बिहार-UP की फेमस सहजन की सब्जी के हैं इतने फायदे, जानकर चौंक जाएंगे!
सहजन को क्यों कहा जाता है पोषण का खजाना
निष्कर्ष भारत संवाददाता- सहजन यानी मोरिंगा का पेड़ भारत के कई हिस्सों में आसानी से देखने को मिलता है। इसकी फलियों से बनने वाली सब्जी खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल में काफी पसंद की जाती है। दक्षिण भारत में इसका इस्तेमाल सांभर और दूसरी डिशेज में भी खूब किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ सहजन को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ के तौर पर भी जाना जाता है।
मोरिंगा की खास बात यह है कि इसकी पत्तियां, फलियां, फूल और बीज अलग-अलग तरह से खाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसकी पत्तियों का पाउडर भी बाजार में उपलब्ध है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प मानने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा समझना चाहिए।
पोषक तत्वों से भरपूर है सहजन
सहजन की पत्तियों और फलियों में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व शामिल हैं।
इसके अलावा मोरिंगा की पत्तियों में कई विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पौष्टिक आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
सहजन की फली की सब्जी है स्वादिष्ट
भारत में सहजन की सबसे लोकप्रिय चीज इसकी फली है। बिहार, यूपी और बंगाल सहित कई राज्यों में इसकी सब्जी बनाई जाती है। इसे हल्के मसालों के साथ पकाकर रोटी या चावल के साथ खाया जा सकता है।
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सहजन की फली पकाने से पहले उसके बाहरी रेशों को निकालना जरूरी होता है। इससे इसे खाना आसान हो जाता है। ज्यादा देर तक पकाने की बजाय इसे उचित समय तक पकाना बेहतर माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक तेज गर्मी देने से कुछ पोषक तत्वों की मात्रा कम हो सकती है।
पत्तियों का पाउडर भी है लोकप्रिय
मोरिंगा की पत्तियों को सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जाता है। आजकल यह पाउडर हेल्थ और न्यूट्रिशन से जुड़े उत्पादों के रूप में भी आसानी से मिल जाता है।

इसे दाल, सूप, सब्जी या दूसरे खाद्य पदार्थों में थोड़ी मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी सप्लीमेंट या हर्बल पाउडर को जरूरत से ज्यादा लेना सही नहीं है।
इम्यूनिटी के लिए क्यों चर्चा में है मोरिंगा?
मोरिंगा की पत्तियों में विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। ये शरीर को जरूरी पोषण उपलब्ध कराने में मदद करते हैं और सामान्य इम्यून सिस्टम के कामकाज में भूमिका निभाते हैं।
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हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी बीमारी की दवा या ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ के रूप में इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। केवल मोरिंगा के सेवन से किसी बीमारी से बचाव या इलाज की गारंटी नहीं होती।
पाचन के लिए भी उपयोगी हो सकता है
सहजन की पत्तियों में फाइबर मौजूद होता है। संतुलित मात्रा में फाइबर वाला भोजन पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद कर सकता है।
इसी वजह से मोरिंगा की पत्तियों को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। वजन नियंत्रित करने के लिए हालांकि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।
सहजन से बनाया जाता है सूप
सहजन की फलियों और पत्तियों से सूप भी तैयार किया जाता है। गर्म सूप स्वादिष्ट होने के साथ डाइट में सब्जियों और अन्य पोषक तत्वों को शामिल करने का एक तरीका हो सकता है।
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सहजन के फूलों का इस्तेमाल भी कई जगहों पर पकौड़े और दूसरी पारंपरिक डिश बनाने में किया जाता है। यानी इस पेड़ के कई हिस्सों को खाने में अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल में सावधानी जरूरी
मोरिंगा को लेकर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर संभावित प्रभाव को लेकर कई शोध हुए हैं, लेकिन इसे डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
जो लोग नियमित रूप से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दूसरी बीमारियों की दवा लेते हैं, उन्हें मोरिंगा पाउडर या किसी हर्बल सप्लीमेंट को नियमित रूप से शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
सहजन को डाइट में कैसे शामिल करें?
सहजन को खाने का सबसे आसान तरीका इसकी फली की सब्जी है। इसके अलावा पत्तियों को सब्जी, दाल या सूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पत्तियों का पाउडर भी सीमित मात्रा में भोजन में मिलाया जा सकता है।
ध्यान रखें कि मोरिंगा पौष्टिक भोजन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे किसी एक बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है। संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी, नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ इसे डाइट में शामिल करना ज्यादा बेहतर तरीका है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
