जीविका के 20 साल पर JDU का पटना में कार्यक्रम, नीतीश भी हुए शामिल, निशांत ने दिया बड़ा संदेश

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पटना में JDU का जीविका के 20 साल पर कार्यक्रम, नीतीश और निशांत शामिल

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। गांधी जयंती के मौके पर पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (JDU) प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में ‘नीतीश संवाद’ के तहत ‘जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बड़ी संख्या में जीविका दीदियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर केंद्रित कर दिया।

JDU के कार्यक्रम में जीविका के दो दशक के सफर, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक भूमिका में आए बदलाव पर चर्चा हुई। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा समेत पार्टी के कई नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। आयोजन के जरिए जीविका को बिहार में महिला सशक्तिकरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने रखा गया।

JDU के मंच से महिला सशक्तिकरण पर जोर

JDU के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने गांधी जयंती के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्र भारत के निर्माण को लेकर समाज के सामने एक स्पष्ट दृष्टि रखी थी। निशांत कुमार ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति और उनके लिए उपलब्ध अवसरों को लेकर बिहार में पिछले दो दशकों के बदलाव का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार में महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर पर्याप्त नहीं थे। उनके अनुसार, 2005 के बाद राज्य में सुशासन के साथ महिला सशक्तिकरण को भी नीतिगत प्राथमिकता दी गई। इसी क्रम में महिलाओं को स्थानीय शासन में आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों का विस्तार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने जैसी पहल को आगे बढ़ाया गया।

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JDU के निशांत कुमार ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी को अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने गांधी के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें स्त्री और पुरुष को समाज रूपी गाड़ी के दो पहियों के तौर पर देखा गया है। उनका कहना था कि दोनों की समान भागीदारी के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता।

जीविका ने बदली ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भूमिका

बिहार में जीविका कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2006 में ग्रामीण गरीब परिवारों को संगठित करने और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के उद्देश्य से हुई थी। इसका मूल मॉडल महिलाओं को छोटे-छोटे समूहों में संगठित कर बचत, बैंकिंग, ऋण और आजीविका के अवसरों तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर आधारित रहा है। BRLPS के अनुसार, जीविका के तहत स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है।

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शुरुआत में सीमित दायरे वाला यह कार्यक्रम धीरे-धीरे बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तृत नेटवर्क में बदल गया। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को केवल बचत और ऋण व्यवस्था से नहीं जोड़ा गया, बल्कि कृषि, पशुपालन, डेयरी, बकरी पालन, छोटे कारोबार और अन्य आजीविका गतिविधियों के अवसर भी उपलब्ध कराए गए।

JDU ने जीविका के 20 साल को बनाया संवाद का आधार

‘नीतीश संवाद’ के तहत आयोजित JDU के कार्यक्रम में जीविका की यात्रा को केवल एक सरकारी योजना के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में आए बदलाव के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। JDU नेताओं ने जीविका से जुड़ी महिलाओं की उपलब्धियों और उनकी आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार में वर्तमान में 10,49,411 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1 करोड़ 81 लाख से अधिक महिलाएं जीविका से जुड़ी हैं। बिहार सरकार के अनुसार, 30 लाख से अधिक ‘लखपति दीदी’ भी तैयार हुई हैं। यह आंकड़ा बताता है कि स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क अब ग्रामीण महिलाओं के लिए बचत और ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि आय बढ़ाने वाली गतिविधियों का माध्यम भी बन चुका है।

बैंकिंग और रोजगार से जुड़ाव ने बढ़ाया दायरा

जीविका मॉडल की एक प्रमुख विशेषता महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना रही है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए सामूहिक बचत, आंतरिक ऋण और बैंक ऋण तक पहुंच का ढांचा विकसित किया गया। BRLPS के दस्तावेजों के अनुसार, जीविका के समूहों ने ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सेवाओं और आजीविका के अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ([Brlps][3])

इस मॉडल में स्वयं सहायता समूहों को गांव और क्लस्टर स्तर की संस्थाओं से जोड़कर उनका नेटवर्क तैयार किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में भागीदार के रूप में विकसित करना रहा है। यही वजह है कि जीविका के विस्तार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामूहिक निर्णय क्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का दायरा भी बढ़ा है।

JDU कार्यक्रम में ‘लखपति दीदी’ मॉडल की चर्चा

कार्यक्रम में जीविका से जुड़ी महिलाओं की उपलब्धियों को भी प्रमुखता से रखा गया। ‘लखपति दीदी’ की अवधारणा इसी बदलाव का एक उदाहरण है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के जरिए अपनी आय को बढ़ाने में सफल हुई हैं।

बिहार सरकार के अनुसार, जीविका से जुड़ी महिलाओं की संख्या 1.81 करोड़ से अधिक है। इससे ग्रामीण बिहार में महिला स्वयं सहायता समूहों के बड़े सामाजिक और आर्थिक नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जीविका की कहानी केवल आंकड़ों की नहीं

जीविका के 20 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बिहार में महिला रोजगार और स्वयं सहायता समूहों को लेकर कई योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में भी महिलाओं के रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिखाई देता है।

इस लिहाज से जीविका के दो दशक का सफर बिहार के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार के साथ यह चुनौती भी बनी हुई है कि महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि हो, उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिले और बैंकिंग एवं प्रशिक्षण सुविधाओं की पहुंच लगातार मजबूत होती रहे।

पटना के JDU कार्यालय में आयोजित ‘जीविका के 20 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम इसी लंबे सफर को राजनीतिक और सामाजिक संवाद के केंद्र में लाने का प्रयास रहा। कार्यक्रम में जीविका दीदियों की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि ग्रामीण महिलाओं का संगठित नेटवर्क अब बिहार की सामाजिक और आर्थिक चर्चा का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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