RJD की पूर्व महिला प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल बीजेपी में शामिल, तेजस्वी यादव पर साधा निशाना

रितु जायसवाल

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की पूर्व महिला प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया

बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की पूर्व महिला प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष रितु जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।

हालांकि, पार्टी जॉइनिंग के दौरान एक दिलचस्प वाकया भी देखने को मिला। जब रितु जायसवाल मीडिया के सामने बीजेपी का नाम बोल रही थीं, तब वह “भारतीय जनता…” कहकर रुक गईं और संजय सरावगी की तरफ देखने लगीं। इसके बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मुस्कुराते हुए कहा, “पार्टी बोलिए।” तब उन्होंने पूरा नाम लेते हुए “भारतीय जनता पार्टी” कहा।

कार्यक्रम में एक और मजेदार पल तब आया जब संजय सरावगी ने नेताओं को सदस्यता दिलाने के बाद गलती से कह दिया कि “सभी लोगों ने RJD जॉइन की है।” हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी बात सुधारी और कहा कि “सभी लोगों ने बीजेपी जॉइन की है।”

बीजेपी में शामिल होने के बाद क्या बोलीं रितु जायसवाल?

बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद रितु जायसवाल ने कहा कि उन्हें पता है कि उनके पुराने वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल कर उन्हें ट्रोल किया जाएगा, लेकिन वह इससे डरने वाली नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “जब मैंने परिहार विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब भी लोगों ने मुझे बागी कहा था। लेकिन मैं कभी बागी नहीं हुई। उस समय बागी परिहार की जनता हो चुकी थी। जनता चाहती थी कि रितु जायसवाल चुनाव लड़े।”

उन्होंने बताया कि निर्दलीय चुनाव में उन्हें करीब 65 हजार वोट मिले थे, जो जनता के समर्थन को दर्शाता है। रितु जायसवाल ने बीजेपी की विचारधारा की तारीफ करते हुए कहा कि यह पार्टी राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती है और प्रधानमंत्री Narendra Modi देश के लिए लगातार बेहतर काम कर रहे हैं।

“मोदी सरकार की योजनाओं से प्रभावित हूं”

रितु जायसवाल ने कहा कि उन्होंने बीजेपी इसलिए जॉइन की क्योंकि केंद्र सरकार की योजनाओं से वह काफी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाएं समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा, “आज से मैं भाजपा की नेत्री हूं। मुझे लगता है कि केंद्र सरकार गरीबों, महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए बेहतर काम कर रही है। योजनाओं का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंच रहा है।”

रितु जायसवाल ने यह भी कहा कि राजनीति उनके लिए केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा और जिम्मेदारी निभाने का जरिया है।

तेजस्वी यादव पर साधा निशाना

बीजेपी में शामिल होने के बाद रितु जायसवाल ने Tejashwi Yadav पर भी निशाना साधा। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि वह तेजस्वी यादव को राखी बांधती थीं, तो उन्होंने जवाब दिया कि “आपने देखा ही है कि रोहिणी के साथ क्या हुआ। मैं तो सिर्फ मुंह बोली बहन थी।”

उन्होंने बिना ज्यादा विस्तार में जाए संकेत दिया कि पार्टी में रिश्तों और कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर उन्हें निराशा हुई।

रितु जायसवाल ने तेजस्वी यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता Lalu Prasad Yadav से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लालू यादव अपने कार्यकर्ताओं से सीधे मिलते थे और उनकी समस्याओं को सुनते थे, लेकिन तेजस्वी यादव ऐसा नहीं करते।

उन्होंने कहा, “अगर कोई कार्यकर्ता आपके दरवाजे पर मिलने आता है, तो कम से कम उससे मिल लेना चाहिए। लालू जी हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता को महत्व देते थे। यही वजह थी कि कार्यकर्ताओं का उनसे भावनात्मक जुड़ाव था।”

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने किया स्वागत

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने रितु जायसवाल का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि बीजेपी लगातार मजबूत हो रही है और दूसरे दलों के नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अगर हमने अपने दरवाजे पूरी तरह खोल दिए, तो RJD की चौखट पर नेता नहीं दिखेंगे।”

संजय सरावगी ने दावा किया कि बीजेपी की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रभावित होकर लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रितु जायसवाल के आने से पार्टी को महिला वर्ग और मिथिलांचल क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।

परिहार सीट से टिकट कटने के बाद बढ़ी दूरी

रितु जायसवाल और RJD के बीच दूरी 2025 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बढ़ी थी। RJD ने परिहार विधानसभा सीट से उनका टिकट काट दिया था। पार्टी ने वहां से रामचंद्र पूर्वे की बहू को उम्मीदवार बनाया।

टिकट कटने के बाद रितु जायसवाल ने खुलकर नाराजगी जताई और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गईं। हालांकि, उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने करीब 64 हजार वोट हासिल किए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके चुनाव लड़ने से RJD उम्मीदवार को नुकसान हुआ और पार्टी को सीट गंवानी पड़ी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व से उनका विवाद और बढ़ गया था।

सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई थी नाराजगी

बीजेपी जॉइन करने से पहले 24 मई को रितु जायसवाल ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर राजनीतिक संकेत दिए थे।

उन्होंने लिखा था कि देश संवेदनशील परिस्थितियों से गुजर रहा है और राजनीति को दिखावे का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा बचत और सादगी की अपील का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीति उनके लिए सेवा और विचार का माध्यम है।

उनकी इस पोस्ट के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि वह जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती हैं।

RJD में लंबा राजनीतिक सफर

रितु जायसवाल बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। वह RJD महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके अलावा 2021 से 2023 तक पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।

2020 बिहार विधानसभा चुनाव में RJD ने उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार मिली थी। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा।

लोकसभा चुनाव में उन्हें करीब 4.47 लाख वोट मिले थे, लेकिन वह NDA उम्मीदवार Lovely Anand से लगभग 29 हजार वोटों से हार गई थीं।

इसके बावजूद वह लगातार पार्टी में सक्रिय रहीं, लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद हालात बदल गए।

बिहार की राजनीति में क्या पड़ेगा असर?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, रितु जायसवाल का बीजेपी में शामिल होना बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर महिला वोट बैंक और मिथिलांचल क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।

बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए लगातार दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं RJD के लिए यह झटका माना जा रहा है, क्योंकि रितु जायसवाल लंबे समय तक पार्टी का प्रमुख महिला चेहरा रही हैं।

अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें आने वाले चुनावों में क्या जिम्मेदारी देती है और बिहार की राजनीति में उनकी नई भूमिका क्या होती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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