टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा: नोएल टाटा से मतभेद के बीच बड़ा फैसला, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी
एन चंद्रशेखरन
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) से कुछ दिन पहले आया है।
चंद्रशेखरन के इस्तीफे को टाटा ग्रुप के लिए बड़ा नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके दोबारा कार्यकाल को लेकर टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच पिछले कई महीनों से सहमति नहीं बन पा रही थी। टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में बेहद अहम है।
18 अगस्त की AGM से पहले क्यों लिया गया फैसला?
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। इससे पहले उनके अगले कार्यकाल को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी। फरवरी 2026 में बोर्ड स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर सर्वसम्मत समर्थन नहीं बन पाया। इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका।
अब 18 अगस्त की AGM से पहले एन चंद्रशेखरन ने दोबारा पांच साल का कार्यकाल मांगने के बजाय मौजूदा कार्यकाल पूरा करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि टाटा जैसे बड़े समूह के लिए भविष्य की लीडरशिप को लेकर समय रहते स्पष्टता होना जरूरी है।
एन चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश टाटा ट्रस्ट्स के संबंधित बोर्डों और बाद में टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी तथा बोर्ड स्तर पर की गई थी। हालांकि, बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच मतभेद
इस पूरे घटनाक्रम में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा एन चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल को लेकर कुछ शर्तों और बदलावों के पक्ष में थे। इनमें नए कारोबारों में निवेश, ग्रुप की वित्तीय स्थिति और कुछ रणनीतिक फैसलों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
खास तौर पर एयर इंडिया और दूसरे नए कारोबारों में भारी निवेश तथा कुछ कंपनियों में बढ़ते घाटे को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि, इन मतभेदों को लेकर टाटा समूह की ओर से विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।
टाटा संस की मालिकाना संरचना इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाती है। टाटा समूह के मुताबिक, टाटा संस की 66 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी परोपकारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है। यही वजह है कि चेयरमैन के चयन और रणनीतिक दिशा में ट्रस्ट्स की राय महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में बदला टाटा ग्रुप
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और एमडी रह चुके थे। उन्हें रतन टाटा के बाद समूह के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख पेशेवरों में गिना गया।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि वह टाटा परिवार से बाहर के पहले चेयरमैन थे। उनसे पहले साइरस मिस्त्री भी टाटा परिवार से बाहर के व्यक्ति के तौर पर टाटा संस के चेयरमैन रहे थे।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ कई नए और रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। एयर इंडिया का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार इस रणनीति के प्रमुख उदाहरण हैं।
वित्तीय आंकड़े भी उनके कार्यकाल के विस्तार को दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2026 में टाटा ग्रुप की कुल कंपनियों का संयुक्त राजस्व करीब ₹16.24 लाख करोड़ रहा, जबकि कुल मुनाफा करीब ₹1.71 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2026 में राजस्व सालाना आधार पर 7.8 फीसदी और मुनाफा 51.9 फीसदी बढ़ा।
टाटा ग्रुप के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में समूह की कंपनियों का कुल राजस्व 180 अरब डॉलर से अधिक था और समूह की कंपनियां 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं।
नए कारोबारों में निवेश बना चुनौती
चंद्रशेखरन के नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत टाटा ग्रुप को भविष्य के कारोबारों के लिए तैयार करना रही। लेकिन यही रणनीति अब समूह के भीतर चर्चा का विषय भी बनी हुई है।
सेमीकंडक्टर फैब, बैटरी निर्माण, एयर इंडिया के विस्तार और अन्य नए कारोबारों में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया गया है। दूसरी तरफ, एयर इंडिया समेत कुछ नए कारोबारों में घाटे ने निवेश और पूंजी आवंटन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा संस के FY26 नतीजों में कंपनी का मुनाफा बढ़ा, लेकिन एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अग्रतास जैसे कारोबारों में नुकसान भी दर्ज हुआ।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आते ही टाटा समूह की कई प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, TCS में करीब 4 फीसदी और टाटा मोटर्स में करीब 2.5 फीसदी तक गिरावट आई, जबकि टाटा स्टील और टाइटन में भी कमजोरी रही।
निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन से समूह की भविष्य की रणनीति, पूंजी निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स की दिशा पर क्या असर पड़ेगा।
अब आगे क्या होगा?
एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे। इसका मतलब है कि टाटा ग्रुप के पास नए चेयरमैन की तलाश और नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी के लिए कुछ समय मौजूद है।
टाटा संस के अगले चेयरमैन का चयन समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि नए नेतृत्व को एक साथ कई चुनौतियों से निपटना होगा—एयर इंडिया का एकीकरण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाएं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, TCS की बदलती तकनीकी चुनौतियां और समूह के भीतर पूंजी आवंटन।
टाटा ग्रुप की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, टाटा संस समूह की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। समूह में 31 कंपनियां हैं और इसका कारोबार 100 से अधिक देशों में फैला है।
इस लिहाज से एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा केवल एक चेयरमैन के पद छोड़ने की खबर नहीं है। यह भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है। अब सभी की नजर 18 अगस्त की AGM और उसके बाद शुरू होने वाली नए चेयरमैन की तलाश पर होगी।Tata Sons Chairman N Chandrasekaran Resigns: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। हालांकि, वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) से कुछ दिन पहले आया है।
चंद्रशेखरन के इस्तीफे को टाटा ग्रुप के लिए बड़ा नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके दोबारा कार्यकाल को लेकर टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच पिछले कई महीनों से सहमति नहीं बन पा रही थी। टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में बेहद अहम है।
18 अगस्त की AGM से पहले क्यों लिया गया फैसला?
