बिहार में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग तेज, सरकार पर बढ़ा दबाव, परिसीमन पर घिरी सम्राट सरकार
बिहार पंचायत चुनाव 2026 समय पर कराने की मांग, सरकार पर दबाव
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलचल बढ़ने लगी है। प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग अब तेज हो गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संघर्ष समिति ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार निर्धारित समय में चुनाव कराने की मांग की है। समिति का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और चुनाव में अनावश्यक देरी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगी।
पटना के आईएमए हॉल में समिति के अध्यक्ष जगन्नाथ चौपाल के नेतृत्व में हुई बैठक में पंचायत चुनाव, परिसीमन और नई पंचायतों के गठन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में समिति ने मौजूदा पंचायत सीमाओं के आधार पर चुनाव कराने और नई जनगणना के आंकड़े आने के बाद वैज्ञानिक तरीके से परिसीमन करने की मांग रखी।
पंचायत चुनाव को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव
बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ प्रशासनिक तैयारियों का मुद्दा भी सामने आने लगा है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को संवैधानिक समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
समिति के मुताबिक पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल संविधान के प्रावधानों के तहत पांच वर्ष का होता है। इसलिए मौजूदा पंचायत संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नई संस्थाओं के गठन के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
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समिति ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि पंचायत चुनाव को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रखी जाए। चुनाव की तैयारी और उससे जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए स्पष्ट कार्यक्रम सामने लाया जाए।
2011 की जनगणना पर परिसीमन को लेकर सवाल
बैठक में सबसे अहम मुद्दों में पंचायतों के परिसीमन का विषय रहा। समिति ने 2011 की जनगणना के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन को लेकर सवाल उठाए हैं।
समिति का तर्क है कि वर्तमान समय में नई जनगणना की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में पुरानी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाओं में बड़ा बदलाव करना भविष्य में दोबारा परिसीमन की स्थिति पैदा कर सकता है।

समिति ने सरकार के गजट में बताए गए प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च 2027 तक परिसीमन नहीं करने की स्थिति में मौजूदा प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखना उचित होगा। समिति चाहती है कि नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद पंचायतों का परिसीमन नए सिरे से किया जाए।
पंचायत चुनाव मौजूदा सीमा पर कराने की मांग
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संघर्ष समिति की प्रमुख मांग है कि 2026 में चुनाव मौजूदा पंचायत सीमाओं के आधार पर कराया जाए। समिति का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सकेगी और पंचायत संस्थाओं में संवैधानिक निरंतरता बनी रहेगी। इसके बाद जब 2026-27 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हो जाएं, तब पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जा सकता है। समिति इसे अधिक वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रक्रिया बता रही है।
समिति के अनुसार, नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने से आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप पंचायतों की सीमाएं तय की जा सकेंगी। इससे बार-बार सीमा परिवर्तन की संभावना भी कम होगी।
नई पंचायतें बनीं तो बढ़ेगा खर्च
परिसीमन के साथ नई पंचायतों के गठन का सवाल भी जुड़ा हुआ है। समिति ने बैठक में कहा कि पंचायतों की संख्या बढ़ने पर सरकार पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ भी बढ़ेगा।
नई पंचायत बनने के बाद केवल कागज पर सीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। वहां पंचायत भवन, स्कूल, कार्यालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होगी। इसके अलावा पंचायत सचिव, कर्मचारी, कार्यपालक सहायक, जूनियर इंजीनियर और सफाईकर्मियों जैसे मानव संसाधनों की भी आवश्यकता पड़ेगी। समिति का कहना है कि यदि नई पंचायतों का गठन किया जाता है तो सरकार को पहले से ही इसके लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए। इसमें बजट, जमीन, भवन और कर्मचारियों की व्यवस्था का आकलन शामिल होना चाहिए।
पंचायत चुनाव से पहले तैयारियों पर जोर
समिति का मानना है कि पंचायत चुनाव केवल मतदान कराने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। चुनाव के बाद पंचायतों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रशासनिक ढांचा भी तैयार रहना जरूरी है। नई पंचायतों की संभावित संख्या का आकलन पहले किया जाए तो सरकार को आवश्यक संसाधनों की योजना बनाने का पर्याप्त समय मिल सकता है। पंचायत भवनों के निर्माण से लेकर कर्मचारियों की नियुक्ति और बजट आवंटन तक की तैयारी पहले से की जा सकती है।
इसी वजह से समिति नई जनगणना के आंकड़े आने के बाद वैज्ञानिक परिसीमन को प्राथमिकता देने की बात कह रही है। उसका कहना है कि इससे सरकार को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से योजना बनाने में सुविधा होगी।
परिसीमन पर घिरी सरकार, स्पष्ट नीति की मांग
पंचायत चुनाव के साथ परिसीमन का मुद्दा सरकार के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। संघर्ष समिति ने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की है। समिति का कहना है कि अगर पुरानी जनगणना के आधार पर पंचायतों की सीमाओं में बदलाव किया जाता है और बाद में नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर फिर से परिसीमन करना पड़े, तो इससे प्रशासनिक और वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में समिति चाहती है कि परिसीमन की प्रक्रिया को फिलहाल टालकर पहले पंचायत चुनाव कराया जाए। इसके बाद नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर विस्तृत परिसीमन किया जाए।
पंचायत चुनाव पर निर्वाचन आयोग के रुख पर नजर
अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार और बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के रुख पर नजर है। पंचायत चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी और चुनावी प्रक्रिया की तैयारियों को देखते हुए आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। समिति ने निर्वाचन आयोग से भी आग्रह किया है कि चुनाव कार्यक्रम को लेकर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकार से परिसीमन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या निर्वाचन आयोग की ओर से कोई औपचारिक निर्णय सामने आता है, तो पंचायत चुनाव की तैयारियों की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।
2026 में चुनाव, फिर नई जनगणना के बाद परिसीमन
समिति ने अपनी मांग का एक स्पष्ट खाका सरकार के सामने रखा है। उसके अनुसार, 2026 में मौजूदा पंचायत सीमाओं के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराया जाए। इसके बाद 2026-27 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होने पर नए सिरे से पंचायतों का वैज्ञानिक परिसीमन किया जाए।

समिति का तर्क है कि इस व्यवस्था से चुनाव में देरी से बचा जा सकता है और भविष्य में पंचायतों के पुनर्गठन की बेहतर योजना तैयार की जा सकती है। साथ ही नई पंचायतों के लिए आवश्यक भवन, बजट और कर्मचारियों की जरूरत का भी आकलन किया जा सकेगा।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर संघर्ष समिति की बैठक के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। समिति ने समय पर चुनाव कराने, मौजूदा पंचायत सीमा पर चुनाव कराने और नई जनगणना के बाद परिसीमन करने की मांग उठाई है।
दूसरी ओर, नई पंचायतों के गठन से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक इंतजाम भी सरकार के सामने महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। ऐसे में आने वाले समय में सरकार को चुनाव और परिसीमन दोनों को लेकर स्पष्ट रणनीति तय करनी होगी। निगाहें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार समिति की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और 2026 के पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर किस तरह की समयसीमा सामने आती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
