कटिहार के DM को लीगल नोटिस, मचा हडकंप, 15 दिन में एक्शन नहीं तो PIL, घरों में बह रहा कचरा, जानें पूरा मामला

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कटिहार DM को लीगल नोटिस, कचरा प्लांट पर 15 दिन का अल्टीमेटम

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (कटिहार/पटना)। कटिहार DM को लीगल नोटिस मिलने के बाद मनिहारी नगर पंचायत के ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र को लेकर मामला गरमा गया है। सामाजिक संस्था होपहेल्प फाउंडेशन की ओर से पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता सुमन कुमारी ने जिला पदाधिकारी को यह नोटिस भेजा है। नोटिस में प्रभावित इलाकों में फैले कचरे और दूषित पानी को हटाने के साथ प्लांट के संचालन पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।

नोटिस में कटिहार के DMको 15 दिनों का समय दिया गया है। इसमें कहा गया है कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका यानी PIL दायर की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में भी मामला ले जाने की चेतावनी दी गई है। मामले को लेकर मनिहारी और आसपास के प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

DM के सामने रखे गए गंभीर पर्यावरणीय सवाल

कटिहार के DM लीगल नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जिस स्थान पर ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र बनाया गया है, वह सरकारी रिकॉर्ड में खांता भूमि के रूप में दर्ज है। ऐसी जमीन गहरे गड्ढे और निचले स्तर वाली मानी जाती है, जहां जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

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DM को नोटिस के अनुसार, प्लांट निर्माण से पहले ही मनिहारी के कटिहार DM ने इस जमीन को लेकर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित रूप से चेतावनी दी थी। पत्र का ज्ञापांक 322 बताया गया है, जिसकी तारीख 15 फरवरी 2024 है। शिकायत पक्ष का कहना है कि अंचलाधिकारी ने जलभराव की आशंका जताते हुए इस जमीन पर प्लांट निर्माण को लेकर चेताया था। इसके बावजूद निर्माण आगे बढ़ाया गया।

CO की चेतावनी के बावजूद निर्माण का आरोप

नोटिस में दावा किया गया है कि कटिहार DM की चेतावनी के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने प्लांट का निर्माण कराया। इसके साथ ही बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से आवश्यक सहमति या NOC नहीं लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

इन आरोपों की पुष्टि अभी संबंधित प्रशासनिक और नियामक संस्थाओं की जांच से होनी बाकी है। लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड और पूर्व में जारी चेतावनी पत्र में बताए गए तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल जलभराव की समस्या तक सीमित नहीं रहेगा। यह प्रशासनिक निर्णय, पर्यावरणीय मानकों और ठोस कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया से जुड़े सवालों को भी सामने ला सकता है।

बारिश के बाद बढ़ी कचरा और पानी की समस्या

हाल की बारिश के बाद प्लांट परिसर में पानी भरने की बात सामने आई है। शिकायत में दावा किया गया है कि प्लांट में जमा ठोस कचरा बारिश के पानी के संपर्क में आने के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों तक फैल गया।

स्थानीय स्तर पर इसे लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी कई घरों और आंगन तक पहुंच गया है। इससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कचरे से निकलने वाले लीचेट के जमीन में जाने की आशंका भी जताई गई है। यदि ऐसा होता है तो आसपास के भूजल स्रोत प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, पानी या मिट्टी के दूषित होने की स्थिति की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए सरकारी स्तर पर नमूनों की जांच जरूरी होगी।

DM से मेडिकल कैंप और पानी की जांच की मांग

लीगल नोटिस में प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और सफाई अभियान चलाने की मांग की गई है। दूषित पानी और कचरे को रिहायशी इलाकों से हटाने के साथ प्रभावित लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

नोटिस में स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा पेयजल और मिट्टी के नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला में उनकी जांच कराने की मांग की गई है।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कचरे और दूषित पानी का आसपास के पर्यावरण तथा लोगों के इस्तेमाल किए जाने वाले जल स्रोतों पर कोई असर पड़ा है या नहीं।

DM से प्लांट बंद करने और शिफ्ट करने की मांग

कटिहार DM के शिकायत पक्ष ने खांता भूमि पर बने प्लांट को तत्काल बंद करने और सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा स्थान पर प्लांट होने के कारण बारिश के दौरान जलभराव और कचरा फैलने की समस्या गंभीर हो रही है।

इसके साथ ही जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है, जिन्होंने कथित तौर पर कटिहार DM की चेतावनी के बावजूद निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यदि प्रशासन की जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग

कटिहार DM को लीगल नोटिस में प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा देने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा भूजल को संभावित नुकसान से बचाने और प्रभावित जल स्रोतों के सुधार के उपाय करने को कहा गया है।

शिकायत पक्ष का कहना है कि यदि कचरे का लीचेट जमीन में रिस रहा है तो केवल सतही सफाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए पानी और मिट्टी की वैज्ञानिक जांच के साथ दीर्घकालिक सुधार योजना की जरूरत होगी। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वह तत्काल राहत के साथ-साथ प्लांट की वैधता, भूमि की प्रकृति और पर्यावरणीय अनुमति से जुड़े आरोपों की भी जांच करे।

पांच प्रमुख मांगों पर टिकी कानूनी कार्रवाई

लीगल नोटिस में मुख्य रूप से पांच तरह की मांगें रखी गई हैं। पहली मांग प्रभावित रिहायशी इलाकों से दूषित पानी और कचरा हटाने की है। दूसरी मांग स्वास्थ्य शिविर लगाने तथा पानी और मिट्टी की जांच कराने की है।

तीसरी मांग विवादित प्लांट को बंद कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की है। चौथी मांग उन अधिकारियों पर कार्रवाई की है, जिन पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। पांचवीं मांग प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और भूजल सुधार के उपाय करने की है। इन मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर अब लोगों की नजर है।

मामला हाईकोर्ट और NGT तक पहुंचने की चेतावनी

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 15 दिनों के भीतर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर मामला पटना हाईकोर्ट और NGT तक ले जाया जाएगा। जनहित याचिका के जरिए प्रभावित लोगों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को न्यायिक स्तर पर उठाने की तैयारी की बात कही गई है।

यह चेतावनी ऐसे समय दी गई है जब मनिहारी क्षेत्र में प्लांट और उसके आसपास जलभराव तथा कचरा फैलने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। इनके सही या गलत होने का निर्धारण संबंधित विभागों की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगा।

प्रशासनिक जांच से साफ होगी तस्वीर

इस पूरे मामले में अब कटिहार DM के सामने कई सवाल हैं। क्या प्लांट जिस जमीन पर बनाया गया है, वह वास्तव में सरकारी रिकॉर्ड में खांता भूमि है? क्या निर्माण से पहले अंचलाधिकारी ने आपत्ति जताई थी? क्या संबंधित पर्यावरणीय अनुमति और NOC प्राप्त की गई थी? बारिश के बाद कचरा और पानी किस स्तर तक प्रभावित इलाकों में पहुंचा और क्या भूजल पर इसका असर पड़ा? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

लीगल नोटिस के जरिए कटिहार DM को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया गया है। प्रशासन यदि समयसीमा के भीतर सफाई, राहत, जांच और प्लांट से जुड़े आरोपों पर प्रभावी कदम उठाता है तो विवाद को स्थानीय स्तर पर सुलझाने की राह बन सकती है। वहीं कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में मामला पटना हाईकोर्ट और NGT तक पहुंचने की संभावना है।

मनिहारी का यह विवाद अब केवल कचरा प्रबंधन का स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। भूमि, पर्यावरणीय सुरक्षा, जल स्रोतों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवालों के कारण आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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