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। इससे पहले उनके अगले कार्यकाल को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी। फरवरी 2026 में बोर्ड स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर सर्वसम्मत समर्थन नहीं बन पाया। इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका।
अब 18 अगस्त की AGM से पहले चंद्रशेखरन ने दोबारा पांच साल का कार्यकाल मांगने के बजाय मौजूदा कार्यकाल पूरा करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि टाटा जैसे बड़े समूह के लिए भविष्य की लीडरशिप को लेकर समय रहते स्पष्टता होना जरूरी है।
चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश टाटा ट्रस्ट्स के संबंधित बोर्डों और बाद में टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी तथा बोर्ड स्तर पर की गई थी। हालांकि, बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच मतभेद
इस पूरे घटनाक्रम में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल को लेकर कुछ शर्तों और बदलावों के पक्ष में थे। इनमें नए कारोबारों में निवेश, ग्रुप की वित्तीय स्थिति और कुछ रणनीतिक फैसलों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
खास तौर पर एयर इंडिया और दूसरे नए कारोबारों में भारी निवेश तथा कुछ कंपनियों में बढ़ते घाटे को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि, इन मतभेदों को लेकर टाटा समूह की ओर से विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।
टाटा संस की मालिकाना संरचना इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाती है। टाटा समूह के मुताबिक, टाटा संस की 66 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी परोपकारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है। यही वजह है कि चेयरमैन के चयन और रणनीतिक दिशा में ट्रस्ट्स की राय महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में बदला टाटा ग्रुप
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और एमडी रह चुके थे। उन्हें रतन टाटा के बाद समूह के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख पेशेवरों में गिना गया।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि वह टाटा परिवार से बाहर के पहले चेयरमैन थे। उनसे पहले साइरस मिस्त्री भी टाटा परिवार से बाहर के व्यक्ति के तौर पर टाटा संस के चेयरमैन रहे थे।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ कई नए और रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। एयर इंडिया का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार इस रणनीति के प्रमुख उदाहरण हैं।
वित्तीय आंकड़े भी उनके कार्यकाल के विस्तार को दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2026 में टाटा ग्रुप की कुल कंपनियों का संयुक्त राजस्व करीब ₹16.24 लाख करोड़ रहा, जबकि कुल मुनाफा करीब ₹1.71 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2026 में राजस्व सालाना आधार पर 7.8 फीसदी और मुनाफा 51.9 फीसदी बढ़ा।
टाटा ग्रुप के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में समूह की कंपनियों का कुल राजस्व 180 अरब डॉलर से अधिक था और समूह की कंपनियां 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं।
नए कारोबारों में निवेश बना चुनौती
चंद्रशेखरन के नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत टाटा ग्रुप को भविष्य के कारोबारों के लिए तैयार करना रही। लेकिन यही रणनीति अब समूह के भीतर चर्चा का विषय भी बनी हुई है।
सेमीकंडक्टर फैब, बैटरी निर्माण, एयर इंडिया के विस्तार और अन्य नए कारोबारों में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया गया है। दूसरी तरफ, एयर इंडिया समेत कुछ नए कारोबारों में घाटे ने निवेश और पूंजी आवंटन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा संस के FY26 नतीजों में कंपनी का मुनाफा बढ़ा, लेकिन एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अग्रतास जैसे कारोबारों में नुकसान भी दर्ज हुआ।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आते ही टाटा समूह की कई प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, TCS में करीब 4 फीसदी और टाटा मोटर्स में करीब 2.5 फीसदी तक गिरावट आई, जबकि टाटा स्टील और टाइटन में भी कमजोरी रही।
निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन से समूह की भविष्य की रणनीति, पूंजी निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स की दिशा पर क्या असर पड़ेगा।
अब आगे क्या होगा?
एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे। इसका मतलब है कि टाटा ग्रुप के पास नए चेयरमैन की तलाश और नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी के लिए कुछ समय मौजूद है।
टाटा संस के अगले चेयरमैन का चयन समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि नए नेतृत्व को एक साथ कई चुनौतियों से निपटना होगा—एयर इंडिया का एकीकरण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाएं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, TCS की बदलती तकनीकी चुनौतियां और समूह के भीतर पूंजी आवंटन।
टाटा ग्रुप की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, टाटा संस समूह की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। समूह में 31 कंपनियां हैं और इसका कारोबार 100 से अधिक देशों में फैला है।
इस लिहाज से एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा केवल एक चेयरमैन के पद छोड़ने की खबर नहीं है। यह भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है। अब सभी की नजर 18 अगस्त की AGM और उसके बाद शुरू होने वाली नए चेयरमैन की तलाश पर होगी
किट्टू सिंह की रिपोर्ट
