पटना में डेंगू का बढ़ा खतरा, 18 दिन में मिले 100 से ज्यादा मरीज, अलर्ट जारी
पटना में डेंगू का कहर, सितंबर में 112 नए मरीज मिलने से बढ़ी चिंता
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राजधानी में डेंगू का संक्रमण सितंबर में तेजी से बढ़ता दिख रहा है। महीने के महज 18 दिनों में 112 नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अगस्त के पूरे महीने में 97 मरीज सामने आए थे, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा अभी ही उससे आगे निकल चुका है। इस सीजन में पटना में डेंगू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 279 हो गई है। लगातार नए मामले सामने आने के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और रोकथाम अभियान तेज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक पटना में डेंगू के 167 मरीज मिले थे। इसके बाद सितंबर के 18 दिनों में 112 नए मरीजों की पहचान हुई। इस तरह कुल संख्या 279 तक पहुंच गई है। पिछले तीन दिनों के आंकड़े भी संक्रमण की लगातार बनी हुई रफ्तार की ओर इशारा कर रहे हैं। 16, 17 और 18 सितंबर को हर दिन करीब 14 से 15 नए मरीज मिले हैं।
डेंगू ने सितंबर में पकड़ी तेज रफ्तार
पटना में इस साल डेंगू के मामले शुरुआती महीनों में अपेक्षाकृत कम थे। जनवरी से जून तक सिर्फ 44 मरीज सामने आए थे। जुलाई में 26 नए मरीज मिले और कुल संख्या 70 तक पहुंची। इसके बाद अगस्त में अचानक संक्रमण बढ़ा और एक ही महीने में 97 मरीज मिले।
अगस्त के अंत तक मरीजों की संख्या 167 हो गई थी। सितंबर शुरू होते ही संक्रमण की रफ्तार और तेज हो गई। सिर्फ 18 दिनों में 112 मरीज मिलने से सितंबर का आंकड़ा अगस्त से भी आगे निकल गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल रोजाना औसतन 10 से 15 नए मरीज सामने आ रहे हैं।
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डेंगू-मलेरिया विभाग के अधिकारी सुभाष प्रसाद ने इन आंकड़ों की पुष्टि की है। उनका कहना है कि लगातार नए मामलों पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं।
ट्रेंड बदला, अब रोज मिल रहे नए मरीज
डेंगू के मामलों में इस बार खास बात यह है कि संक्रमण की रफ्तार सितंबर में अचानक बढ़ी है। शुरुआती महीनों की तुलना में अब रोजाना मिलने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। पिछले तीन दिनों में लगातार 14 से 15 मरीजों का सामने आना स्वास्थ्य विभाग के लिए निगरानी बढ़ाने का संकेत है।
पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में होने वाली जांच से भी मरीजों की पहचान हो रही है। उपलब्ध आंकड़ों में निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच के दौरान सामने आए मरीजों को भी शामिल किया जा रहा है।
इससे शहर में संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में स्वास्थ्य विभाग को मदद मिल रही है। वहीं, लगातार बढ़ते मामलों के कारण लोगों को मच्छरों से बचाव और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है।
डेंगू प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से प्रभावित इलाकों में रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। मरीज मिलने वाले क्षेत्रों में फॉगिंग के साथ एंटी-लार्वा अभियान भी चलाया जा रहा है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर वहां लार्वीसाइडल दवा का छिड़काव किया जा रहा है।

अभियान का उद्देश्य डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लार्वा को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करना है। अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों से नए मरीजों की जानकारी मिल रही है, वहां स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
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बारिश के बाद जमा पानी को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। खाली प्लॉट, निर्माणाधीन स्थल, नालियां और घरों के आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। ऐसे स्थानों को खत्म करना संक्रमण रोकने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डेंगू के सबसे ज्यादा मामले इन इलाकों में
पटना के बांकीपुर, कंकड़बाग और पाटलिपुत्र इलाके इस साल डेंगू के अधिक मामलों वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर और बाईपास क्षेत्र से भी मरीज सामने आए हैं।
शहर के अलग-अलग हिस्सों में मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के सामने चुनौती सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों की पहचान के साथ आसपास के इलाकों में भी मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच की जा रही है।
बारिश के बाद कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति बनती है। इसके अलावा खाली जमीन और निर्माण स्थलों पर लंबे समय तक पानी जमा रहने से भी मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है। यही कारण है कि सितंबर में संक्रमण बढ़ने के पीछे मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है।
बारिश के बाद क्यों बढ़ता है डेंगू का खतरा?
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है। घरों के आसपास रखे पुराने बर्तन, टायर, गमले, कूलर, छतों पर जमा पानी और अन्य छोटे कंटेनर भी इसके प्रजनन स्थल बन सकते हैं। बारिश के बाद जब कई जगह पानी जमा रहता है और उसे समय पर हटाया नहीं जाता, तो मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि सिर्फ बड़े जलजमाव को खत्म करना पर्याप्त नहीं माना जाता। घर और आसपास के छोटे जलस्रोतों की नियमित सफाई भी जरूरी है।
पटना में सितंबर के दौरान डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच लोगों से अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की जा रही है।
मरीज बढ़े तो अस्पतालों पर भी बढ़ेगा दबाव
सितंबर में मरीजों की संख्या बढ़ने का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों में डेंगू की जांच कराने वालों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में बुखार और डेंगू जैसे लक्षण वाले मरीजों की समय पर जांच और चिकित्सकीय निगरानी जरूरी हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में निजी संस्थानों से मिले मरीजों को शामिल किए जाने से संक्रमण की तस्वीर पहले की तुलना में व्यापक रूप से सामने आ रही है। विभाग अब प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
279 मरीजों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
पटना में इस सीजन डेंगू के 279 मरीज मिलने के बाद सितंबर सबसे अधिक संक्रमण वाला महीना बन गया है। अगस्त में 97 मरीज मिले थे, जबकि सितंबर के 18 दिनों में 112 मामले सामने आ चुके हैं। रोजाना नए मरीज मिलने का सिलसिला जारी रहने से आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से फॉगिंग, एंटी-लार्वा अभियान और प्रभावित इलाकों में निगरानी की जा रही है। दूसरी ओर, डेंगू का संक्रमण रोकने में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ आम लोगों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण है। घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, मच्छरों से बचाव करना और लगातार बुखार जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने की दिशा में जरूरी कदम हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
