बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई।
पहले ही 169 संवेदनशील जगहों को किया गया सुरक्षित
जल संसाधन विभाग के मुताबिक गंडक नदी में अत्यधिक जलश्राव के कारण कई जगह तटबंधों पर सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति बनती रही।
अब तक 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या सामने आई, जिन पर तत्काल कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित किया गया। विभाग की टीमें लगातार संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बनाए हुए हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक नदी के जलस्तर और बहाव में बदलाव को देखते हुए तटबंधों की लगातार निगरानी जरूरी है।
चार विशेष दल बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजे गए
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग के मुख्यालय से रात में ही चार विशेष दल रवाना किए गए। इन टीमों को बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजा गया है।
इन दलों की जिम्मेदारी तटबंधों की स्थिति का निरीक्षण करने, कमजोर स्थानों पर तत्काल बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने और स्थानीय टीमों के साथ समन्वय करने की है।
क्षेत्रीय अभियंता भी मौके पर लगातार मौजूद रहकर बाढ़ से बचाव के काम में जुटे हुए हैं। इससे पहले भी अप्रत्याशित जलश्राव को देखते हुए अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती की गई थी।
कुशीनगर में भी तटबंध को नुकसान
गंडक के बढ़े जलस्तर का असर बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश के हिस्से में भी दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी के दाएं तट पर बने तटबंध को भी एक स्थान पर नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
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बिहार के पश्चिम चंपारण जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पानी के प्रभाव को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
वाल्मीकिनगर बराज से 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश का असर गंडक के प्रवाह पर पड़ा। 28 सितंबर की सुबह वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी का अधिकतम डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार बराज पर करीब 13 घंटे तक पानी का प्रवाह 5 लाख क्यूसेक से अधिक और लगभग 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से ऊपर रहा।
इस पानी का असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे डाउनस्ट्रीम जिलों में पड़ रहा है।
2024 का रिकॉर्ड भी टूटा
गंडक के जलस्तर में इस बार एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बना है। 2024 में वाल्मीकिनगर बराज से अधिकतम करीब 5.62 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज हुआ था। इस बार बराज से अधिकतम डिस्चार्ज उससे कुछ कम रहा, लेकिन बगहा गेज पर नदी का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर चला गया।
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बगहा में 91.25 मीटर का जलस्तर दर्ज किया गया, जबकि 2024 में यहां अधिकतम जलस्तर 90.90 मीटर था। यानी इस बार पिछला रिकॉर्ड 0.35 मीटर टूट गया।
डाउनस्ट्रीम जिलों में बढ़ी निगरानी
गंडक का पानी आगे बढ़ने के साथ डाउनस्ट्रीम जिलों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। पश्चिम चंपारण के कई प्रखंडों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव की गतिविधियां भी चल रही हैं।
राज्य सरकार की ओर से भी तटबंधों की लगातार निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर रात्रि गश्त और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बाढ़ की स्थिति की निगरानी करते हुए अधिकारियों से लगातार अपडेट लेने और सतर्कता बनाए रखने को कहा है।
जलस्तर घटने के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं
गंडक बराज पर अधिकतम डिस्चार्ज के बाद पानी का प्रवाह कम होने लगा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डाउनस्ट्रीम इलाकों में तत्काल राहत मिल गई है। बराज से छोड़े गए पानी को निचले इलाकों तक पहुंचने में समय लगता है।
इसी वजह से तटबंधों पर दबाव और नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल विभाग की टीमें कमजोर स्थानों पर बचाव कार्य तेज करने और किसी भी नई क्षति की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
