पटना में फर्जी अफसर और पुलिसकर्मी गिरफ्तार, सचिवालय में नौकरी का देते थे झांसा, 2 शातिरों को पुलिस ने दबोचा
फर्जी अफसर बनकर सचिवालय में नौकरी का झांसा, दो शातिर गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। फर्जी अफसर बनकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले दो शातिरों को पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गुरुवार को सचिवालय थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस ने फर्जी अफसर के पास से पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अजय कुमार शक्ल और उसका साला राज कुमार शामिल हैं। आरोप है कि अजय खुद को स्वास्थ्य विभाग का अनुभाग अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करता था, जबकि राज कुमार को फर्जी पुलिस कांस्टेबल बनाकर उसके साथ रखा गया था।
सचिवालय में नौकरी दिलाने का देता था झांसा
पुलिस के मुताबिक, फर्जी अफसर अजय कुमार लोगों को सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। सरकारी विभाग में प्रभाव और ऊंचे पद का दावा कर वह लोगों को अपने विश्वास में लेने की कोशिश करता था। इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे पैसे लेने की बात सामने आई है।
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पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी अफसर ने कितने लोगों से संपर्क किया और कितने लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर रकम ली। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित ठगी में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
साले को बनाया था फर्जी पुलिसकर्मी
जांच के दौरान पुलिस के सामने आया कि अजय कुमार ने अपने साले राज कुमार को फर्जी पुलिस कांस्टेबल बना रखा था। पुलिस के अनुसार, दोनों अपनी कथित पहचान और वर्दी का इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव डालने के लिए करते थे।
फर्जी अफसर के साथ पुलिसकर्मी की भूमिका निभाने वाला राज कुमार भी पुलिस के रडार पर आया, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।
फर्जी अफसर के पास मिला पुलिस का सामान
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक और संदिग्ध सामान बरामद किए हैं। इनमें तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पुलिस की वर्दी, दो आईकार्ड, दो प्रशस्ति पत्र और स्टांप शामिल हैं।
पुलिस का मानना है कि बरामद सामान की जांच से आरोपियों की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। खासकर फर्जी पहचान पत्र और पुलिस की वर्दी को लेकर जांच की जा रही है कि इनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और किन लोगों को प्रभावित करने के लिए किया गया।
सचिवालय थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई पटना के सचिवालय थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद जांच आगे बढ़ाई गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। फर्जी अफसर के रूप में पहचान बनाने और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करने के आरोपों की अब विस्तृत जांच की जा रही है।

पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद जानकारी की भी पड़ताल कर रही है, ताकि कथित ठगी से जुड़े लोगों और लेनदेन की जानकारी सामने आ सके।
कितने लोगों को बनाया शिकार, जांच जारी
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित तौर पर कितने लोग इस जाल में फंसे। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य दस्तावेजों की जांच के जरिए संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है।
अगर जांच में नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से रकम लेने के साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने सरकारी विभागों के नाम और पदों का इस्तेमाल किस तरह किया।
फर्जी अफसर के नेटवर्क की तलाश
पुलिस अब सिर्फ दोनों गिरफ्तार आरोपियों तक जांच सीमित नहीं रखना चाहती। पूछताछ के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित फर्जीवाड़े में कोई और व्यक्ति मदद करता था या नहीं। मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिलने वाली जानकारी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस संभावित संपर्कों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल कर रही है।
फर्जी पहचान की आड़ में ठगी का आरोप
सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी के रूप में खुद को पेश करने से आम लोगों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कथित तरीके का इस्तेमाल कर आरोपियों ने लोगों को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
पुलिस के अनुसार, फर्जी अफसर की पहचान बनाकर लोगों से संपर्क करने और नौकरी का भरोसा दिलाने के मामले में सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। बरामद वर्दी, आईकार्ड और स्टांप इस जांच में अहम साक्ष्य हो सकते हैं।

सेंट्रल एसपी कर सकती हैं मामले का खुलासा
मामले में पटना की सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी की ओर से जल्द विस्तृत जानकारी दिए जाने की संभावना है। पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामद सामान से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फर्जी अफसर और फर्जी पुलिसकर्मी बनकर नौकरी दिलाने के कथित मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है। बरामद सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तारी पुलिस जांच का हिस्सा है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी। पुलिस का अगला फोकस कथित ठगी के पीड़ितों, आर्थिक लेनदेन और संभावित सहयोगियों की पहचान पर है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
