नौकरी और रोजगार के मुद्दे पर MLC चुनाव को जीत लेंगे PK, प्रचार में खास फोकस, विपक्ष की परेशानी बढ़ी
बिहार MLC चुनाव में प्रशांत किशोर ने रोजगार और शिक्षकों के सातवें वेतनमान को मुद्दा बनाया, जीत पर 10 हजार युवाओं को नौकरी का वादा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले MLC चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले विभिन्न दलों और उम्मीदवारों ने अपने-अपने मुद्दों के साथ मतदाताओं के बीच पहुंचना शुरू कर दिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार में रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है।
प्रशांत किशोर ने अलग-अलग MLC के चुनावी कार्यक्रमों और नामांकन सभाओं में कहा है कि जिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जन सुराज के उम्मीदवार जीतेंगे, वहां 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने की पहल की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिलाने का वादा किया है। इन घोषणाओं के जरिए जन सुराज ने रोजगार और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को अपने MLC चुनाव अभियान के केंद्र में रखा है।
MLC चुनाव में रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दा
बिहार की राजनीति में रोजगार और पलायन लंबे समय से प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रशांत किशोर ने विधान परिषद चुनाव में स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार के सवाल को प्रमुखता से उठाया है।
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20 सितंबर को उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान उन्होंने कहा था कि जन सुराज के उम्मीदवार जिस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीतेंगे, वहां 10 हजार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पार्टी और विजयी उम्मीदवार की होगी। बाद में तिरहुत क्षेत्र में उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान भी उन्होंने इसी घोषणा को दोहराया।
यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने वाला वर्ग सीधे तौर पर शिक्षित मतदाताओं से जुड़ा है। ऐसे में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, निजी क्षेत्र में अवसर और पलायन जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बन रहे हैं।
MLC में शिक्षकों के लिए सातवें वेतनमान का वादा
MLC चुनाव में रोजगार के साथ प्रशांत किशोर ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को भी अपने अभियान में विशेष स्थान दिया है। उन्होंने कहा है कि जन सुराज के उम्मीदवारों की जीत के बाद शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी। मुजफ्फरपुर में तिरहुत शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान उन्होंने इसे लेकर स्पष्ट राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि अगर वह शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने में सफल नहीं हुए तो भविष्य में वोट मांगने नहीं आएंगे। यह बयान शिक्षक मतदाताओं के बीच उनके अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है। हालांकि, सातवें वेतन आयोग का लाभ दिलाना केवल किसी एक विधान परिषद सदस्य के निर्णय से पूरा होने वाला विषय नहीं है। इसके लिए सरकार, वित्तीय प्रावधान और संबंधित नीतिगत प्रक्रिया की भूमिका भी होगी।
जनसुराज का MLC चुनाव अभियान किस दिशा में?
जन सुराज ने बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव को लेकर अपना अभियान तेज किया है। पार्टी के उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रमों में प्रशांत किशोर स्वयं शामिल हो रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं से संवाद कर रहे हैं।
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तिरहुत स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान भी प्रशांत किशोर मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने रोजगार, पलायन और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने MLC चुनाव को सरकार बनाने या गिराने के बजाय सरकार को जवाबदेह बनाने और नीतियों पर निगरानी रखने वाला चुनाव बताया।
जाति और धर्म से ऊपर मुद्दों पर वोट की अपील
प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी भाषणों में स्नातक और शिक्षक मतदाताओं से जाति और धर्म के बजाय उम्मीदवार के काम और मुद्दों के आधार पर मतदान करने की अपील की है। उनका जोर इस बात पर है कि विधान परिषद के चुनाव में मतदाता शिक्षा, रोजगार और क्षेत्र से जुड़े सवालों को प्राथमिकता दें।

उनके इस अभियान में रोजगार का मुद्दा लगातार दिखाई दे रहा है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी उन्होंने 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य बताया था। अब विधान परिषद चुनाव में इसी तरह की घोषणा को अलग-अलग स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से जोड़ा गया है।
MLC चुनाव में आठ सीटों पर मुकाबला
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव होना है, उनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें पटना, दरभंगा, कोसी और तिरहुत स्नातक क्षेत्र तथा संबंधित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होना है।
इन चुनावों में आम विधानसभा चुनाव से अलग मतदाता व्यवस्था होती है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित योग्यता रखने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पात्र शिक्षक मतदाता वोट डालते हैं। इसलिए उम्मीदवारों के लिए सामान्य जनसभाओं के साथ-साथ संबंधित मतदाता समूहों तक सीधे पहुंच बनाना महत्वपूर्ण होता है।
MLC चुनाव में PK के सामने चुनौती क्या है?
रोजगार और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर घोषणाओं के बावजूद चुनावी नतीजा कई कारकों पर निर्भर करेगा। उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, मतदाता सूची, संगठन की पहुंच, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच समर्थन, अन्य दलों के प्रत्याशी और स्थानीय मुद्दे चुनाव की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
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जन सुराज के लिए यह चुनाव अपने संगठनात्मक विस्तार को परखने का भी अवसर है। पार्टी पहली बार इन विधान परिषद सीटों पर व्यापक स्तर पर चुनावी मुकाबले में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है। दूसरी ओर भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल भी अपने उम्मीदवारों और रणनीति के साथ मैदान में हैं। भाजपा ने चार सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है।
रोजगार के वादे पर बढ़ी चुनावी बहस
प्रशांत किशोर की 10 हजार नौकरियों की घोषणा के बाद रोजगार का मुद्दा MLC चुनाव की राजनीतिक बहस में और प्रमुख हुआ है। इस घोषणा को लेकर भाजपा, जदयू और राजद की ओर से राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
हालांकि, इस घोषणा का वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि जन सुराज ने चुनाव प्रचार की अपनी रणनीति में रोजगार, शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े सवालों को केंद्रीय मुद्दा बनाया है।
23 अक्टूबर को मतदान के साथ यह तय होगा कि स्नातक और शिक्षक मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों को कितना समर्थन मिलता है। फिलहाल प्रशांत किशोर की घोषणाओं ने बिहार के MLC चुनाव में रोजगार और शिक्षक हितों को चुनावी चर्चा के प्रमुख विषयों में जरूर ला दिया है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
