ललन सिंह निकले बिहार की सबसे निकम्मे सांसद, खर्च नहीं किया MP-LADS फंड, ये सांसद रही सबसे आगे, पढ़ें ख़ास रिपोर्ट
सांसद फंड में जीरो ललन सिंह
निष्कर्ष भारत, संवाददाता नई दिल्ली। 18वीं लोकसभा के गठन के दो साल से अधिक समय बाद बिहार के 40 लोकसभा सांसदों के सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS फंड के इस्तेमाल का आंकड़ा चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बिहार के सांसदों के लिए कुल 599.95 करोड़ रुपये की राशि आवंटित हुई, जिसमें करीब 257.07 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यानी कुल उपयोग लगभग 42.9 फीसदी रहा है।
आंकड़ों में जहां कुछ एमपी ने अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया है, वहीं कई सांसदों के खाते में खर्च बेहद कम या शून्य दर्ज है। यही वजह है कि सांसदों के निधि के उपयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
सांसद निधि खर्च में ललन सिंह का प्रदर्शन सबसे नीचे
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मुंगेर से एमपी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के खाते में MPLADS फंड का उपयोग शून्य दर्ज किया गया है। इसी तरह मीसा भारती, राजीव प्रताप रूडी और संजय जायसवाल समेत कुछ अन्य सांसदों के खाते में भी फिलहाल खर्च शून्य दिखाई देता है।
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हालांकि किसी एमपी के फंड का कम या शून्य उपयोग होने का मतलब सीधे तौर पर यह नहीं है कि विकास कार्य नहीं हुए हैं। MPLADS में एमपी विकास कार्यों की अनुशंसा करते हैं, जबकि संबंधित जिला प्रशासन और कार्यान्वयन एजेंसियां कार्यों को मंजूरी और क्रियान्वित करती हैं। योजना का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के आधार पर टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियां तैयार करना है।
सांसद फंड के इस्तेमाल में वीणा देवी सबसे आगे
दूसरी ओर वैशाली की एमपी वीणा देवी उपलब्ध आंकड़ों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सांसदों में सबसे आगे हैं। उन्हें 14.70 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिसमें 13.11 करोड़ रुपये खर्च दर्ज है। उनका फंड उपयोग करीब 89.2 फीसदी है।

इस आंकड़े से साफ है कि सांसदों के निधि के उपयोग में बिहार के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर है। एक तरफ कुछ क्षेत्रों में आवंटित राशि का अधिकांश हिस्सा खर्च हो चुका है, तो दूसरी तरफ कई एमपी अभी तक फंड का उपयोग शुरू नहीं कर पाए हैं या बहुत कम राशि खर्च हुई है।
सांसद प्रदीप कुमार सिंह भी आगे
अररिया के एमपी प्रदीप कुमार सिंह ने 14.70 करोड़ रुपये में से करीब 11.82 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उनका उपयोग प्रतिशत 80.46 फीसदी बताया गया है। इसके बाद बांका के गिरिधारी यादव का नाम आता है, जिनका फंड उपयोग 78.10 फीसदी है।
सीवान की एमपी विजयलक्ष्मी देवी ने 77.26 फीसदी और झंझारपुर के रामप्रीत मंडल ने 73.14 फीसदी राशि का इस्तेमाल किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ एमपी अपने क्षेत्रों में MPLADS के जरिए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत तेजी दिखा रहे हैं।
60 फीसदी से ज्यादा फंड खर्च करने वाले सांसद
रिपोर्ट के अनुसार बक्सर के सुधाकर सिंह ने 66.34 फीसदी, मुजफ्फरपुर के राज भूषण चौधरी ने 65.56 फीसदी और सासाराम के मनोज कुमार ने 64.62 फीसदी MPLADS राशि खर्च की है।
जमुई के अरुण भारती का उपयोग 62.04 फीसदी और मधेपुरा के दिनेश चंद्र यादव का 61.63 फीसदी दर्ज है। वहीं किशनगंज के डॉ. मोहम्मद जावेद ने 59.91 फीसदी और सुपौल के दिलेश्वर कामैत ने 56.31 फीसदी राशि का इस्तेमाल किया है।
दरभंगा के गोपाल जी ठाकुर का फंड उपयोग 51.54 फीसदी, भागलपुर के अजय कुमार मंडल का 51.19 फीसदी और कटिहार के तारिक अनवर का 50.96 फीसदी रहा। खगड़िया के राजेश वर्मा ने 50.47 फीसदी और पूर्णिया के राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 49.40 फीसदी राशि का इस्तेमाल किया है। काराकाट के राजा राम सिंह का उपयोग 48.77 फीसदी दर्ज है।
सांसद निधि का औसत उपयोग 43 फीसदी से भी कम
बिहार के सभी 40 लोकसभा सांसदों को मिलाकर देखें तो MPLADS फंड का कुल उपयोग करीब 42.9 फीसदी है। कुल 599.95 करोड़ रुपये में से लगभग 257.07 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। उपलब्ध डैशबोर्ड में बिहार के लिए 5,569 कार्य दर्ज हैं।

यह आंकड़ा अपने आप में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि MPLADS का मकसद सांसदों को अपने क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों की अनुशंसा करने का अवसर देना है। ऐसे में फंड का कम उपयोग होने पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राशि खर्च होने में देरी की वजह सांसदों की ओर से कम अनुशंसा है या प्रशासनिक प्रक्रिया।
सांसदों के प्रदर्शन में इतना अंतर क्यों?
MPLADS की व्यवस्था में एमपी सीधे सरकारी खजाने से पैसा खर्च नहीं करते। सांसदों की भूमिका मुख्य रूप से अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की अनुशंसा करने की होती है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां योजना की तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी करती हैं और कार्यों को लागू करती हैं।
इसलिए फंड उपयोग का आंकड़ा एमपी के व्यक्तिगत खर्च का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। किसी क्षेत्र में कम उपयोग के पीछे योजनाओं की मंजूरी, प्रशासनिक प्रक्रिया, जमीन से जुड़े मुद्दे, कार्यान्वयन एजेंसी या अन्य कारण हो सकते हैं।
सांसद निधि और विकास कार्यों पर बढ़ेगी निगाह
बिहार में MPLADS फंड के ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब सांसदों के क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सामुदायिक भवन और अन्य स्थानीय सुविधाओं से जुड़े कार्यों में इस योजना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
वीणा देवी जैसे सांसदों का करीब 89 फीसदी उपयोग और कुछ सांसदों का शून्य उपयोग इस अंतर को स्पष्ट करता है। अब राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा उठ सकता है कि जिन क्षेत्रों में फंड का इस्तेमाल कम हुआ है, वहां विकास योजनाओं की रफ्तार क्यों धीमी है।
सांसदों के लिए अब चुनौती फंड को जमीन पर उतारने की
MPLADS में राशि का आवंटन अपने आप में विकास की गारंटी नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि अनुशंसित योजनाएं कितनी जल्दी मंजूर होती हैं और उनका काम जमीन पर कब पूरा होता है। इसलिए आने वाले समय में सांसदों के प्रदर्शन को केवल खर्च की राशि से नहीं, बल्कि पूरे हुए कार्यों और उनके वास्तविक प्रभाव से भी देखना अहम होगा।
फिलहाल बिहार के MPLADS आंकड़े तस्वीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर सामने रखते हैं। कुछ एमपी फंड उपयोग में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ के खाते में खर्च शून्य है। अब निगाह इस बात पर होगी कि आने वाले महीनों में कम उपयोग वाले सांसद अपने क्षेत्रों में विकास निधि के इस्तेमाल की गति कितनी बढ़ा पाते हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
