पत्रकार से मारपीट मामले में बड़ा एक्शन, सदर अस्पताल से हटाए गए एसके आजाद, विभाग ने मुख्यालय बुलाया

सदर अस्पताल

सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट पर दो डॉक्टरों पर एक्शन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (सहरसा)। जिले के सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट और सीसीटीवी फुटेज मिटाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। विभाग ने सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार आजाद (एसके आजाद) और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोशन लाल को उनके वर्तमान पद से हटा दिया है। दोनों चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, पटना में योगदान देने का आदेश दिया गया है।

12 सितंबर को हुई इस घटना के बाद मामला लगातार चर्चा में था। अस्पताल परिसर में पत्रकार के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कराई थी। इसके साथ ही घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को डिलीट किए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दोनों चिकित्सकों के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

सदर अस्पताल में ग्राउंड रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे पत्रकार

मामला उस समय का है, जब मध्याह्न भोजन खाने के बाद बीमार हुए स्कूली बच्चों को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के लिए एक डिजिटल न्यूज के पत्रकार अस्पताल पहुंचे थे।

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बताया गया कि अस्पताल परिसर में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार और अस्पताल के कुछ चिकित्सकों व कर्मियों के बीच विवाद हुआ। पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार आजाद, डॉ. रोशन लाल और अन्य कर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की।

घटना के बाद इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज हुई और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू की गई।

सदर अस्पताल में सीसीटीवी फुटेज मिटाने के आरोप से बढ़ी गंभीरता

मारपीट के आरोप के साथ ही अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ और फुटेज मिटाने का मामला भी सामने आया। आरोप लगाया गया कि घटना से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को डिलीट कर दिया गया, जिससे मामले से जुड़े साक्ष्य प्रभावित हो सकते थे।

सीसीटीवी फुटेज किसी भी अस्पताल परिसर में हुई घटना की जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने या उसके साथ छेड़छाड़ के आरोप ने प्रशासनिक जांच का दायरा बढ़ा दिया।

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जिला प्रशासन ने इसी पहलू समेत पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया। जांच के दौरान घटना के वीडियो, अस्पताल की व्यवस्था और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई।

सदर अस्पताल मामले में डीएम ने गठित की जांच टीम

घटना की गंभीरता को देखते हुए सहरसा के जिला पदाधिकारी दीपेश कुमार ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की। डीडीसी की अगुवाई में गठित टीम को पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।

जांच टीम ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद लोगों, उपलब्ध साक्ष्यों और सीसीटीवी से संबंधित जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया गया।

जांच पूरी होने के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को सौंप दी। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई।

जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि की बात

जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट में दोनों चिकित्सकों के खिलाफ लगाए गए मारपीट, दुर्व्यवहार और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ से जुड़े आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई।

रिपोर्ट के आधार पर जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग से दोनों चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की। इसके बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर पहुंचा, जहां उपलब्ध जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक अनुशंसा के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि मामले को विभाग ने गंभीरता से लिया है। हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई अपने आप में किसी आपराधिक मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं मानी जाती।

सदर अस्पताल से मुख्यालय बुलाए गए दोनों चिकित्सक

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम प्राधिकार की मंजूरी से स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव उपेन्द्र राम ने दोनों चिकित्सकों के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया।

आदेश के अनुसार, डॉ. सुशील कुमार आजाद और डॉ. रोशन लाल को उनके वर्तमान पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। दोनों को स्वास्थ्य विभाग, बिहार मुख्यालय, पटना में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

इस कार्रवाई के बाद सहरसा सदर अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की स्थिति बन गई है। प्रभारी अधीक्षक के पद से हटाए जाने के बाद अस्पताल के संचालन को लेकर आगे की व्यवस्था विभागीय स्तर पर तय की जाएगी।

सदर अस्पताल में घटना के बाद मचा था हड़कंप

सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद सहरसा सदर अस्पताल में मामला तेजी से चर्चा में आया था। घटना ऐसे समय हुई थी, जब अस्पताल में मध्याह्न भोजन खाने के बाद बीमार हुए स्कूली बच्चों का इलाज चल रहा था।

बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना को लेकर अस्पताल में पहले से ही लोगों की आवाजाही और मीडिया की मौजूदगी थी। इसी दौरान पत्रकार के साथ विवाद और मारपीट का मामला सामने आया।

वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कराई। सीसीटीवी फुटेज से जुड़े आरोपों ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया।

पत्रकारों की सुरक्षा और अस्पताल व्यवस्था पर भी सवाल

इस घटना ने अस्पतालों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर मरीजों, परिजनों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और पत्रकारों के बीच समन्वय जरूरी होता है।

किसी घटना की रिपोर्टिंग के दौरान विवाद की स्थिति बनने पर भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना अपेक्षित है। प्रशासनिक जांच का उद्देश्य भी पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाना था।

इस मामले में जिला प्रशासन की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई की है। अब आगे की प्रक्रिया विभागीय आदेश और संबंधित अधिकारियों के योगदान के बाद तय होगी।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से बदला माहौल

दोनों चिकित्सकों को मुख्यालय बुलाए जाने के आदेश के बाद सहरसा के स्वास्थ्य और प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। सदर अस्पताल में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा है।

मामले में विभागीय कार्रवाई का आधार जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकार की मंजूरी को बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अधिकारियों को तत्काल वर्तमान पद से हटाकर मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया है।

अब आगे यह देखना होगा कि अस्पताल की प्रशासनिक जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाती है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल पत्रकार से मारपीट और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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