जंतर-मंतर पर CJP का तंज, दीपके बोले- अब नहीं डरेंगे, पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर
जंतर-मंतर पर CJP का तंज, अभिजीत दीपके बोले- पूरा देश बनेगा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। दिल्ली में जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस निर्णय पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उन्होंने इस फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि जंतर-मंतर को पहले ही विरोध-प्रदर्शन के लिए मुश्किल जगह बना दिया गया था। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए निर्धारित स्थल के रूप में चुना है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद होने के बाद दीपके का बयान
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले के बाद अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया चर्चा में है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “उन्होंने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। हां, अब यह प्रदर्शन स्थल नहीं रहा। वैसे भी, कायर तानाशाह ने इसे युद्धक्षेत्र में बदल दिया था। अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!”
दीपके का यह बयान दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर हुए बदलाव की आलोचना के तौर पर सामने आया है। उन्होंने अपने संदेश के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने से विरोध की आवाज समाप्त नहीं होगी।
हालांकि, “युद्धक्षेत्र” और “तानाशाह” जैसे शब्द दीपके की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा हैं। इन्हें प्रशासनिक फैसले के स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि उनकी प्रतिक्रिया और आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए।
जंतर-मंतर की जगह अब कहां होंगे आंदोलन?
दिल्ली पुलिस के नए आदेश के अनुसार, राजधानी में धरना-प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं।
रामलीला मैदान पहले भी राजनीतिक रैलियों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों का केंद्र रहा है। बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को भी अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, इन तीनों जगहों पर प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP अलग से जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रदर्शन आयोजित करने की शर्तों और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
ऐसे में प्रदर्शन करने वाले संगठनों को नए नियमों, अनुमति की प्रक्रिया और निर्धारित स्थलों से संबंधित निर्देशों का पालन करना होगा।
गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर फैसला
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। समिति को नागरिकों के धरना-प्रदर्शन के अधिकार के लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
दिल्ली पुलिस ने इसी सिफारिश के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया है। नए आदेश के तहत तीन अन्य स्थानों को प्रदर्शन के लिए चिह्नित किया गया है।
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इस फैसले को समझने के लिए दो पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। पहला, राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात का प्रबंधन प्रशासन की जिम्मेदारी है। दूसरा, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का अधिकार नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।
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इसलिए नई व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शनकारियों को वैकल्पिक स्थलों पर अपनी बात रखने के लिए कितनी सुविधा मिलती है और अनुमति की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट रहती है।
जंतर-मंतर क्यों रहा है आंदोलन का प्रमुख केंद्र?
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक आंदोलनों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां विभिन्न संगठनों, किसानों, पूर्व सैनिकों, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं।

वर्ष 2012 में निर्भया मामले के बाद महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर हुए आंदोलन ने देशव्यापी चर्चा पैदा की थी। पूर्व सैनिकों ने वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर भी आंदोलन किया। वर्ष 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कृषि संकट से जुड़ी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
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इसके अलावा, किसान आंदोलन के दौरान यहां किसान संसद आयोजित की गई थी। वर्ष 2023 में भारतीय कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए धरना दिया था। इन घटनाओं ने जंतर-मंतर को देश के प्रमुख विरोध स्थलों में शामिल किया।
जंतर-मंतर की विशेषता यह रही है कि यहां अपेक्षाकृत छोटे समूह भी अपनी मांगों को मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचाने का प्रयास करते रहे हैं।
नए प्रदर्शन स्थलों से क्या बदलेगा?
जंतर-मंतर की जगह तीन नए निर्धारित प्रदर्शन स्थल तय होने से दिल्ली में आंदोलन आयोजित करने की व्यवस्था बदल सकती है। संगठनों को अब अपने कार्यक्रमों की योजना नए स्थानों और उनसे जुड़ी शर्तों के अनुसार बनानी होगी।
रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वहां पहुंचने, सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और मीडिया तक अपनी बात पहुंचाने की सुविधाएं कैसी रहती हैं।
प्रदर्शनकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नए स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति किस प्रक्रिया से मिलेगी और कितनी संख्या में लोगों को एकत्र होने की अनुमति होगी। संशोधित SOP जारी होने के बाद इन पहलुओं पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
वहीं, प्रशासन के सामने चुनौती यह रहेगी कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए भी व्यावहारिक अवसर उपलब्ध रहें।
‘पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर’ बयान के मायने
अभिजीत दीपके का बयान केवल जंतर-मंतर के स्थान परिवर्तन तक सीमित नहीं है। इसे विरोध और नागरिक आवाज से जुड़े व्यापक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है। उनके कथन का आशय है कि आंदोलन की अभिव्यक्ति किसी एक निर्धारित स्थान तक सीमित नहीं रह सकती।
हालांकि, यह बयान CJP संस्थापक की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि देशव्यापी आंदोलन शुरू हो चुका है या आगे निश्चित रूप से ऐसा होगा।
फिलहाल, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय लागू हो चुका है और तीन वैकल्पिक स्थलों की घोषणा की गई है। अब सबकी नजर संशोधित SOP, प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े नियमों और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों की अगली प्रतिक्रिया पर रहेगी।
दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों की यह नई व्यवस्था आने वाले समय में किस तरह काम करती है, इसका आकलन सुरक्षा प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों को मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर किया जा सकेगा।
राज कुमार की रिपोर्ट
